हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 13 Jan, 2022
  • 24 min read
प्रारंभिक परीक्षा

हेनले पासपोर्ट सूचकांक 2022

हाल ही में जारी सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट रिपोर्ट 'हेनले पासपोर्ट सूचकांक 2022' (Henley Passport Index 2022) में भारत को 83वांँ स्थान दिया गया है।

  • भारत की पासपोर्ट क्षमता में इस तिमाही में सुधार हुआ है, जो पिछले साल वर्ष 2021 की 90वी रैंक की तुलना में सात पायदान ऊपर है।
  • मौजूदा रैंकिंग वर्ष 2022 की पहली तिमाही के लिये है।

सूचकांक के बारे में:

  • ‘हेनले पासपोर्ट इंडेक्स’ दुनिया के सभी पासपोर्टों की मूल रैंकिंग है, जो यह बताता है कि किसी एक विशेष देश का पासपोर्ट धारक कितने देशों में बिना पूर्व वीज़ा के यात्रा कर सकता है।
  • यह इंडेक्स मूलतः डॉ. क्रिश्चियन एच. केलिन (हेनले एंड पार्टनर्स के अध्यक्ष) द्वारा स्थापित किया गया था और इसकी रैंकिंग ‘इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन’ (IATA) के विशेष डेटा पर आधारित है, जो अंतर्राष्ट्रीय यात्रा की जानकारी का दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सटीक डेटाबेस प्रदान करता है।
  • इसे 2006 में लॉन्च किया गया था और इसमें 199 विभिन्न पासपोर्ट शामिल हैं।
  • इसे पूरे वर्ष वास्तविक समय में और जब वीज़ा नीति परिवर्तन प्रभावी होती इसका अद्यतन किया जाता है।

वैश्विक रैंकिंग:

  • जापान और सिंगापुर सूचकांक में शीर्ष पर हैं
  • जर्मनी और दक्षिण कोरिया नवीनतम रैंकिंग में संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर है जबकि फिनलैंड, इटली, लक्जमबर्ग और स्पेन तीसरे स्थान पर रहे है।
  • अफगानिस्तान और इराक 'सबसे खराब पासपोर्ट रखने' की श्रेणी में बने हुए हैं।

भारत का प्रदर्शन:

  • वर्ष 2020 में भारत 84वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2016 में भारत माली और उज़्बेकिस्तान के साथ 85वें स्थान पर था।
  • इस वर्ष भारत (2022 में 83वाँ स्थान) रवांडा और युगांडा के बाद मध्य अफ्रीका में ‘साओ टोम तथा प्रिंसिपे’ के साथ  अपना स्थान साझा कर रहा है।
  • इस प्रकार भारत के पास अब ओमान और आर्मेनिया के नवीनतम परिवर्द्धन के साथ दुनिया भर में 60 गंतव्यों के लिये वीज़ा-मुक्त पहुँच है। भारत ने वर्ष 2006 के बाद से इस सूची में 35 और गंतव्य स्थान जोड़े हैं।

प्रारंभिक परीक्षा

ब्रह्मोस का उन्नत संस्करण

हाल ही में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक विस्तारित रेंज के समुद्र-से-समुद्र संस्करण का परीक्षण स्टील्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस विशाखापत्तनम से किया गया था।

  • ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ने तैयार किया है। 

Brahmos

प्रमुख बिंदु:

