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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 08 Sep, 2022
  • 16 min read
इन्फोग्राफिक्स

संविधान के स्रोत

Source-of-constitution


प्रारंभिक परीक्षा

लीजियोनेयर्स रोग

हाल ही में अर्जेंटीना में एक रहस्यमय निमोनिया के प्रकोप की पहचान लीजियोनेयर्स के रूप में की गई है।

लीजियोनेयर्स:

  • परिचय:
    • लीजियोनेयर्स एक निमोनिया जैसी बीमारी है जो हल्के बुखार से लेकर गंभीर और कभी-कभी घातक निमोनिया के रूप में गंभीरता में, भिन्न होती है।
    • प्रेरक एजेंट पानी या पॉटिंग मिक्सर से लीजियोनेला बैक्टीरिया हैं।
  • लक्षण:
    • इसमें बुखार, मांँसपेशियों और पेट में दर्द तथा साँस लेने में तकलीफ शामिल है।
  • प्रसार:
    • यह रोग आमतौर पर दूषित जल से दूषित एरोसोल के साँस लेने से फैलता है, जो एयर कंडीशनिंग कूलिंग टावर्स, एयर कंडीशनिंग और औद्योगिक कूलिंग से जुड़े वाष्पीकरणीय कंडेनसर, गर्म तथा ठंडे जल की व्यवस्था, ह्यूमिडिफायर और व्हर्लपूल स्पा से बढ़ता है।
  • संवेदनशील जनसंख्या:
    • जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, श्वसन संबंधी समस्याएँ, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD) जैसी सह-रुग्णताएँ हैं, या जो धूम्रपान जैसी खराब आदतों का पालन करते हैं, उनमें इस स्थिति का खतरा अधिक होता है।
  • उपचार:
    • लेकिन वर्तमान में लीजियोनेयर्स रोग के लिये उपचार मौजूद हैं लेकिन कोई टीका उपलब्ध नहीं है।
    • लीजियोनेयर्स रोग के रोगियों को निदान के बाद हमेशा एंटीबायोटिक उपचार की आवश्यकता होती है।
    • लीजियोनेलोसिस द्वारा उत्पन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे को सुरक्षा या जल प्रणाली सुरक्षा के निर्माण के लिये ज़िम्मेदार अधिकारियों द्वारा जल सुरक्षा योजनाओं को लागू करके संबोधित किया जा सकता है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ


प्रारंभिक परीक्षा

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की नई शाखाएँ

हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की शाखाओं की आधारशिला रखी।

राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC):

  • परिचय:
    • राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (National Centre for Disease Control- NCDC) को पूर्व में राष्ट्रीय संचारी रोग संस्थान (National Institute of Communicable Diseases- NICD) के रूप में जाना जाता था। इसकी स्थापना वर्ष 1909 में हिमाचल प्रदेश के कसौली (Kasauli) में केंद्रीय मलेरिया ब्यूरो (Central Malaria Bureau) के रूप में की गई थी।
    • NICD को वर्ष 2009 में पनप चुके एवं फिर से पनप रहे रोगों को नियंत्रित करने के लिये राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र में तब्दील कर दिया गया था।
    • NCDC भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक (Director General of Health Services) के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है।
  • कार्य: यह देश में रोग निगरानी के लिये नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है जिससे संचारी रोगों की रोकथाम और नियंत्रण में सुविधा होती है।
    • राज्य सरकारों के साथ समन्वय में NCDC के पास रोग निगरानी, प्रकोप जाँच और प्रकोपों को रोकने एवं मुकाबला करने के लिये त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता और योग्यता है।
  • सेवाएँ: व्यक्तियों, समुदायों, मेडिकल कॉलेजों, अनुसंधान संस्थानों एवं राज्य स्वास्थ्य निदेशालयों को परामर्श व नैदानिक सेवाएँ प्रदान करता है।
  • मुख्यालय: इसका मुख्यालय दिल्ली में है।
  • शाखाएँ: इसकी आठ शाखाएँ अलवर (राजस्थान), बेंगलुरु (कर्नाटक), कोज़ीकोड (केरल), कुन्नूर (तमिलनाडु), जगदलपुर (छत्तीसगढ़), पटना (बिहार), राजमुंदरी (आंध्र प्रदेश) और वाराणसी (उत्तर प्रदेश) में स्थित हैं।

NCDC की कई शाखाएँ होने के लाभ:

