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डेली न्यूज़

  • 21 Mar, 2020
  • 42 min read
शासन व्यवस्था

स्कूल बंद के दौरान छात्रों के लिये खाद्य सुरक्षा भत्ता

प्रीलिम्स के लिये:

मिड-डे कार्यक्रम, COVID-19

मेन्स के लिये:

भारत में खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने सभी राज्य सरकारों से कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों के लिये मिड-डे मील (MDM) कार्यक्रम को जारी रखने या उन्हें खाद्य सुरक्षा भत्ता प्रदान करने को कहा है। 

प्रमुख बिंदु:

  • ध्यातव्य है कि केंद्र सरकार ने बीते दिनों 16 मार्च को कोरोनावायरस (COVID-19) के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से स्कूलों में देशव्यापी बंद की घोषणा की थी, वहीँ दिल्ली और केरल जैसे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने सरकार के इस आदेश से पूर्व ही 31 मार्च तक स्कूलों को बंद कर दिया था।
  • इसके अलावा केरल, छात्रों को उनके घर पर पहले से ही मिड-डे मील प्रदान करने की व्यवस्था कर चुका है। केरल सरकार का अनुसरण करते हुए पश्चिम बंगाल ने भी इसी प्रकार के उपाय अपनाने की घोषणा की है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस दिशा में संज्ञान लेते हुए सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर यह पूछा था कि वे किस प्रकार स्कूलों के बंद रहने के दौरान दोपहर के भोजन को सुनिश्चित करेंगे।

कारण

  • भारत सहित संपूर्ण विश्व मौजूदा समय में कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
  • आँकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इस वायरस के कारण अब तक 10000 से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। भारत के संदर्भ में इस वैश्विक महामारी की बात करें तो नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, भारत में अब तक 250 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
  • यह वायरस वैश्विक समाज के समक्ष एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है और इससे निपटने के लिये दुनिया भर की सरकारों द्वारा तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।
  • स्कूलों को बंद करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम की तरह देखा जा रहा है। स्कूलों में पढने वाले बच्चों को इस वायरस के प्रति काफी संवेदनशील माना जाता है, जिसके कारण उन्हें इसकी चपेट में आने से बचाना आवश्यक है।
  • हालाँकि आँकड़े बताते हैं कि देश का एक वर्ग ऐसा भी है जो आवश्यक पोषक तत्त्वों और आहार की प्राप्ति के लिये मुख्य रूप से स्कूल से मिलने वाले भोजन पर निर्भर रहता है और यदि स्कूलों को लंबे समय के लिये बंद कर दिया जाता है तो उन बच्चों के समक्ष एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

संबंधित नियम

  • मिड-डे मील (MDM) 2015 के अनुसार, यदि खाद्यान्नों की कमी, खाना पकाने की लागत, ईंधन या कुक (Cook) की अनुपलब्धता के कारण छात्रों को भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है तो ऐसी स्थिति में सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वह प्रत्येक बच्चे को खाद्य सुरक्षा भत्ता प्रदान करेगी।

मिड-डे मील कार्यक्रम

  • मिड-डे मील कार्यक्रम को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में 15 अगस्त, 1995 को पूरे देश में लागू किया गया था।
  • इसके पश्चात् सितंबर 2004 में कार्यक्रम में व्यापक परिवर्तन करते हुए मेनू आधारित पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ की गई।
  • इस योजना के तहत न्यूनतम 200 दिनों हेतु निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 300 कैलोरी ऊर्जा एवं 8-12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान है।
  • मिड-डे मील योजना में सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, विशेष प्रशिक्षण केंद्रों के कक्षा 1 से 8 तक में पढ़ने वाले सभी स्कूली छात्रों को शामिल किया गया है, जिनमें समग्र शिक्षा अभियान के तहत समर्थित मदरसे भी शामिल हैं।
  • आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश के लगभग 9.17 करोड़ छात्र इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे है।

आगे की राह

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोनावायरस (COVID-19) को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है, यह वायरस वैश्विक समुदाय के समक्ष एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है।
  • भारत सरकार द्वारा स्कूलों को बंद करने और इस दौरान छात्रों के लिये मिड-डे मील योजना को जारी रखने अथवा खाद्यान्न भत्ता प्रदान करने का निर्णय सराहनीय है।
  • आवश्यक है कि वैश्विक समुदाय इस महामारी से निपटने के लिये एक साथ एक मंच पर एकत्रित हो और इस संदर्भ में WHO तथा प्रशासन द्वारा जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


शासन व्यवस्था

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम

प्रीलिम्स के लिये:

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम, खादी और ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय

मेन्स के लिये:

प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम से संबंधित विषय

चर्चा में क्यों?