  • एडवांस वेरिएंट के बारे में:
    • ब्रह्मोस मिसाइल को शुरुआत में 290 किमी. की रेंज के साथ विकसित किया गया था।
    • मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) के दायित्त्वों के अनुसार, मिसाइल की रेंज मूल रूप से 290 किमी थी।
    • हालाँकि जून 2016 में MTCR में भारत के प्रवेश के बाद इसकी रेंज लगभग 450 किलोमीटर थी और भविष्य में 600 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।
  • ब्रह्मोस के बारे में:
    • ब्रह्मोस रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (The Defence Research and Development Organisation) तथा रूस के NPOM का एक संयुक्त उद्यम है।
    • इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। 
    • यह दो चरणों वाली (पहले चरण में ठोस प्रणोदक इंजन और दूसरे में तरल रैमजेट) मिसाइल है।
    • यह एक मल्टीप्लेटफॉर्म मिसाइल है यानी इसे ज़मीन, हवा और समुद्र तथा बहु क्षमता वाली मिसाइल से सटीकता के साथ लॉन्च किया जा सकता है, जो किसी भी मौसम में दिन और रात में काम करती है।
    • यह ‘फायर एंड फॉरगेट्स’ सिद्धांत पर कार्य करती है यानी लॉन्च के बाद इसे मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती।
    • ब्रह्मोस सबसे तेज़ क्रूजज़ मिसाइलों में से एक है, यह वर्तमान में मैक 2.8 की गति के साथ कार्य करती है, जो कि ध्वनि की गति से लगभग 3 गुना अधिक है। 
  • INS विशाखापत्तनम के बारे में:
    • यह प्रोजेक्ट-15B के तहत विकसित चार अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर का पहला जहाज़ है। ‘प्रोजेक्ट-15B’ के तहत अन्य तीन जहाज़:
      • ‘प्रोजेक्ट-15B’ का दूसरा जहाज़- ‘मुरगाँव’ को वर्ष 2016 में लॉन्च किया गया था और इसे बंदरगाह परीक्षणों के लिये तैयार किया जा रहा है।
      • तीसरा जहाज़ (इंफाल) है जिसे वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया था और यह अपने  एक उन्नत चरण में है।
      • चौथा जहाज़ (सूरत) ब्लॉक इरेक्शन  (Block Erection) के तहत है तथा इसे चालू वित्तीय वर्ष (2022) में लॉन्च किया जाएगा।
    • प्रोजेक्ट 15बी (P 15B) के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई में निर्माणाधीन हैं। 

मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR)

  • यह मिसाइल और मानव रहित हवाई वाहन प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकने हेतु 35 देशों के मध्य  एक अनौपचारिक और स्वैच्छिक साझेदारी है, जो 300 किमी से अधिक दूरी के लिये  500 किलोग्राम से अधिक पेलोड ले जाने में सक्षम है।
  • इस प्रकार सदस्यों को ऐसी मिसाइलों और यूएवी प्रणालियों की आपूर्ति करने से रोका जाता है जो गैर-सदस्यों के लिये MTCR द्वारा नियंत्रित होती हैं।
  • निर्णय सभी सदस्यों की सहमति से लिये जाते हैं।
  • यह सदस्य देशों का एक गैर-संधि संघ है, जिसमें मिसाइल प्रणालियों के लिये सूचना साझा करने, राष्ट्रीय नियंत्रण कानूनों और निर्यात नीतियों तथा इन मिसाइल प्रणालियों की ऐसी महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सीमित करने हेतु एक नियम-आधारित विनियमन तंत्र के बारे में कुछ दिशा-निर्देश हैं।
  • इसकी स्थापना अप्रैल 1987 में जी -7 देशों - अमेरिका, यूके, फ्राँस, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान द्वारा की गई थी।
  • वर्ष 1992 में MTCR का ध्यान सभी प्रकार के सामूहिक विनाश (WMD) यानी परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों की डिलीवरी के लिये मिसाइलों के प्रसार पर केंद्रित था।
  • यह कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं है। इसलिये शासन के दिशा-निर्देशों का पालन न करने के खिलाफ कोई दंडात्मक उपाय नहीं किया जा सका  है।
  • वर्ष 2016 में भारत 35वें सदस्य के रूप में मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में शामिल हुआ।
  • भारत उच्च स्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी की खरीद कर सकता है और अन्य देशों के साथ मानव रहित हवाई वाहनों के विकास हेतु संयुक्त कार्यक्रम का क्रियान्वयन कर सकता है। उदाहरण के लिये इज़रायल से थिएटर मिसाइल इंटरसेप्टर "एरो II" (Arrow II), संयुक्त राज्य अमेरिका से सैन्य ड्रोन जैसे "एवेंजर" (Avenger) आदि की खरीद।

