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एडिटोरियल

  • 03 Oct, 2022
  • 11 min read
जैव विविधता और पर्यावरण

सुंदरबन: जैव विविधता का संरक्षण

यह एडिटोरियल 29/09/2022 को ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित “To protect the Sundarbans, Delhi and Dhaka must unite” लेख पर आधारित है। इसमें सुंदरबन की वर्तमान स्थिति और संबंधित मुद्दों के बारे में चर्चा की गई है।

संदर्भ

सुंदरबन (Sundarbans) बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में निचले द्वीपों का एक समूह है जो भारत और बांग्लादेश में विस्तृत है। यह अपने अद्वितीय मैंग्रोव वनों के लिये प्रसिद्ध है। यह अपनी मोहक प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही प्रसिद्ध और शानदार ‘रॉयल बंगाल टाइगर’ के लिये एक महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में लोकप्रिय है।

  • सुंदरबन क्षेत्र व्यापक रूप से मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि (Aquaculture) पर निर्भर है और इस संवेदनशील पारितंत्र में कोई भी परिवर्तन न केवल पारिस्थितिकी के लिये बल्कि आजीविका के लिये भी विनाश का कारण बनता है। पिछले कुछ दशकों से सुंदरबन में मैंग्रोव वन क्षेत्र में तेज़ी से कमी आ रही है, जो पर्यावरणविदों के साथ ही नीतिनिर्माताओं के लिये एकसमान रूप से चिंता का विषय है। इस परिदृश्य में सुंदरबन के संरक्षण के लिये भारत और बांग्लादेश के बीच एक संयुक्त सहयोग का निर्माण करना समय की माँग है।

सुंदरवन डेल्टा का क्या महत्त्व है?

  • बंगाल की खाड़ी में गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदियों के डेल्टा पर स्थित सुंदरबन विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है।
  • सुंदरबन जीवों के कई समूहों का प्राकृति आवास क्षेत्र है और जीव प्रजातियों की एक बड़ी संख्या आहार, प्रजनन और आश्रय के लिये इस पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर है।
    • यह खारा जल मगरमच्छ, वाटर मॉनिटर लिज़ार्ड, गंगा डॉल्फिन और ओलिव रिडले कछुए जैसी कई दुर्लभ और विश्व स्तर पर संकटग्रस्त वन्यजीव प्रजातियों का घर है।
  • सुंदरबन का 40% भाग भारत में और शेष भाग बांग्लादेश में स्थित है। सुंदरबन को वर्ष 1987 (भारतीय क्षेत्र) और 1997 (बांग्लादेशी क्षेत्र) में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया गया था।
  • जनवरी 2019 में रामसर कन्वेंशन के तहत सुंदरबन आर्द्रभूमि, भारत को ‘अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमि’ के रूप में मान्यता दी गई।

The-Sundarbans

सुंदरबन से संबंधित प्रमुख चुनौतियाँ

  • समुद्र जलस्तर में वृद्धि: अन्य तटीय क्षेत्रों की तुलना में सुंदरबन समुद्र जलस्तर में लगभग दोगुनी वृद्धि का सामना कर रहा है।
    • इसके साथ ही, इस क्षेत्र में चक्रवातों की बढ़ती आवृत्ति एवं तीव्रता इसकी कार्बन पृथक्करण (Carbon sequestration) क्षमता और इस मैंग्रोव वन की अन्य पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिये एक गंभीर खतरा बन गई है।
  • जल की बढ़ती लवणता: वर्षों से लगातार तूफान के साथ सुंदरबन के लगभग सभी क्षेत्रों में अधिकांश नदियों और तालाबों के जल की लवणता बढ़ गई है।
    • बढ़ती लवणता मछली तालाबों और कृषि भूमि की उत्पादकता को कम कर रही है, जिसके परिणामस्वरूप गरीब और कमज़ोर परिवारों की आय और भी कम हो रही है।
  • अत्यधिक गरीबी: उच्च स्तर की जलवायु भेद्यता (Climate vulnerability) इस क्षेत्र में अत्यधिक गरीबी में योगदान करती है। इस क्षेत्र में उच्च जनसंख्या घनत्व (भारतीय क्षेत्र में 980 व्यक्ति/वर्ग किमी और बांग्लादेशी क्षेत्र में 370-850 व्यक्ति/वर्ग किमी) पाया जाता है।
    • इसके अलावा, यहाँ औसत आय प्रति दिन 1 अमेरिकी डॉलर से भी कम है। यहाँ के निवासी अवसंरचनागत कमियों का भी सामना कर रहे हैं।
  • द्विपक्षीय सहयोग की कमी: हालाँकि भारत और बांग्लादेश ने सुंदरबन के संरक्षण पर एक द्विपक्षीय संयुक्त कार्यसमूह (JWG) का गठन किया है, लेकिन इसकी केवल एक बार बैठक हुई है (जुलाई 2016 में)। इस प्रकार, द्विपक्षीय सहयोग की दिशा में बहुत कम प्रगति हुई है।
    • दोनों देशों की राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर की संस्थाएँ इन मुद्दों के समाधान के लिये एकीकृत नहीं हैं।
  • वन्यजीवों के लिये खतरा: जलवायु परिवर्तन के कारण इन मैंग्रोव पर्यावासों की क्षति से उन प्रजातियों की भी हानि हो रही है जो IUCN के संकटापन्न या लुप्तप्राय श्रेणी (Near-threatened or endangered) से संबंधित हैं।
    • ये मैंग्रोव क्षेत्र विविध मोलस्क और क्रस्टेशियंस प्रजातियों के लिये सुरक्षित आश्रय स्थल हुआ करते थे, लेकिन प्रदूषित निर्वहन और इन प्रजातियों के प्रजनन गतिविधियों के कारण ये भी लुप्त हो रहे हैं।
  • महिलाओं पर प्रभाव: इस क्षेत्र में महिलाएँ नदी से झींगे और मछलियाँ पकड़कर और फिर उन्हें बेचकर अपनी आजीविका कमाती हैं। इसके लिये वे प्रतिदिन चार से छह घंटे कमर तक गहरे जल में रहकर कार्य करती हैं। जल की लवणता बढ़ने से उनके लिये अनियमित मासिक धर्म और गर्भपात जैसी समस्याओं के साथ गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हुआ है।

