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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 05 May, 2021
  • 10 min read
प्रारंभिक परीक्षा

प्रिलिम्स फैक्ट: 05 मई, 2021

ऑपरेशन समुद्र सेतु-II

(Operation Samudra Setu-II)

भारतीय नौसेना ने भारत में ऑक्सीजन से भरे कंटेनरों की शिपमेंट के लिये ‘ऑपरेशन समुद्र सेतु-II’ की शुरुआत की है।

  • ज्ञात हो कि ऑपरेशन समुद्र सेतु को कोविड-19 महामारी के दौरान विदेशों में फँसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के राष्ट्रीय प्रयास के तहत मई 2020 में लॉन्च किया गया था।

प्रमुख बिंदु

ऑपरेशन समुद्र सेतु-II

  • इस ऑपरेशन के हिस्से के रूप में सात भारतीय नौसेना जहाज़ों अर्थात् कोलकाता, कोच्चि, तलवार, टाबर, त्रिकंड, जलश्व तथा ऐरावत को विभिन्न देशों से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन-फील्ड क्रायोजेनिक कंटेनर्स और संबंधित मेडिकल इक्विपमेंट की शिपमेंट के लिये तैनात किया गया है।
  • दो जहाज़ INS कोलकाता और INS तलवार, मुंबई के लिये 40 टन तरल ऑक्सीजन लाने हेतु मनामा और बहरीन के बंदरगाहों में प्रवेश कर चुके हैं।
  • INS जलाश्व और INS ऐरावत भी इसी प्रकार के मिशन के साथ क्रमशः बैंकॉक और सिंगापुर के मार्ग पर हैं।

ऑपरेशन समुद्र सेतु:

  • इसे वंदे भारत मिशन (VBM) के साथ लॉन्च किया गया था।
    • कोरोना वायरस के मद्देनज़र लागू किये गए यात्रा प्रतिबंधों के बीच विदेश में फँसे भारतीय नागरिकों को वापस लाने के लिये VBM सबसे बड़ा नागरिक निकासी अभियान है।
    • यह खाड़ी युद्ध की शुरुआत में वर्ष 1990 में एयरलिफ्ट किये गए 1,77,000 लोगों की संख्या से भी आगे निकल गया है।
  • इस ऑपरेशन में भारतीय नौसेना के पोत जलश्व, ऐरावत, शार्दुल और मगर ने भाग लिया।
  • कोविड-19 के प्रसार के बीच पड़ोसी देशों में फँसे लगभग 4000 भारतीय नागरिकों को सफलतापूर्वक भारत वापस भेज दिया गया।
  • भारतीय नौसेना ने इससे पहले वर्ष 2006 (बेरूत) में ऑपरेशन सुकून और वर्ष 2015 में ऑपरेशन राहत (यमन) के रूप में इसी तरह के निकासी अभियान चलाए हैं।

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 05 मई, 2021

ओडिशा में पत्रकार- ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ 

ओडिशा सरकार ने हाल ही में कोविड-19 महामारी के दौरान राज्य के पत्रकारों को ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ के रूप में घोषित किया है। इस संबंध में जारी अधिसूचना के मुताबिक, ‘राज्य में कोरोना वायरस से संबंधित विषयों पर लोगों को जागरूक कर राज्य के पत्रकार समाज के प्रति महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। ज्ञात हो कि राज्य सरकार के इस निर्णय से राज्य के 6,944 कामकाजी पत्रकारों को फायदा होगा। इस घोषणा के साथ ही राज्य के कार्यशील पत्रकारों को ‘गोपाबंधु सम्बादिका स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत कवर किया जाएगा, जिसके तहत उन्हें 2 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्राप्त होगा। इसके अलावा ओडिशा सरकार ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए कोविड-19 के कारण मरने वाले वाले पत्रकारों के परिवारजनों के लिये 15 लाख रुपए की अनुग्रह राशि की भी घोषणा की है। इससे पूर्व, उत्तराखंड ने भी पत्रकारों और मीडिया संगठनों के प्रतिनिधियों को ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ के रूप में घोषित किया था और उन्हें प्राथमिकता के साथ टीका लगाने का आदेश दिया था। कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ (स्वतंत्र मीडिया प्रतिनिधि संगठन) ने हाल ही में केंद्र सरकार से पत्रकारों को ‘फ्रंटलाइन वर्कर्स’ के रूप में घोषित करने का आग्रह किया था, जिससे उन्हें कोविड संबंधी टीकाकरण अभियान में प्राथमिकता दी जा सके। आँकड़ों की मानें तो 01 अप्रैल, 2020 से अब तक कोरोना संक्रमण की वजह से 100 से अधिक पत्रकारों की मृत्यु हो चुकी है। 