हाल ही में लोकसभा में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry Of Micro, Small and Medium Enterprises-MSME) द्वारा ‘प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम’ (Prime Minister’s Employment Generation Programme- PMEGP) से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। 

प्रमुख बिंदु:

  • PMEGP ‘खादी और ग्रामोद्योग आयोग’ (Khadi and Village Industries Commission- KVIC), राज्य खादी और ग्रामोद्योग बोर्ड (State Khadi and Village Industries Board- KVIB) और ज़िला उद्योग केंद्रों (District Industries centres- DIC) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
  • PMEGP एक प्रमुख क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और बेरोज़गार युवाओं की मदद कर गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से स्वरोज़गार के अवसर पैदा करना है।
  • इस कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों, निजी क्षेत्र के कुछ चयनित बैंकों और सहकारी बैंकों द्वारा KVIC के माध्यम से MSME मंत्रालय द्वारा मार्जिन मनी सब्सिडी (Margin Money Subsidy) के साथ ऋण प्रदान किया जाता है।
  • PMEGP के तहत वर्ष 2019-20 के दौरान सूक्ष्म उद्यमों को स्थापित करने के लिये 79236 लाभार्थियों की सहायता करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से 15 मार्च, 2020 तक 54361 लाभार्थियों को पहले ही सहायता दी जा चुकी है।

पात्रता हेतु मानदंड:

  • 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति इस योजना के तहत आवेदन करने का पात्र है।
  • विनिर्माण क्षेत्र में परियोजना की अधिकतम लागत 25 लाख रुपए और सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपए है।
  • केवल नई इकाइयों की स्थापना हेतु PMEGP के तहत लाभ प्राप्त किया जा सकता है। 
  • सामान्य श्रेणी के लाभार्थी ‘ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25% ऋण और शहरी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 15% ऋण’ प्राप्त कर सकते हैं।
  • अनुसूचित जाति/जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, भूतपूर्व सैनिकों, दिव्यांगों, पहाड़ी और सीमा क्षेत्रों आदि से संबंधित लाभार्थी ‘ग्रामीण क्षेत्रों में परियोजना की लागत का 35% ऋण और शहरी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25% ऋण’ प्राप्त कर सकते हैं।
  • MSME मंत्रालय ने मौजूदा PMEGP/MUDRA इकाइयों के विस्तार/उन्नयन के लिये दूसरी वित्तीय सहायता का एक नया घटक भी पेश किया है जिसमें वर्ष 2018-19 से विनिर्माण इकाई की परियोजना लागत 1 करोड़ रुपए एवं सेवा/व्यापार इकाई की परियोजना लागत 25 लाख रुपए पर 15% ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम के तहत आवंटित और वितरित किये गए ऋणों का विवरण निम्नलिखित है:

वर्ष 

आवंटित ऋण (करोड़ रुपए में)

ऋण का वितरण (करोड़ रुपए में)
2016-17

1082.90

1280.94
2017-18

1082.90

1312.40
2018-19

2068.80

2070.00

2019-20
(15/03/2020 तक)

2396.44

1622.50

खादी और ग्रामोद्योग आयोग 

(Khadi and Village Industries Commission): 

  • यह 'खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग अधिनियम, 1956' के तहत एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। 
  • यह भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME) के अंतर्गत आने वाली एक मुख्य संस्था है।
  • उद्देश्य:
    • सामाजिक उद्देश्य: रोज़गार देना। 
    • आर्थिक उद्देश्य: बिक्री योग्य वस्तुओं का उत्पादन करना। 
    • व्यापक उद्देश्य: गरीबों को आत्मनिर्भर बनाना एवं एक मज़बूत ग्रामीण सामुदायिक भावना का निर्माण करना। 

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम:

  • सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के संवर्द्धन एवं विकास को सरल एवं सुविधाजनक बनाने हेतु 2 अक्तूबर, 2006 को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम (MSMED Act), 2006 विनियमित किया गया था। इस अधिनियम के तहत MSMEs को निम्नलिखित दो भागों में वर्गीकृत किया गया है:

1. विनिर्माण क्षेत्र के उद्यम- इसमें उद्यमों को संयंत्र और मशीनरी (Plant & Machinery) में किये गए निवेश के संदर्भ में परिभाषित किया गया है।

उद्यम का प्रकार संयंत्र एवं मशीनरी में किया गया निवेश (रुपए में)
सूक्ष्म (Micro) 25 लाख तक
लघु (Small) 25 लाख से अधिक किंतु 5 करोड़ से कम
मध्यम (Medium)

5 करोड़ से अधिक किंतु 10 करोड़ से कम

2. सेवा क्षेत्र के उद्यम- सेवाएँ प्रदान करने में लगे उद्यमों को उपकरणों (Equipment) में  निवेश के संदर्भ में परिभाषित किया जाता है।

उद्यम का प्रकार उपकरणों में किया गया निवेश (रुपए में)
सूक्ष्म (Micro) 10 लाख तक
लघु (Small) 10 लाख से अधिक किंतु 2 करोड़ से कम
मध्यम (Medium) 2 करोड़ से अधिक किंतु 5 करोड़ से कम

स्रोत: पीआईबी


सामाजिक न्याय

वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट- 2020

प्रीलिम्स के लिये:

वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट- 2020

मेन्स के लिये:

वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट तथा इसका महत्त्व

चर्चा मे क्यों?