आगे की राह

  • भारत-बांग्लादेश सहयोग: दोनों देशों के बीच वर्तमान में मौजूद संयुक्त कार्यसमूह को एक संयुक्त उच्च अधिकार-संपन्न बोर्ड और अंतःविषय विशेषज्ञों के एक समूह में परिवर्तित किया जा सकता है, जो सुंदरवन की जलवायु प्रत्यास्थता और इस पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर समुदायों के कल्याण हेतु योजना निर्माण और इसके कार्यान्वयन में योगदान कर सकता है।
    • विविध क्षेत्रों में सुचारू रूप से कार्य करने के लिये और ज़मीनी मुद्दों से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु स्थानीय लोगों को संलग्न करने के लिये संस्थागत तंत्र में कुछ लचीलापन लाया जाना चाहिये।
    • दोनों देश ‘अमेज़न कॉर्पोरेशन ट्रीटी आर्गेनाईज़ेशन’ और ‘सेनेगल रिवर बेसिन डेवलपमेंट आर्गेनाईज़ेशन’ जैसी विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय पहलों से प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं।
  • बहु-क्षेत्रीय दृष्टिकोण: पर्यटन, आपदा प्रबंधन, कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास से संबद्ध मंत्रालयों द्वारा बहु-संलग्नता और बहुआयामी योजना के लिये एक बहुस्तरीय दृष्टिकोण का अनुपालन किया जा सकता है।
    • सुंदरबन के भविष्य को बदलने के लिये जैव विविधता मानचित्रण, प्रत्यास्थी आवास एवं सार्वजनिक अवसंरचना, रसायन/तेल रिसाव के लिये प्रतिक्रिया प्रणाली, पारिस्थितिक पर्यटन, आरंभिक चेतावनी प्रणाली और प्रकृति-सकारात्मक एवं प्रकृति-आधारित समाधान जैसे उपायों को अपनाया जा सकता है।
  • स्थानीय लोगों की ज़िम्मेदारी: केंद्र और राज्य सरकार की पहलों के अलावा स्थानीय समुदायों को स्वयं भी कुछ कार्य योजनाएँ बनानी होंगी।
    • स्थानीय लोग खारा या लवणीय भूमि का उपयोग करने के बजाय ‘बैकयार्ड फार्मिंग’ की अवधारणा को अपना सकते हैं। कभी-कभी लवणीय भूमि का भी लोगों द्वारा उपयोग किया जा सकता है। ऐसे मामलों में स्थानीय सरकार को उन फसलों की अनुशंसा करनी चाहिये जो लवणीय भूमि पर उगाई जा सकती हैं।
  • वैश्विक रोल मॉडल की ओर आगे बढ़ना: सुंदरबन में सफल जलवायु-प्रत्यास्थी और समावेशी विकास में भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को बेहतर करने और अन्य डेल्टा क्षेत्रों एवं और विकासशील छोटे द्वीप राज्यों के लिये एक मॉडल के रूप में कार्य कर सकने की क्षमता है।

अभ्यास प्रश्न: विचार करें कि जलवायु परिवर्तन सुंदरबन के मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे प्रभावित कर रहा है और चुनौतियों को कम करने के उपायों के सुझाव दें।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs)  

निम्नलिखित संरक्षित क्षेत्रों पर विचार कीजिये: (वर्ष 2012)

  1. बांदीपुर
  2. भितरकनिका
  3. मानसी
  4. सुंदरवन

उपर्युक्त में से किसे टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया है?

 (A) केवल 1 और 2
 (B) केवल 1, 3 और 4
 (C) केवल 2, 3 और 4
 (D) 1, 2, 3 और 4

 उत्तर: (B)


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