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प्रिलिम्स फैक्ट्स

  • 03 Jun, 2022
  • 15 min read
प्रारंभिक परीक्षा

तेलंगाना का स्थापना दिवस

तेलंगाना के राज्यपाल ने तेलंगाना स्थापना दिवस (2 जून) पर राज्य के लोगों को बधाई दी। 

प्रमुख बिंदु: 

  • परिचय: 
    • 2 जून 2014 को आंध्र प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग को अलग कर 29वाँ राज्य तेलंगाना बनाया गया। 
    • आंध्र राज्य अधिनियम (1953) ने मद्रास राज्य (अब तमिलनाडु) से तेलुगु भाषी क्षेत्रों को अलग कर भारत के पहले भाषाई राज्य का गठन किया, जिसे आंध्र राज्य के रूप में जाना जाता है। 
    • राज्य पुनर्गठन अधिनियम (1956), के तहत हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी क्षेत्रों को आंध्र राज्य के साथ मिलाकर एक विस्तृत आंध्र प्रदेश राज्य बनाया गया। 
    • आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम (2014) ने आंध्र प्रदेश को दो अलग-अलग राज्यों में विभाजित किया, (अर्थात् आंध्र प्रदेश (शेष) और तेलंगाना)। 
  • राजधानी: 
    • हैदराबाद 
  • सीमाएँ: 
    • तेलंगाना उत्तर में महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़, पश्चिम में कर्नाटक और दक्षिण और पूर्व दिशाओं में आंध्र प्रदेश से घिरा हुआ है। 
  • तेलंगाना के चार प्रतीक: 
    • राज्य पक्षी - पालपिट्टा (भारतीय रोलर या ब्लू जे)। 
    • राज्य पशु - जिंका (हिरण)। 
    • राजकीय वृक्ष - जम्मी चेट्टू (प्रोसोपिस सिनेरिया)। 
    • राज्य पुष्प - तांगेदु (टान्नर कैसिया)। 
  • लोकप्रिय त्यौहार: 
    • उगादि, श्रीराम नवमी, बोनालु, विनायक चतुर्थी, दशहरा, दीपावली, संक्रांति, होली, महाशिवरात्रि जैसे हिंदू त्योहारों को धूमधाम, उल्लास और भक्ति के साथ मनाया जाता है। 
    • दशहरा 'पेडा पांडुगा' के साथ मुख्य त्योहार है। 
  • वैश्विक मान्यता: 
    • मुलुगु जिले में रामप्पा मंदिर काकतीयों की विशिष्ट शैली प्रस्तुत करता है। इस मंदिर की नींव "सैंडबॉक्स तकनीक" है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है। 
    • निर्मल ज़िले में गोदावरी नदी और कामारेड्डी ज़िले में पेड्डा चेरुवु नदी के पार सदरमट एनीकट विरासत सिंचाई संरचनाओं के ICID रजिस्टर में शामिल हैं। 
  • राष्ट्रीय उद्यान:  
    • कासु ब्रह्मानंद रेड्डी राष्ट्रीय उद्यान 
    • महावीर हरिना वनस्थली राष्ट्रीय उद्यान 
    • मृगवनी राष्ट्रीय उद्यान 
  • वन्य जीवन अभयारण्य: 
    • किन्नरसानी वन्यजीव अभयारण्य 
    • एतुर्नगरम वन्यजीव अभयारण्य 
    • कवाल टाइगर रिज़र्व 
    • लांजा मदुगु शिवराम वन्यजीव अभयारण्य 
    • मंज़ीरा मगरमच्छ वन्यजीव अभयारण्य 
    • नागार्जुन सागर-श्रीशैलम वन्यजीव अभयारण्य 
    • पाखल वन्यजीव अभयारण्य 
    • पोचारम वन्यजीव अभयारण्य 
    • प्राणहिता वन्यजीव अभयारण्य 
  • जल विवाद:  
  • अन्य संबंधित पहल: 

स्रोत: द हिंदू 


प्रारंभिक परीक्षा

पेंटेड लेपर्ड गेको

हाल ही में शोधकर्त्ताओं ने लेपर्ड गेको की एक नई रंगीन प्रजाति की पहचान की है, जिसका नाम यूबलफेरिस पिक्टस है, जिसे पेंटेड लेपर्ड गेको के नाम से भी जाना जाता है, इससे पहले इसे एक पूर्व ज्ञात प्रजाति से संबंधित माना जाता था। 

