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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 06 May, 2021
  • 14 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट: 06 मई, 2021

क्रय प्रबंधक सूचकांक

Purchasing Managers’ Index 

चर्चा में क्यों? 

आईएचएस मार्किट इंडिया (IHS Markit India) द्वारा जारी ‘क्रय प्रबंधक सूचकांक’ (Purchasing Managers’ Index-PMI) अप्रैल माह में 55.5 अंक पर पहुँच गया है, जिसमें मार्च माह (55.4) के मुकाबले थोड़ा सुधार देखने को मिला है।

प्रमुख बिंदु: 

  • यह एक सर्वेक्षण-आधारित प्रणाली है, जिसमें उत्तरदाताओं से पिछले माह की तुलना में प्रमुख व्यावसायिक चरों (Variables) के बारे में उनकी धारणा में आए बदलाव को लेकर प्रश्न पूछा जाता है।
  • PMI का उद्देश्य कंपनी के निर्णय निर्माताओं, विश्लेषकों और निवेशकों को वर्तमान और भविष्य की व्यावसायिक स्थितियों के बारे में जानकारी प्रदान करना है।
  • PMI की गणना विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों हेतु अलग-अलग की जाती है, जिसके पश्चात् एक समग्र सूचकांक का तैयार किया जाता है। 
  • PMI को 0 से 100 तक के सूचकांक पर मापा जाता है।
    • 50 से ऊपर का आँकड़ा व्यावसायिक गतिविधि में विस्तार या विकास को दर्शाता है।
    • जबकि 50 का मतलब किसी भी प्रकार का परिवर्तन न होने की स्थिति से है।
  • यदि पिछले माह का PMI चालू माह के PMI से अधिक है, तो यह अर्थव्यवस्था के ‘संकुचित’ (Contracting) होने की स्थिति को दर्शाता है।
  • यह आमतौर पर  PMI को  हर माह की शुरुआत में जारी किया जाता है। इसलिये, यह आर्थिक गतिविधि का एक अच्छा एवं प्रमुख संकेतक माना जाता है।
  • IHS मार्किट द्वारा विश्व भर में 40 से अधिक अर्थव्यवस्थाओं हेतु PMI का संकलन किया जाता है।
    • IHS मार्किट विश्व भर की अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख उद्योगों और बाज़ारों हेतु सूचना, विश्लेषण और समाधान प्रस्तुत करने वाली एक अग्रणी वैश्विक कंपनी है।
  • चूँकि औद्योगिक उत्पादन, विनिर्माण और सकल घरेलू उत्पाद से संबंधित आँकड़े काफी देर से प्राप्त होते हैं, ऐसे में PMI प्रारंभिक स्तर पर सूचित निर्णय लेने में मदद करता है।
  • यह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production- IIP) से अलग है, जो अर्थव्यवस्था में गतिविधि के स्तर को भी दर्शाता है।
    • PMI की तुलना में IIP व्यापक औद्योगिक क्षेत्र को कवर करता है।
    • हालांँकि, मानक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की तुलना में PMI अधिक गतिशील है।

 प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

Pradhan Mantri Mudra Yojana 

चर्चा में क्यों? 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (Pradhan Mantri Mudra Yojana- PMMY) के शुभारंभ के बाद से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (Non Banking Financial Companies- NBFCs) और सूक्ष्म वित्त संस्थानों (Micro Finance Institutions- MFIs) द्वारा 14.96 लाख करोड़ रुपए की धनराशि के 28.68 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किये गए हैं।

प्रमुख बिंदु: 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के विषय में:

