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जीव विज्ञान और पर्यावरण

माउंट किलिमंजारो में भयानक आग

  • 13 Oct 2020
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये

माउंट किलिमंजारो, ज्वालामुखी शंकु

मेन्स के लिये

वनाग्नि की समस्या, कारण प्रभाव और उपाय

चर्चा में क्यों?

अफ्रीकी महाद्वीप की सबसे ऊँची चोटी माउंट किलिमंजारो (Mount Kilimanjaro) भयानक आग का सामना कर रही है।

प्रमुख बिंदु

  • माउंट किलिमंजारो 
    • तंज़ानिया में अवस्थित माउंट किलिमंजारो (Kilimanjaro) अफ्रीका महाद्वीप का सबसे ऊँचा पर्वत है, जिसकी ऊँचाई लगभग 5,895 मीटर है। 
    • माउंट किलिमंजारो पूर्वी अफ्रीका में तंज़ानिया के उत्तर-पूर्व में लगभग भूमध्य रेखा पर अवस्थित है। 
    • अफ्रीका का सबसे ऊँचा पर्वत होने के साथ-साथ माउंट किलिमंजारो (Kilimanjaro) विश्व के सात सबसे ऊँचे पर्वतों में से एक है। 
    • माउंट किलिमंजारो को पर्वतारोहियों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है, क्योंकि इस पर चढ़ाई करना विश्व के सबसे ऊँचे सात पर्वतों में सबसे आसान है।
  • फ्री-स्टैंडिंग माउंटेन
    • ध्यातव्य है कि माउंट किलिमंजारो विश्व का सबसे ऊँचा ‘फ्री-स्टैंडिंग माउंटेन’ है, जिसका अर्थ है कि यह किसी भी पर्वत शृंखला का हिस्सा नहीं है।
      • अधिकांश ऊँचे पर्वत किसी-न-किसी पर्वत शृंखला का हिस्सा होते है, जैसे माउंट एवरेस्ट हिमालय पर्वत शृंखला का हिस्सा है।
    • भू-वैज्ञानिक मानते हैं कि माउंट किलिमंजारो का निर्माण अनुमानतः 460,000 वर्ष पूर्व ज्वालामुखी गतिविधि के कारण हुआ था। 
      • इस पर्वत पर तीन ज्वालामुखी शंकु [किबो (Kibo), शिरा (Shira) एवं मावेंज़ी (Mawenzi)] हैं जिनमें किबो ज्वालामुखी सबसे ऊँचा है।

ज्वालामुखी शंकु (Volcanic Cone):

Volcanic-Cone

  • ज्वालामुखी शंकु सबसे साधारण ज्वालामुखी भू-आकृतियों में से एक हैं। इनका निर्माण ज्वालामुखी उद्गार के समय निकास नलिका से निकले पदार्थ के निकास नली के चारों ओर शंक्वाकार रूप में जमने से होता है, जबकि इस शंकु का मध्य भाग एक गर्त के रूप में विकसित होता है।
  • इस तरह माउंट किलिमंजारो एक स्ट्रैटोज्वालामुखी है। जहाँ माउंट किलिमंजारो के शिरा और मावेंज़ी ज्वालामुखी तो विलुप्त हो चुके हैं यानी अब इनके नीचे किसी भी प्रकार की गतिविधि नहीं होती है, वहीं किबो ज्वालामुखी अभी विलुप्त नहीं हुआ है, बल्कि यह निष्क्रिय है, इस तरह इसमें कभी भी विस्फोट हो सकता है।
    • यद्यपि किबो ज्वालामुखी में बीते 10000 वर्षों में विस्फोट नहीं हुआ है परंतु वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें किसी भी समय विस्फोट हो सकता है। 

