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Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 06 मई, 2021

  • 06 May 2021
  • 7 min read

‘पार्कर सोलर प्रोब’ 

हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने शुक्र ग्रह के वातावरण में कम आवृत्ति के रेडियो सिग्नल का पता लगाया है। ये रेडियो सिग्नल नासा के ‘पार्कर सोलर प्रोब’ द्वारा ग्रह की नियमित उड़ान के बीच रिकॉर्ड किये गए हैं, जो कि बीते 30 वर्ष में पहली बार है जब इस ग्रह के वातावरण संबंधी कोई प्रत्यक्ष माप रिकॉर्ड हुआ है। रिकॉर्ड किये गए डेटा के विश्लेषण को जारी करते हुए नासा ने कहा कि पिछली बार वर्ष 1992 में रिकॉर्ड किये गए डेटा की तुलना में वर्तमान में शुक्र ग्रह के ऊपरी वायुमंडल में काफी परिवर्तन आया है और वह और अधिक हल्के होने के क्रम में आगे बढ़ रहा है। नासा के मुताबिक, पृथ्वी की तरह ही शुक्र ग्रह पर भी वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में इलेक्ट्रिक रूप से चार्ज गैस की एक परत है, जिसे आयनोस्फीयर कहा जाता है, जो प्राकृतिक रूप से रेडियो तरंगों का उत्सर्जन करती है, जिन्हें यंत्रों के माध्यम से रिकॉर्ड किया जा सकता है। ज्ञात हो कि शुक्र ग्रह और पृथ्वी को तकरीबन जुड़वाँ ग्रह माना जाता है, दोनों ग्रह की सतह चट्टानी है और दोनों आकार तथा संरचना में भी समान हैं। हालाँकि पृथ्वी के विपरीत, शुक्र ग्रह में सतह का लगभग 864 डिग्री फारेनहाइट या 462 डिग्री सेल्सियस है, जो कि निवास करने योग्य नहीं है साथ ही यहाँ का वातावरण भी काफी विषाक्त है। साथ ही पृथ्वी के विपरीत, शुक्र में चुंबकीय क्षेत्र भी नहीं है। नासा के ‘पार्कर सोलर प्रोब’ मिशन को वर्ष 2018 में सूर्य का अध्ययन करने और उससे संबंधित विभिन्न तथ्यों को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया था। यह ‘प्रोब’ अपने सात वर्ष के कार्यकाल के दौरान सूर्य के वातावरण से होकर गुजरेगा और निकटता से सूर्य का अध्ययन करेगा। 

सॉरोपॉड डायनासोर के जीवाश्म

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के शोधकर्त्ताओं ने मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स ज़िले के आसपास के इलाके से लगभग 100 मिलियन वर्ष पुराने सॉरोपॉड डायनासोर के जीवाश्म हड्डी के टुकड़ों की पहचान की है। शोधकर्त्ताओं के मुताबिक, यह इस क्षेत्र में खोजा गया संभावित टाइटनोसॉरियन मूल के सॉरोपॉड डायनासोर का पहला रिकॉर्ड है। सॉरोपॉड के पास बहुत लंबी गर्दन, लंबी पूंछ, शरीर के बाकी हिस्सों के सापेक्ष छोटे सर और चार मोटे स्तंभ जैसे पैर थे। इन्हें अपने विशाल शरीर के लिये जाना जाता है और ये पृथ्वी पर अब तक मौजूद सबसे बड़े और विशाल जानवरों में से एक हैं। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के बाद मेघालय टाइटनोसॉरियन से संबंधित सॉरोपॉड के अवशेषों को रिकॉर्ड करने वाला भारत का पाँचवा और पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है। टाइटनोसॉरियन, सॉरोपॉड डायनासोर का एक विविध समूह था, जिसमें अफ्रीका, एशिया, दक्षिण अमेरिका, उत्तरी अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका में पाए जाने वाले सॉरोपॉड शामिल थे। 

विश्व अस्थमा दिवस 

प्रतिवर्ष मई माह के पहले मंगलवार को ‘विश्व अस्थमा दिवस’ (World Asthma Day) का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस 04 मई, 2020 को मनाया गया। इस दिवस के आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य विश्व भर में अस्थमा की बीमारी एवं पीड़ितों की देखभाल के बारे में जागरूकता फैलाना है। इस वर्ष विश्व अस्थमा दिवस का थीम ‘अनकवरिंग अस्थमा मिसकंसेप्शन’ है, जिसका उद्देश्य अस्थमा की जटिलताओं से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना है। इस दिवस को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से वर्ष 1993 में ‘ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा’ (GINA) द्वारा शुरू किया गया था। अस्थमा फेफड़ों का एक चिरकालिक रोग है, जिसके कारण रोगी को सांस लेने में समस्या होती है। यह गैर-संचारी रोगों में से एक है। इस बीमारी के दौरान श्वसन मार्ग में सूजन से सीने में जकड़न, खांसी, सांस लेने में तकलीफ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है। ये लक्षण आवृत्ति एवं गंभीरता में भिन्न होते हैं। जब लक्षण नियंत्रण में नहीं होते हैं तो साँस लेना मुश्किल हो सकता है। वर्तमान में यह बीमारी बच्चों में सबसे अधिक देखने को मिलती है। यद्यपि अस्थमा को ठीक नहीं किया जा सकता है, किंतु अगर सही समय पर सही इलाज के साथ इसका प्रबंधन किया जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। 

उत्तरी सिक्किम में सेना का सौर ऊर्जा संयंत्र

भारतीय सेना ने हाल ही में तकरीबन 16000 फीट की ऊँचाई पर उत्तरी सिक्किम में वैनेडियम आधारित बैटरी तकनीक का उपयोग करते हुए 56 KVA के पहले हरित सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया है। इस संयंत्र का उद्देश्य सैन्य दलों की दैनिक ज़रूरतों के लिये आवश्यक ऊर्जा के रूप में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना है। भारतीय सेना द्वारा इस परियोजना को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-मुंबई (IIT-M) के सहयोग से पूरा किया गया है। यह परियोजना दुर्गम स्थानों पर सैनिकों को अत्यधिक लाभान्वित करेगी और पर्यावरण के अनुकूल भी होगी। यह परियोजना वैनेडियम बैटरी पर आधारित है। वैनेडियम एक रासायनिक तत्त्व है जिसका  प्रतीक (V) है। यह एक दुर्लभ तत्त्व है, जो अपनी प्रकृति में कठोर, सिल्की ग्रे, मुलायम और लचीली संक्रमणीय धातु है।

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