  • शुभारंभ और उद्देश्य: 
    • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत अप्रैल, 2015 में गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि लघु/सूक्ष्म उद्यमों को 10 लाख रुपए तक के ऋण प्रदान करने हेतु  की गई थी।
  • वित्तीय प्रावधान: 
    • मुद्रा (MUDRA) यानी माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी लिमिटेड (Micro Units Development & Refinance Agency Ltd) सरकार द्वारा स्थापित एक वित्तीय संस्थान है।
    • इसके तहत बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (MFI) जैसे विभिन्न वित्तीय संस्थानों के माध्यम से नॉन-कॉर्पोरेट स्माल बिज़नस सेक्टर (Non-Corporate Small Business Sector)  को वित्तपोषित किया जाता है।
    • MUDRA के थर सीधे सूक्ष्म उद्यमियों/ व्यक्तियों को उधार नहीं देता है।
  • ऋण की तीन श्रेणी: 
    • मुद्रा ऋण तीन श्रेणियों में प्रदान किये जाते हैं- ‘शिशु’ (Shishu) ‘किशोर' (Kishore) तथा ‘तरुण’ (Tarun) और ये ऋण लेने वालों के विकास तथा धन संबंधी आवश्यकताओं के चरण को दर्शाते हैं: 
      • शिशु: 50,000 रुपए तक के ऋण।
      • किशोर: 50,000 रुपए से 5 लाख लाख रुपए तक के ऋण।
      • तरुण: 5 लाख रुपए से 10 लाख रुपए तक के ऋण।
    • इस योजना के तहत दिया जाने वाला ऋण संपार्श्विक मुक्त ऋण (Collateral-Free Loans) होता है। 

उपलब्धियांँ:

  • मुद्रा योजना में समाज के वंचित वर्गों जैसे- महिला उद्यमी, एससी/एसटी/ओबीसी उधारकर्त्ताओं, अल्पसंख्यक समुदाय उधारकर्त्ताओं आदि को ऋण दिया गया है। साथ ही इसके तहत नए उद्यमियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • श्रम और रोज़गार मंत्रालय द्वारा किये गए सर्वेक्षण के अनुसार, PMMY ने वर्ष 2015 से वर्ष 2018 तक 1.12 करोड़ कुल अतिरिक्त रोज़गार सृजन में सहायता की है।
    • रोज़गार में हुई अनुमानित वृद्धि के अनुसार,  1.12 करोड़ में 69 लाख महिलाएंँ (62 प्रतिशत) शामिल हैं।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 06 मई, 2021

‘पार्कर सोलर प्रोब’ 

हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शुक्र ग्रह के वातावरण में कम आवृत्ति के रेडियो सिग्नल का पता लगाया है। ये रेडियो सिग्नल नासा के ‘पार्कर सोलर प्रोब’ द्वारा ग्रह की नियमित उड़ान के बीच रिकॉर्ड किये गए हैं, जो कि बीते 30 वर्ष में पहली बार है जब इस ग्रह के वातावरण संबंधी कोई प्रत्यक्ष माप रिकॉर्ड हुआ है। रिकॉर्ड किये गए डेटा के विश्लेषण को जारी करते हुए नासा ने कहा कि पिछली बार वर्ष 1992 में रिकॉर्ड किये गए डेटा की तुलना में वर्तमान में शुक्र ग्रह के ऊपरी वायुमंडल में काफी परिवर्तन आया है और वह और अधिक हल्के होने के क्रम में आगे बढ़ रहा है। नासा के मुताबिक, पृथ्वी की तरह ही शुक्र ग्रह पर भी वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में इलेक्ट्रिक रूप से चार्ज गैस की एक परत है, जिसे आयनोस्फीयर कहा जाता है, जो प्राकृतिक रूप से रेडियो तरंगों का उत्सर्जन करती है, जिन्हें यंत्रों के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा सकता है। ज्ञात हो कि शुक्र ग्रह और पृथ्वी को तकरीबन जुड़वाँ ग्रह माना जाता है, दोनों ग्रह की सतह चट्टानी है और दोनों आकार तथा संरचना में भी समान हैं। हालाँकि पृथ्वी के विपरीत, शुक्र ग्रह में सतह का लगभग 864 डिग्री फारेनहाइट या 462 डिग्री सेल्सियस है, जो कि निवास करने योग्य नहीं है साथ ही यहाँ का वातावरण भी काफी विषाक्त है। साथ ही पृथ्वी के विपरीत, शुक्र में चुंबकीय क्षेत्र भी नहीं है। नासा के ‘पार्कर सोलर प्रोब’ मिशन को वर्ष 2018 में सूर्य का अध्ययन करने और उससे संबंधित विभिन्न तथ्यों को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया था। यह ‘प्रोब’ अपने सात वर्ष के कार्यकाल के दौरान सूर्य के वातावरण से होकर गुजरेगा और निकटता से सूर्य का अध्ययन करेगा। 

