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ब्रह्मोस का उन्नत संस्करण

  • 13 Jan 2022
  • 6 min read

हाल ही में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल के एक विस्तारित रेंज के समुद्र-से-समुद्र संस्करण का परीक्षण स्टील्थ गाइडेड मिसाइल विध्वंसक आईएनएस विशाखापत्तनम से किया गया था।

  • ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम ने तैयार किया है। 

Brahmos

प्रमुख बिंदु:

  • एडवांस वेरिएंट के बारे में:
    • ब्रह्मोस मिसाइल को शुरुआत में 290 किमी. की रेंज के साथ विकसित किया गया था।
    • मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) के दायित्त्वों के अनुसार, मिसाइल की रेंज मूल रूप से 290 किमी थी।
    • हालाँकि जून 2016 में MTCR में भारत के प्रवेश के बाद इसकी रेंज लगभग 450 किलोमीटर थी और भविष्य में 600 किलोमीटर तक बढ़ाने की योजना है।
  • ब्रह्मोस के बारे में:
    • ब्रह्मोस रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (The Defence Research and Development Organisation) तथा रूस के NPOM का एक संयुक्त उद्यम है।
    • इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मोस्कवा नदी के नाम पर रखा गया है। 
    • यह दो चरणों वाली (पहले चरण में ठोस प्रणोदक इंजन और दूसरे में तरल रैमजेट) मिसाइल है।
    • यह एक मल्टीप्लेटफॉर्म मिसाइल है यानी इसे ज़मीन, हवा और समुद्र तथा बहु क्षमता वाली मिसाइल से सटीकता के साथ लॉन्च किया जा सकता है, जो किसी भी मौसम में दिन और रात में काम करती है।
    • यह ‘फायर एंड फॉरगेट्स’ सिद्धांत पर कार्य करती है यानी लॉन्च के बाद इसे मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं होती।
    • ब्रह्मोस सबसे तेज़ क्रूजज़ मिसाइलों में से एक है, यह वर्तमान में मैक 2.8 की गति के साथ कार्य करती है, जो कि ध्वनि की गति से लगभग 3 गुना अधिक है। 
  • INS विशाखापत्तनम के बारे में:
    • यह प्रोजेक्ट-15B के तहत विकसित चार अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर का पहला जहाज़ है। ‘प्रोजेक्ट-15B’ के तहत अन्य तीन जहाज़:
      • ‘प्रोजेक्ट-15B’ का दूसरा जहाज़- ‘मुरगाँव’ को वर्ष 2016 में लॉन्च किया गया था और इसे बंदरगाह परीक्षणों के लिये तैयार किया जा रहा है।
      • तीसरा जहाज़ (इंफाल) है जिसे वर्ष 2019 में लॉन्च किया गया था और यह अपने  एक उन्नत चरण में है।
      • चौथा जहाज़ (सूरत) ब्लॉक इरेक्शन  (Block Erection) के तहत है तथा इसे चालू वित्तीय वर्ष (2022) में लॉन्च किया जाएगा।
    • प्रोजेक्ट 15बी (P 15B) के गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई में निर्माणाधीन हैं। 

मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR)

  • यह मिसाइल और मानव रहित हवाई वाहन प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकने हेतु 35 देशों के मध्य  एक अनौपचारिक और स्वैच्छिक साझेदारी है, जो 300 किमी से अधिक दूरी के लिये  500 किलोग्राम से अधिक पेलोड ले जाने में सक्षम है।
  • इस प्रकार सदस्यों को ऐसी मिसाइलों और यूएवी प्रणालियों की आपूर्ति करने से रोका जाता है जो गैर-सदस्यों के लिये MTCR द्वारा नियंत्रित होती हैं।
  • निर्णय सभी सदस्यों की सहमति से लिये जाते हैं।
  • यह सदस्य देशों का एक गैर-संधि संघ है, जिसमें मिसाइल प्रणालियों के लिये सूचना साझा करने, राष्ट्रीय नियंत्रण कानूनों और निर्यात नीतियों तथा इन मिसाइल प्रणालियों की ऐसी महत्त्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सीमित करने हेतु एक नियम-आधारित विनियमन तंत्र के बारे में कुछ दिशा-निर्देश हैं।
  • इसकी स्थापना अप्रैल 1987 में जी -7 देशों - अमेरिका, यूके, फ्राँस, जर्मनी, कनाडा, इटली और जापान द्वारा की गई थी।
  • वर्ष 1992 में MTCR का ध्यान सभी प्रकार के सामूहिक विनाश (WMD) यानी परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों की डिलीवरी के लिये मिसाइलों के प्रसार पर केंद्रित था।
  • यह कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि नहीं है। इसलिये शासन के दिशा-निर्देशों का पालन न करने के खिलाफ कोई दंडात्मक उपाय नहीं किया जा सका  है।
  • वर्ष 2016 में भारत 35वें सदस्य के रूप में मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था में शामिल हुआ।
  • भारत उच्च स्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी की खरीद कर सकता है और अन्य देशों के साथ मानव रहित हवाई वाहनों के विकास हेतु संयुक्त कार्यक्रम का क्रियान्वयन कर सकता है। उदाहरण के लिये इज़रायल से थिएटर मिसाइल इंटरसेप्टर "एरो II" (Arrow II), संयुक्त राज्य अमेरिका से सैन्य ड्रोन जैसे "एवेंजर" (Avenger) आदि की खरीद।

स्रोत: द हिदू 

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