स्रोत: द हिदू 


प्रारंभिक परीक्षा

राष्ट्रीय युवा दिवस 2022

स्वामी विवेकानंद की जयंती को हर वर्ष 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day NYD) के रूप में आयोजित किया जाता है।

  • वर्ष 1999 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया।

Swami-Vivekananda

प्रमुख बिंदु 

स्वामी विवेकानंद (1863-1902):

  • स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को हुआ तथा उनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था।
  • उन्होंने दुनिया को वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से परिचित करवाया।
  • वे 19वीं सदी के आध्यात्मिक गुरु एवं विचारक रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे।
  • उन्होंने अपनी मातृभूमि के उत्थान के लिये शिक्षा पर सबसे अधिक ज़ोर दिया। साथ ही उन्होंने चरित्र-निर्माण आधारित शिक्षा का समर्थन किया।
  • वर्ष 1897 में उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। रामकृष्ण मिशन एक संगठन है, जो मूल्य-आधारित शिक्षा, संस्कृति, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, युवा और आदिवासी कल्याण एवं राहत तथा पुनर्वास के क्षेत्र में काम करता है। 
  • वर्ष 1902 में बेलूर मठ में उनका निधन हो गया। पश्चिम बंगाल में स्थित बेलूर मठ, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है।

स्रोत: पी.आई.बी.


प्रारंभिक परीक्षा

पशु से मानव प्रत्यारोपण (Xenotransplantation)

हाल ही में डॉक्टरों ने अमेरिका में एक मरीज की जान बचाने के अंतिम प्रयास में उसमें सुअर के दिल का प्रत्यारोपण किया।

Animal-to-Human-Transplants

प्रमुख बिंदु

  • ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के बारे में:
    • ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन (Xenotransplantation) में मानव में अमानवीय (मनुष्य के अलावा किसी अन्य से) ऊतकों या अंगों का प्रत्यारोपण शामिल है।
    • सुअर के दिल का इंसान में यह पहला सफल प्रत्यारोपण है। हालाँकि यह बहुत जल्द पता चल जाएगा कि क्या ऑपरेशन वास्तव में काम करेगा।
    • जीन-एडिटिंग से गुज़रने वाले सुअर के दिल का उपयोग उसकी कोशिकाओं में शुगर को हटाने के लिये किया गया है जो उस अंग अस्वीकरण हेतु उत्तरदायी है।
      • जीनोम एडिटिंग (जिसे जीन एडिटिंग भी कहा जाता है) तकनीकों का एक समूह है जो वैज्ञानिकों को एक जीव के डीऑक्सी-राइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) को बदलने की क्षमता प्रदान करता है।
    • इस तरह के प्रत्यारोपण या ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन के पहले के प्रयास विफल रहे हैं। प्रत्यारोपण में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक अंग अस्वीकरण है।
    • इसने मानव प्रत्यारोपण के लिये सूअरों के उपयोग पर एक बहस फिर से छेड़ दी है, जिसका कई पशु अधिकार समूह विरोध करते रहे हैं।
  • महत्त्व:
    • यह विकास हमें वैश्विक स्तर पर अंग की कमी को हल करने के लिये एक कदम और करीब ला सकता है।
      • भारत में मरीजों को वार्षिक रूप से 25,000-30,000 लीवर ट्रांसप्लांट की ज़रूरत होती है। लेकिन केवल 1,500 के बारे में ही उन्हें प्राप्त होता है।
    • अंग प्रत्यारोपण के लिये सूअर तेज़ी से लोकप्रिय होते जा रहे हैं।
      • सुअर के अंग से लाभ प्राप्त किया जाता हैं, क्योंकि उन्हें छह महीने में वयस्क मानव आकार को बढ़ाना और प्राप्त करना आसान होता है।
      • सुअर के हृदय के वाल्व को नियमित रूप से मनुष्यों में प्रत्यारोपित किया जाता है और मधुमेह के कुछ रोगियों को पोर्सिन अग्न्याशय कोशिकाएँ प्रदान की जाती हैं।