Painted-Leopard-Gecko

शोध के निष्कर्ष: 

  • यह नई प्रजाति ई हार्डविकी को छोड़कर यूबलफेरिस प्रजाति के सभी सदस्यों से अलग है। 
    • यूबलफेरिस पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी एशिया के मूल स्थलीय गेको की एक प्रजाति है। 
  • नई प्रजाति शुष्क सदाबहार वनों में रहती है जो झाड़ीदार घास के मैदानों में पाई जाती हैं। यह पूर्णतया रात्रिचर है जिनकी गतिविधियाँ जंगलों में शाम के बाद बढ़ जाती हैं।   
  • शोधकर्त्ताओं ने शुरूआत में इसकी पहचान पूर्वी भारत के लेपर्ड गेको (यूबलफेरिस हार्डविकी) के रूप में की थी। यह नई प्रजाति आंध्र प्रदेश और ओडिशा के जंगलों में  पाई जाती है। 
    • ब्राह्मणी नदी भौगोलिक रूप से दोनो प्रजातियों को अलग करती है। 
  • गेको जीनस यूबलफेरिस की अब 7 प्रजातियांँ मौजूद हैं। 
  • IUCN (प्रकृति के संरक्षण के लिये अंतर्राष्ट्रीय संघ) संरक्षण प्राथमिकता मानदंड के आधार पर, शोधकर्ताओं ने इसे नियर थ्रेटड (NT) के रूप में सूचीबद्ध करने का सुझाव दिया। 
  • इस क्षेत्र में अधिक शोध जैव विविधता के उचित संरक्षण को भी प्रोत्साहित कर सकते हैं। पूर्वी घाटों का गंभीर रूप से सर्वेक्षण किया गया है, साथ ही समर्पित प्रयासों से इसे जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में पहचान प्राप्त करने में मदद मिलेगी। 

गेको (Geckos): 

  • गेको, जीवों की सरीसृप श्रेणी के अंतर्गत आती हैं और अंटार्कटिका को छोड़कर सभी महाद्वीपों में पाई जाती हैं। इन रंगीन छिपकलियों ने वर्षावनों से लेकर रेगिस्तानों तथा ठंडे पहाड़ी ढलानों तक के आवासों के लिये स्वयं को अनुकूलित किया है। 
  • गेको की अधिकाँश प्रजातियाँ रात्रिचर होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे रात में सक्रिय होती हैं, लेकिन दिन के दौरान सक्रिय रहने वाली गेको प्रजातियाँ कीटों, फलों और फूलों के पराग पर निर्भर होती हैं। 
  • गेको को प्रजातियों को छह श्रेणियों के तहत विभाजित किया गया है:  
    • कारफोडैक्टिलिडे (Carphodactylidae) 
    • डिप्लोडैक्टाइलिडे (Diplodactylidae) 
    • यूबलफेरिडे (Eublepharidae) 
    • गेकोनिडे (Gekkonidae) 
    • फाइलोडैक्टाइलिडे (Phyllodactylidae) 
    • स्फेरोडैक्टिलिडे (Sphaerodactylidae) 

भारत में गेको की अन्य प्रजातियाँ: 

  • इंडियन गोल्डन गेको (श्रेणी- Gekkonidae) भारत (तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश) के लिये स्थानिक है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की अनुसूची 1 के तहत सूचीबद्ध किया गया है। 
    • IUCN रेड लिस्ट: कम चिंतनीय (Least Concern- LC) 
  • गेकोनिडे श्रेणी की टोके गेको (Tokay Gecko) भारत-मलय क्षेत्र में व्यापक रूप से पाई जाती है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 4 के तहत सूचीबद्ध किया गया है। 
    • IUCN रेड लिस्ट: कम चिंतनीय (Least Concern- LC) 