यूरेनियम-214

हाल ही में चीन के वैज्ञानिकों ने एक नए प्रकार के यूरेनियम की खोज की है, जिसे अब तक का सबसे हल्का यूरेनियम माना जा रहा है। यह खोज वैज्ञानिकों को अल्फा कण के बारे में अधिक जानने में मदद कर सकती है, जो कि क्षय (Decay) होकर कुछ रेडियोधर्मी तत्त्वों से अलग हो जाते हैं। वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए इस ‘यूरेनियम-214’ नामक यूरेनियम में प्रोटॉन की तुलना में 30 अधिक न्यूट्रॉन मौजूद हैं, इस तरह इसमें अब तक ज्ञात सबसे हल्के यूरेनियम संस्करण/आइसोटोप की तुलना में एक कम न्यूट्रॉन मौजूद है। इस प्रकार चूँकि न्यूट्रॉन में द्रव्यमान होता है, इसलिये यूरेनियम-214 अन्य सभी यूरेनियम संस्करणों जैसे- यूरेनियम-235 आदि की तुलना में अधिक हल्का है। ज्ञात हो कि यूरेनियम-235 का उपयोग परमाणु रिएक्टरों में किया जाता है और इसमें प्रोटॉन की तुलना में 51 अतिरिक्त न्यूट्रॉन होते हैं। यह नया आइसोटोप न केवल काफी हल्का है, बल्कि इसने अपने क्षय के दौरान अद्वितीय व्यवहार भी प्रदर्शित किया। इस प्रकार यह खोज वैज्ञानिकों को रेडियोधर्मी क्षय प्रक्रिया समझने में भी मदद करेगी, जिसे अल्फा क्षय के रूप में जाना जाता है, जिसमें एक परमाणु नाभिक में दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन के एक समूह (सामूहिक रूप से इसे एक अल्फा कण कहा जाता) का क्षय हो जाता है।

कांगो में इबोला वायरस प्रकोप की समाप्ति

कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य ने इबोला वायरस के एक हालिया प्रकोप की समाप्ति की घोषणा की है, जिसने पूर्वी किवू के उत्तरी प्रांत में 12 लोगों को संक्रमित किया और उनमें से छह लोगों की मृत्यु हुई। कांगो में यह इबोला वायरस का 12वाँ प्रकोप था। इस हालिया प्रकोप को रोकने के लिये ‘मर्क’ की इबोला वायरस वैक्सीन का उपयोग किया गया, यह वैक्सीन संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आने वाले 1,600 से अधिक लोगों को दी गई। ये हालिया मामले आनुवंशिक रूप से वर्ष 2018-20 इबोला महामारी से जुड़े हुए थे, जिसमें 2,200 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी। इबोला वायरस रोग एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिससे पीड़ित लोगों में 90% तक मृत्यु होने की संभावना रहती है। अफ्रीका में फ्रूट बैट चमगादड़ इबोला वायरस के वाहक हैं जिनसे पशु (चिंपांजी, गोरिल्ला, बंदर, वन्य मृग) संक्रमित होते हैं। मनुष्यों को या तो संक्रमित पशुओं से या संक्रमित मनुष्यों से संक्रमण होता है, जब वे संक्रमित शारीरिक द्रव्यों या शारीरिक स्रावों के निकट संपर्क में आते हैं। इसमें वायु जनित संक्रमण नहीं होता है। 

थिसारा परेरा

श्रीलंका के ऑलराउंडर और पूर्व कप्तान थिसारा परेरा ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की है। 3 अप्रैल, 1989 को जन्मे 32 वर्षीय थिसारा परेरा ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट कॅॅरियर में श्रीलंका की ओर से कुल छह टेस्ट, 166 वनडे और 84 टी-20 मैच खेले। अपने संपूर्ण कॅॅरियर में थिसारा परेरा ने टेस्ट क्रिकेट में 203 रन, वनडे में 2338 रन और टी20 में 1204 रन बनाए, इसके अलावा वह एक बेहतरीन गेंदबाज भी थे और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट, वनडे तथा टी20 में क्रमशः 11, 175 और 51 विकेट प्राप्त किये। थिसारा परेरा ने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय मैच भारत के विरुद्ध ईडन गार्डन (कोलकाता) में 24 दिसंबर, 2009 को खेला था।


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