स्रोत: डाउन टू अर्थ


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 13 जनवरी, 2022

डॉ. एस सोमनाथ

प्रख्यात रॉकेट वैज्ञानिक एस. सोमनाथ को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का अध्यक्ष और अंतरिक्ष सचिव नियुक्त किया गया है। एस. सोमनाथ कैलासवादिवू सिवान की जगह लेंगे, जो शुक्रवार को अपना विस्तारित कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। डॉ. सोमनाथ लॉन्च व्हीकल डिज़ाइन सहित कई विषयों के विशेषज्ञ हैं। उन्हें लॉन्च व्हिकल सिस्टम इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल डिज़ाइन, स्ट्रक्चरल डायनामिक्स, इंटीग्रेशन डिज़ाइन और प्रोसेड्योर, मेकैनिज़्म डिज़ाइन तथा पायरोटेक्नीक में महारत हासिल है। वर्तमान में डॉ. एस सोमनाथ केरल के तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSV) के निदेशक हैं। अपने कॅरियर की शुरुआत में वह पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) के इंटीग्रेशन के दौरान टीम लीडर थे। डॉ. सोमनाथ एक ऐसे महत्त्वपूर्ण मोड़ पर इसरो की बागडोर संभाल रहे हैं, जब इस अंतरिक्ष एजेंसी की आगे की यात्रा को परिभाषित करने के लिये व्यापक सुधार और महत्त्वपूर्ण मिशन निर्धारित हैं। विचार यह है कि अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र अधिक जीवंत, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और आत्मनिर्भर बनना चाहिये। ऐसे समय में जब IN-SPACe एक नए मॉडल को परिभाषित कर रहा है, जिसे हमारी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का विस्तार करने के लिये भी डिज़ाइन किया गया है, इसे आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी नए अध्यक्ष की होगी। इसरो वर्ष 2022 में गगनयान मिशन की योजना पर कार्य कर रहा है, इस मिशन में भारत स्वयं के बल पर 3 भारतीयों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना बना रहा है। इस योजना की सफलता के पश्चात् इसरो इस मिशन को जारी रखना चाहता है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत को स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन की आवश्यकता है। भारत ने वर्ष 2017 में ही स्पेस डॉकिंग जैसी तकनीक पर शोध करने के लिये बजट का प्रावधान किया था। ऐसे महत्त्वपूर्ण मिशनों को आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी भी नए अध्यक्ष के समक्ष होगी। 

लोहड़ी

भारत में फसल कटाई त्योहार को मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पौष पर्व जैसे विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है। लोहड़ी उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है। यह मकर संक्राति के एक दिन पहले मनाया जाता है। लोहड़ी पौष के अंतिम दिन सूर्यास्त के बाद (माघ संक्रांति से पहली रात) मनाया जाता है। यह प्राय: 12 या 13 जनवरी को पड़ता है। यह मुख्यत: पंजाब का पर्व है, यह द्योतार्थक (एक्रॉस्टिक) शब्द लोहड़ी की पूजा के समय व्यवहृत होने वाली वस्तुओं के द्योतक वर्णों का समुच्चय होता है, जिसमें ल (लकड़ी) +ओह (गोहा = सूखे उपले) +ड़ी (रेवड़ी) = 'लोहड़ी' के प्रतीक हैं। इसको मनाने के दौरान रात्रि में खुले स्थान पर परिवार और आस-पड़ोस के लोग मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर बैठते हैं। इस दौरान रेवड़ी, मूंँगफली आदि खाए जाते हैं। 