स्रोत : द हिंदू 


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 03 जून, 2022

विश्व साइकिल दिवस  

हाल ही में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री ने विश्व साइकिल दिवस पर नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम से राष्ट्रव्यापी फिट इंडिया फ्रीडम राइडर साइकिल रैली का शुभारंभ किया। प्रतिवर्ष 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ मनाया जाता है। भारत की आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने इस साइकिल रैली को आयोजित किया है। फिट इंडिया अभियान को बढ़ावा देने के लिये साइकिल के उपयोग पर बल दिया गया। नेहरू युवा केंद्र संगठन ने देश भर में 75 प्रतिष्ठित स्थानों पर साइकिल रैलियांँ आयोजित की हैं। इसमें 75 प्रतिभागी साढ़े सात किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। साइकिल की विशिष्टता को स्वीकार करते हुए इसे परिवहन के एक सरल, किफायती, भरोसेमंद, स्वच्छ और पर्यावरणीय रूप से उपयुक्त साधन के रूप में प्रोत्साहित करने के लिये संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा सर्वप्रथम 3 जून, 2018 को विश्व साइकिल दिवस का आयोजन किया गया था। यह दिवस सतत् विकास को बढ़ावा देने और शारीरिक शिक्षा समेत सामान्य शिक्षा पद्धति को मज़बूत करने के साधन के रूप मेंं साइकिल के उपयोग पर ज़ोर देने के लिये प्रोत्साहित करता है। इस अवसर पर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को मज़बूत करने तथा समाज में साइकिल के उपयोग की संस्कृति को विकसित करने के लिये अनेक प्रकार के आयोजन किये जाते हैं।    

अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस 

विश्व भर में प्रत्येक वर्ष 1 जून को अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस मनाया जाता है। रूस में अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस पहली बार वर्ष 1949 में मनाया गया था। इसका निर्णय मॉस्को में अंतर्राष्ट्रीय महिला लोकतांत्रिक संघ की एक विशेष बैठक में लिया गया था। 1 जून, 1950 को विश्व के 51 देशों में अंतर्राष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस पहली बार मनाया गया था। इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना है। इस दिन बच्चों को तोहफे दिये जाते हैं तथा उनके लिये विशेष समारोहों का आयोजन किया जाता है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में करीब 43 लाख से ज़्यादा बच्चे बाल मज़दूरी करते हैं। यूनिसेफ के अनुसार विश्व के कुल बाल मज़दूरों में 12 फीसदी की हिस्सेदारी अकेले भारत की है। भारत में कानून के अनुसार, बाल श्रम कराने पर छह माह से दो साल तक कारावास की सज़ा हो सकती है। 

अफगानिस्तान में मानवीय सहायता 

अफगानिस्‍तान में मानवीय सहायता कार्यों की देखरेख के लिये एक भारतीय दल 2 जून से काबुल के दौरे पर हैं। इसके सदस्‍य मानवीय सहायता वितरण में शामिल अंतर्राष्‍ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों से भेंट करेंगे। यह दल उन स्‍थानों का भी दौरा करेगा, जहाँ भारतीय कार्यक्रम और परियोजनाएँ  लागू की जा रही हैं। भारत ने अफगानिस्‍तान के लोगों की मानवीय ज़रूरतों को देखते हुए सहायता भेजने का फैसला किया था। भारत ने वहाँ खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और कोविडरोधी टीकों सहित राहत सामग्री की कई खेप भेजी हैं। भारतीय सहायता का अफगानिस्‍तान में समाज के सभी वर्गों ने स्‍वागत किया है। भारतीय दल तालिबान के वरिष्‍ठ सदस्‍यों से भी मिलेगा और अफगानिस्‍तान के लोगों के लिये मानवीय सहायता के बारे में बातचीत करेगा।  अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी और तालिबान द्वारा कब्ज़ा करने के बाद भारत इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंतित है। 1990 के दशक में एक संक्षिप्त अवरोध को छोड़ दें तो अफगानिस्तान के साथ भारत के संबंध ऐतिहासिक रूप से अच्छे रहे हैं, जो वर्ष 1950 की मैत्री संधि (Treaty of Friendship) से आगे बढ़े थे।  भारत ने अफगानिस्तान में भारी निवेश और वित्तीय प्रतिबद्धताओं (3 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक) की पूर्ति की है और अफगान सरकार के साथ मज़बूत आर्थिक और रक्षा संबंध विकसित किये हैं। लेकिन अब एक बार फिर वह अनिश्चितता की स्थिति से गुज़र रहा है क्योंकि अमेरिकी सैन्य बल की वापसी ने अफगानिस्तान में शक्ति संतुलन को प्रभावी रूप से बदल दिया है और तालिबान ने अब यहाँ तेज़ी से अपनी क्षेत्रीय पकड़ मज़बूत कर ली है। 


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