सॉरोपॉड डायनासोर के जीवाश्म

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के शोधकर्त्ताओं ने मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स ज़िले के आसपास के इलाके से लगभग 100 मिलियन वर्ष पुराने सॉरोपॉड डायनासोर के जीवाश्म हड्डी के टुकड़ों की पहचान की है। शोधकर्त्ताओं के मुताबिक, यह इस क्षेत्र में खोजा गया संभावित टाइटनोसॉरियन मूल के सॉरोपॉड डायनासोर का पहला रिकॉर्ड है। सॉरोपॉड के पास बहुत लंबी गर्दन, लंबी पूंछ, शरीर के बाकी हिस्सों के सापेक्ष छोटे सर और चार मोटे स्तंभ जैसे पैर थे। इन्हें अपने विशाल शरीर के लिये जाना जाता है और ये पृथ्वी पर अब तक मौजूद सबसे बड़े और विशाल जानवरों में से एक हैं। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद मेघालय टाइटनोसॉरियन से संबंधित सॉरोपॉड के अवशेषों को रिकॉर्ड करने वाला भारत का पाँचवा और पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है। टाइटनोसॉरियन, सॉरोपॉड डायनासोर का एक विविध समूह था, जिसमें अफ्रीका, एशिया, दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में पाए जाने वाले सॉरोपॉड शामिल थे। 

विश्व अस्थमा दिवस 

प्रतिवर्ष मई माह के पहले मंगलवार को ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day) का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस 04 मई, 2020 को मनाया गया। इस दिवस के आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य विश्व भर में अस्थमा की बीमारी एवं पीड़ितों की देखभाल के बारे में जागरूकता फैलाना है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस का थीम ‘अनकवरिंग अस्थमा मिसकंसेप्शन’ है, जिसका उद्देश्य अस्थमा की जटिलताओं से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इस दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से वर्ष 1993 में ‘ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा’ (GINA) द्वारा शुरू किया गया था। अस्थमा फेफड़ों का एक चिरकालिक रोग है, जिसके कारण रोगी को सांस लेने में समस्या होती है। यह गैर-संचारी रोगों में से एक है। इस बीमारी के दौरान श्वसन मार्ग में सूजन से सीने में जकड़न, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। ये लक्षण आवृत्ति एवं गंभीरता में भिन्न होते हैं। जब लक्षण नियंत्रण में नहीं होते हैं तो साँस लेना मुश्किल हो सकता है। वर्तमान में यह बीमारी बच्चों में सबसे अधिक देखने को मिलती है। यद्यपि अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता है, किंतु अगर सही समय पर सही इलाज के साथ इसका प्रबंधन किया जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। 

उत्तरी सिक्किम में सेना का सौर ऊर्जा संयंत्र

भारतीय सेना ने हाल ही में तकरीबन 16000 फीट की ऊँचाई पर उत्तरी सिक्किम में वैनेडियम आधारित बैटरी तकनीक का उपयोग करते हुए 56 KVA के पहले हरित सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया है। इस संयंत्र का उद्देश्य सैन्य दलों की दैनिक ज़रूरतों के लिये आवश्यक ऊर्जा के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। भारतीय सेना द्वारा इस परियोजना को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मुंबई (IIT-M) के सहयोग से पूरा किया गया है। यह परियोजना दुर्गम स्थानों पर सैनिकों को अत्यधिक लाभान्वित करेगी और पर्यावरण के अनुकूल भी होगी। यह परियोजना वैनेडियम बैटरी पर आधारित है। वैनेडियम एक रासायनिक तत्त्व है जिसका  प्रतीक (V) है। यह एक दुर्लभ तत्त्व है, जो अपनी प्रकृति में कठोर, सिल्की ग्रे, मुलायम और लचीली संक्रमणीय धातु है।


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