राष्ट्रीय नवाचार सप्ताह

प्रगतिशील भारत के 75वें वर्ष, ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मनाने के उद्देश्य से  शिक्षा मंत्रालय (एमओई), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (डीपीआईआईटी) संयुक्त रूप से 10 जनवरी से लेकर 16 जनवरी 2022 तक ‘राष्ट्रीय नवाचार सप्ताह’ का आयोजन कर रहे हैं। यह नवाचार सप्ताह शिक्षा मंत्रालय का प्रतीकात्मक सप्ताह भी है। यह नवाचार सप्ताह भारत में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस दिशा में जागरूकता फैलाने के लिये इन एजेंसियों द्वारा की गई विभिन्न पहलों को रेखांकित करेगा। 10 जनवरी से शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नवाचार प्रतियोगिता, स्मार्ट इंडिया हैकथॉन, युक्ति 2.0 और टॉयकैथॉन जैसे विभिन्न कार्यक्रमों से चुनी गई 75 नवीन प्रौद्योगिकियाँ ई-प्रदर्शनी में भाग लेंगी और अपने नवाचारों का प्रदर्शन करेंगी। इस प्रदर्शनी के साथ-साथ 11 और 12 जनवरी के लिये निर्धारित पूरे दिन की गतिविधियों में उच्च शिक्षा संस्थानों और स्कूलों में नवाचार एवं उद्यमिता से संबंधित उभरते क्षेत्रों के बारे में कई महत्त्वपूर्ण व्याख्यान सत्र और पैनल चर्चा शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा 11 और 12 जनवरी, 2022 को ‘शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार संबंधी इकोसिस्टम के निर्माण’ विषय पर एक दो-दिवसीय ई-संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में कई प्रख्यात उद्योगपति, उभरते हुए यूनिकॉर्न के संस्थापक, निवेशक और नीति निर्माण से जुड़ी हस्तियाँ नवाचार व स्टार्ट-अप के विभिन्न पहलुओं के बारे में अपने विचार एवं दृष्टिकोण साझा करने के लिये प्रमुख वक्ता एवं पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। स्कूली बच्चों तथा युवाओं को नवाचार और उद्यमिता को करियर के विकल्प के रूप में अपनाने के लिये प्रेरित करने के उद्देश्य से शुरुआती दौर के स्टार्ट-अप के संस्थापकों व नवाचार में संलग्न छात्रों को शामिल करते हुए विशेष पैनल सत्र आयोजित किये जाएंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों में नवाचार और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के हिस्से के तौर पर विभिन्न हितधारकों को नवाचार के प्रति संवेदनशील और उन्मुख बनाना है।

मणिपुर को त्रिपुरा से जोड़ने वाली पहली जनशताब्दी एक्सप्रेस 

संपूर्ण पूर्वोत्तर के लिये एक एतिहासिक उपलब्धि के तहत मणिपुर राज्य को असम के रास्ते त्रिपुरा से जोड़ने वाली पहली जनशताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन को 8 जनवरी, 2022 को वीडियो लिंक के माध्यम से रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री द्वारा रवाना किया गया। यह ट्रेन सेवा अगरतला से सिलचर (अरुणाचल स्टेशन के पास) और जिरिबाम तक यात्रा के समय को कम करेगी। यह ट्रेन सेवा पूर्वोत्तर क्षेत्र के व्यापार और पर्यटन को काफी बढ़ावा देगी। यह ट्रेन दो राज्यों की संस्कृति को जोड़ने वाली कड़ी है। इम्फाल-मोरेह रेल खंड एक रणनीतिक लाइन होगी, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच संबंधों में वृद्धि होगी। लगभग 300 किलोमीटर दूरी के यात्रा समय को ट्रेन आधे से कम कर देगी, जबकि12 घंटे के सड़क मार्ग के मुकाबले यात्रा समय लगभग 06 घंटे का होगा। जनशताब्दी ट्रेन अब मणिपुर के लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं हेतु त्रिपुरा जाने के लिये सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी तथा त्रिपुरा के लोगों को क्षेत्र की समग्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये व्यापार, पर्यटन आदि हेतु मणिपुर जाने का भी अवसर मिलेगा।


एसएमएस अलर्ट
Share Page