  • NCDC की क्षेत्रीय शाखाएँ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और शीघ्र निगरानी, शीघ्रता से पता लगाने एवं बीमारियों की निगरानी के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देगी जिससे शुरुआती हस्तक्षेप को सक्षम किया जा सकेगा।
  • राज्य की शाखाएँ NCDC (दिल्ली) के साथ समन्वय करेंगी और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी द्वारा सहायता प्राप्त डेटा एवं सूचना के रीयल-टाइम शेयरिंग के साथ समन्वय करेंगी।
    • इसके अलावा अद्यतन दिशानिर्देशों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने में NCDC शाखाएँ भी महत्त्वपूर्ण होंगी।
  • एकीकृत रोग निगरानी गतिविधियों, रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Anti-Microbial Resistance-AMR), बहु-क्षेत्रीय और कीटविज्ञानी जाँच आदि से निपटने के लिये नई शाखाओं को अनिवार्य रूप से जोड़ा जा रहा है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्षों के प्रश्न (PYQ) :

प्रिलिम्स:

Q. निम्नलिखित में से कौन-से, भारत में सूक्ष्मजैविक रोगजनकों में बहु-औषध प्रतिरोध के होने के कारण हैं? (2019)

  1. कुछ व्यक्तियों में आनुवंशिक पूर्ववृत्ति (जेनेटिक प्रीडिस्पोजीशन) का होना।
  2. रोगों के उपचार के लिये एंटीबायोटिक दवाओं की गलत खुराकें लेना।
  3. पशुधन फार्मिंग प्रतिजैविकों का इस्तेमाल करना।
  4. कुछ व्यक्तियों में चिरकालिक रोगों की बहुलता होना।

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) केवल 2, 3 और 4

उत्तर: B

व्याख्या:

  • रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance-AMR) एक रोगाणुरोधी (जैसे एंटीबायोटिक, एंटीवायरल और एंटीमाइरियल) को इसके विरुद्ध कार्य करने से रोकने के लिये एक सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया, वायरस और कुछ परजीवी) की क्षमता है। परिणामस्वरूप, मानक उपचार अप्रभावी हो जाते हैं, और संक्रमण बना रहता है जो अन्य व्यक्तियों को भी संक्रमित कर सकता है।
  • एक आनुवंशिक प्रवृत्ति (कभी-कभी आनुवंशिक संवेदनशीलता भी कहा जाता है) किसी व्यक्ति के आनुवंशिक रचना के आधार पर किसी विशेष बीमारी के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है। एक आनुवंशिक प्रवृत्ति विशिष्ट आनुवंशिक विविधताओं से उत्पन्न होती है जो अक्सर माता-पिता से आनुवंशिक रूप में मिलती है। इसका रोगाणुरोधी प्रतिरोध से कोई सीधा संबंध नहीं है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
  • AMR समय के साथ स्वाभाविक रूप विकसित होती है। कई जगहों पर, लोगों और जानवरों में एंटीबायोटिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग किया जाता है, जिसे अक्सर पेशेवर निरीक्षण के बिना दिया जाता है। उदाहरणों के रूप में सर्दी और फ्लू जैसे वायरल से संक्रमित लोगों द्वारा इसका उपयोग एवं जानवरों में स्वाभाविक वृद्धि की दर को बढ़ाने के लिये या स्वस्थ जानवरों में बीमारियों को रोकने के लिये इसका उपयोग किया जाता है। अत: कथन 2 और 3 सही हैं।
  • एक या एक से अधिक पुरानी बीमारियाँ जो एक ही समय में एक व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिये, या तो गठिया और उच्च रक्तचाप वाले व्यक्ति या हृदय रोग और अवसाद वाले व्यक्ति, दोनों को कई पुरानी बीमारियाँ हैं। इसलिये यह आवश्यक नहीं है कि एक या एक से अधिक पुरानी बीमारी वाले व्यक्ति में रोगाणुरोधी प्रतिरोध होगा। पुरानी बीमारी ऐसी भी हो सकती है जहाँ एंटीबायोटिक्स देने की आवश्यकता नहीं होती है। अत: 4 सही नहीं है।