इतिहास

  • जहाँ माउंट किलिमंजारो के भू-वैज्ञानिक इतिहास का तो पता लगाया जा चुका है, वहीं इस पर्वत के नाम के इतिहास को लेकर अभी तक कोई आम सहमति नहीं बन पाई है।
  • यूरोपीय खोजकर्त्ताओं ने वर्ष 1860 में ‘किलिमंजारो’ नाम को अपनाया था और उनका मानना था कि यह शब्द तंज़ानिया की स्‍वाहि‍ली भाषा का शब्द है।
  • लेकिन वर्ष 1907 में प्रकाशित एक पुस्तक में कहा गया कि इस पर्वत का नाम असल में ‘किलिमा-नजारो’ था, जिसमें ‘किलिमा’ स्वाहिली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है पर्वत और ‘नजारो’ उत्तरी तंज़ानिया में बोली जाने वाली चग्गा (Chagga) भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘सफेदी’।
  • माउंट किलिमंजारो पर पहली बार वर्ष 1889 में एक जर्मन भूविज्ञानी हैंस मेयर (Hans Meyer), एक ऑस्ट्रियाई पर्वतारोही लुडविग पुर्श्चेलेर (Ludwig Purtscheller) और एक स्थानीय गाइड योहानी किनाला द्वारा चढ़ाई की गई थी। ध्यातव्य है कि जर्मन भूविज्ञानी हैंस मेयर ने इससे पहले भी दो बार प्रयास किये थे, किंतु वे असफल रहे थे।

Tanzania

वनाग्नि की समस्या

  • बीते वर्ष सितंबर माह में शुरू हुई ऑस्ट्रेलिया की भीषण वनाग्नि ने वहाँ काफी बड़े पैमाने पर विनाश किया था, इस वनाग्नि में मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड जैसे क्षेत्र प्रभावित हुए थे।
  • ब्राज़ील स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च (National Institute for Space Research-INPE) के आँकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2019 में ब्राज़ील के अमेज़न वनों (Amazon Forests) ने कुल 74,155 बार आग का सामना किया। साथ ही यह बात भी सामने आई थी कि अमेज़न वन में आग की घटनाएँ वर्ष 2018 से 85 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
  • विश्व भर में वनाग्नि की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं और भारत भी इन घटनाओं से बच नहीं पाया है। भारत में प्रतिवर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में वनाग्नि की घटनाएँ दर्ज की जाती हैं।
  • कारण
    • अलग-अलग क्षेत्रों में वनाग्नि के भिन्न-भिन्न कारण होते हैं, जिसमें प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानवीय कारण भी शामिल हैं। 
    • आकाशीय बिजली वनाग्नि के प्राकृतिक कारणों में सबसे प्रमुख है, जिसकी वजह से पेड़ों में आग लगती है और धीरे-धीरे आग पूरे जंगल में फैल जाती है। इसके अतिरिक्त उच्च वायुमंडलीय तापमान और कम आर्द्रता वनाग्नि के लिये अनुकूल परिस्थिति प्रदान करती हैं।
    • वहीं विश्व भर में देखे जानी वाली वनाग्नि की अधिकांश घटनाएँ मानव निर्मित होती हैं। वनाग्नि के मानव निर्मित कारकों में कृषि हेतु नए खेत तैयार करने के लिये वन क्षेत्र की सफाई, वन क्षेत्र के निकट जलती हुई सिगरेट या कोई अन्य ज्वलनशील वस्तु छोड़ देना आदि शामिल हैं।
  • प्रभाव
    • जंगलों में लगने वाली आग के कारण उस क्षेत्र विशिष्ट की प्राकृतिक संपदा और संसाधनों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है।
    • वनाग्नि के कारण जानवरों के रहने का स्थान नष्ट हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप नए स्थान की खोज में वे शहरों की ओर जाते हैं और शहरों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हैं।
    • अमेज़न जैसे बड़े जंगलों में वनाग्नि के कारण जैव विविधता और पौधों तथा जानवरों के विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाता है।

आगे की राह

  • यद्यपि तंज़ानिया अवस्थित माउंट किलिमंजारो में ऐसे समय में आग लगी है जब पर्यटन सीज़न समाप्त हो रहा है, किंतु यदि इस आग को जल्द-से-जल्द नहीं बुझाया गया तो यह और अधिक गंभीर रूप धारण कर सकती है, जिसका प्रभाव माउंट किलिमंजारो पर आने वाले पर्यटकों और पर्वतारोहियों की संख्या पर पड़ेगा।
  • विश्लेषण बताता है कि विश्व भर के जंगलों और वनों में भयानक आग की घटनाएँ अधिकांशतः मानवीय कारणों से प्रेरित होती हैं, अतः इन पर आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है।
  • आवश्यक है कि वनाग्नि प्रबंधन के लिये विभिन्न नवीन विचारों की खोज की जाए, इस संबंध में वनाग्नि प्रबंधन को लेकर अलग-अलग देशों द्वारा अपनाए जा रहे मॉडल की समीक्षा की जा सकती है और अपनी परिस्थितियों के अनुकूल उनमें परिवर्तन किया जा सकता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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