स्रोत: द हिंदू


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 08-सितंबर, 2022

भूपेन हजारिका 

08 सितंबर, 2022 को गूगल ने महान गायक भूपेन हज़ारिका के 96वें जन्म दिवस पर उनके सम्मान में एक डूडल बनाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।। भूपेन हजारिका को एक महान गायक, गीतकार, संगीतकार, कवि और फिल्मकार के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा वे असम की संस्कृति तथा संगीत के भी काफी अच्छे जानकार थे। भूपेन हजारिका का जन्म वर्ष 1926 में असम के तिनसुकिया (Tinsukia) ज़िले के छोटे शहर सादिया (Sadiya) में हुआ था। वर्ष 1942 में गुवाहाटी से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद भूपेन हजारिका वाराणसी चले गए और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिला लिया। भूपेन हजारिका आदिवासी संगीत से काफी ज़्यादा प्रभावित थे। वर्ष 1939 में ही मात्र 12 वर्ष की उम्र में भूपेन हजारिका ने असमिया फिल्म इंद्रमालती के लिये पहला गीत गाया था। भूपेन हजारिका केवल असमिया संगीत तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्होंने कई बंगाली और हिंदी फिल्मों के लिये भी रचना, लेखन और गायन का कार्य किया। भूपेन हजारिका को वर्ष 1976 में सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि उन्हें वर्ष 1977 में पद्मश्री और वर्ष 1987 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने वर्ष 1999-2004 तक संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष के तौर पर भी कार्य किया। भूपेन हजारिका को वर्ष 2019 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था।

कर्तव्‍य पथ का उद्धाटन व नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा का  अनावरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 08 सितंबर, 2022 को सेंट्रल विस्‍टा के राष्‍ट्रपति भवन से इंडिया गेट के मार्ग- कर्तव्‍य पथ का उद्धाटन करेंगे। केंद्र सरकार के प्रतीक के रूप में इस मार्ग के पूर्ववर्ती नाम राजपथ को बदल कर कर्तव्‍य पथ किया गया है। अब यह नाम जन साधारण की भागीदारी और सशक्तीकरण को दर्शाता है। इस पूरे मार्ग को केंद्र सरकार की महत्‍वकांक्षी सेंट्रल विस्‍टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत पुनर्निमित किया गया है। इस क्षेत्र में जन शौचालय, पीने का जल, लोगों के बैठने के लिये सीट और वाहनों की समुचित पार्किंग व्‍यवस्‍था जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। साथ ही गणतंत्र दिवस परेड और अन्‍य राष्‍ट्रीय कार्यक्रमों को इस प्रकार से आयोजित किये जाएँ ताकि लोगों की आवाजाही पर कम से कम बाधित हो और आम जनता को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके। इन्‍ही चिंताओं को ध्‍यान में रखकर इस मार्ग का पुनर्विकास किया गया है। इस अवसर पर श्री मोदी इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र  बोस की प्रतिमा का भी अनावरण करेंगे। इंडिया गेट के पास छतरी के नीचे 28 फीट ऊँची ग्रेनाइट की प्रतिमा स्‍थापित की गई है। यह प्रतिमा पूरी तरह हस्‍त निर्मित है और इसके निर्माण में पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया गया है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की यह प्रतिमा उनकी होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर स्‍थापित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष जनवरी में नेताजी की 125वीं जयंती के अवसर पर इस होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण किया था। यह कदम अमृतकाल में प्रधानमंत्री के नए भारत के लिये पाँच प्रण में से दूसरे प्रण औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति के अनुरूप है।

‘रबी अभियान’ 2022-23’

केंद्रीय कृषि मंत्री ने 7 सितंबर,2022 को राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (National Agricultural Science Complex-NASC), पूसा, नई दिल्ली में ‘रबी अभियान’ 2022-23’ के लिये कृषि पर राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि चौथे अग्रिम अनुमान (2021-22) के अनुसार, देश में खाद्यान्न का उत्पादन 3157 लाख टन होने की संभावना है जो कि वर्ष 2020-21 की अवधि के खाद्यान्न के उत्पादन से 50 लाख टन अधिक है। इस सम्मेलन का उद्देश्य पूर्ववर्ती फसल मौसमों के दौरान फसल की पैदावार की समीक्षा और मूल्यांकन करना तथा राज्य सरकारों के परामर्श से रबी मौसम के लिये फसल-वार लक्ष्य निर्धारित करना, महत्त्वपूर्ण आदानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ उत्पादन और फसलों की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि से नवीन तकनीकों को अपनाने की सुविधा प्रदान करना है। सरकार की प्राथमिकता कृषि-पारिस्थितिकी आधारित फसल योजना है, जिसमें चावल और गेहूँ जैसी अतिरिक्त वस्तुओं से तिलहन और दालों जैसी कमी वाली वस्तुओं और उच्च मूल्य वाली फसलों के निर्यात से धन अर्जित करने के लिये भूमि का रकबा बढ़ाया जाता है। जून, 2022 में धर्मशाला में आयोजित मुख्य सचिवों के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्यों के परामर्श से दलहन और तिलहन में फसल विविधीकरण तथा आत्मनिर्भरता के लिये लक्ष्य निर्धारित किया था।


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