हाल ही में सतत् विकास समाधान नेटवर्क (Sustainable Development Solution Network- SDSN) ने वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट-2020 (World Happiness Report- 2020) जारी की है।

मुख्य बिंदु:

  • ‘विश्व खुशहाली रिपोर्ट’ के आँकड़े वर्ष 2018 एवं 2019 दौरान एकत्रित किये गए थे, अत: यह रिपोर्ट कोरोनोवायरस बीमारी (COVID- 19) के प्रसार को रोकने के लिये लगाए गए व्यापक प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं हुई।
  • SDSN ने वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट-2020 में 153 देशों को शामिल किया है।

शीर्ष देश:

  • सबसे खुशहाल देशों में फिनलैंड शीर्ष पर है। दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमश: डेनमार्क एवं स्विटज़रलैंड हैं।

भारत की स्थिति:

  • इस वर्ष भारत का स्थान 144वाँ है जो पिछले वर्ष से 4 स्थान कम है। 
  • भारत का स्थान अपने पड़ोसी देशों नेपाल, पाकिस्तान बांग्लादेश, श्रीलंका, चीन से खराब स्थिति में है।

निम्नतर स्थिति वाले देश:

  • रैंकिंग में सबसे नीचे स्थान पाने वाले देश हिंसक संघर्ष एवं तीव्र गरीबी से पीड़ित हैं। ज़िम्बावे, दक्षिणी सूडान और अफगानिस्तान को दुनिया के सबसे कम खुशहाल देशों में स्थान दिया गया है। 

खुशहाल राष्ट्र का अर्थ:

  • जहाँ लोगों में अपनेपन का अहसास, एक-दूसरे पर भरोसा हो एवं साझा संस्थानों का (Shared Institutions) आनंद लेते हैं, वे राष्ट्र खुशहाल होते हैं।
  • इन राष्ट्रों में अधिक सहन क्षमता (Resilience) होती है, क्योंकि साझा-विश्वास  कठिनाइयों के बोझ को कम करता है तथा स्वस्थ (well-being) समाज का निर्माण करता है।

Wellbeing

नगर एवं खुशी (Cities and Happiness):

  • नगर आर्थिक क्रियाओं के केंद्र (Economic Powerhouses) होते हैं। तीव्र नगरीकरण के कारण नगरों का महत्त्व लगातार बढ़ रहा है, अत: वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट में नगरों को भी शामिल किया गया है।
  • नगरों के लिये पहली बार ‘वैश्विक खुशहाली रैंकिंग’ जारी की गई। यह रैंकिंग ‘द इकोनॉमिस्ट’ (The Economist’s) द्वारा जारी ‘ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स’ (Global Liveability Index- GLI) से अलग है क्योंकि GLI 5 संकेतकों के मात्रात्मक एवं गुणात्मक विश्लेषण पर आधारित होता है, जबकि ‘खुशहाल नगर सूचकांक’ नगरीय निवासियों द्वारा निर्धारित भलाई (Well-Being) के मानकों पर आधारित है। शीर्ष 3 ‘खुशहाल नगर’ हेलसिंकी (फिनलैंड), आरहूस (डेनमार्क), वेलिंगटन (न्यूज़ीलैंड) हैं। 

रिपोर्ट के बारे में:

  • यह रिपोर्ट प्रत्येक वर्ष सतत् विकास समाधान नेटवर्क (Sustainable Development Solution Network- SDSN) द्वारा प्रकाशित की जाती है।
    • वैश्विक खुशहाली रिपोर्ट का प्रकाशन वर्ष 2012 से शुरू हुआ था। इस वर्ष इसका आठवाँ संस्करण प्रकाशित किया गया है।
    • खुशहाली को आँकने के लिये सूचकांक में प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद, कठिन समय में व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा, स्वस्थ जीवन की प्रत्याशा, सामाजिक सरोकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा भ्रष्टाचार और उदारता की अवधारणा को आधार बनाया जाता है। 

सतत् विकास समाधान नेटवर्क:

  • संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वावधान में संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास समाधान नेटवर्क (Sustainable Development Solution Network- SDSN) वर्ष 2012 से काम कर रहा है।
  • SDSN सतत् विकास हेतु व्यावहारिक समाधान को बढ़ावा देने के लिये वैश्विक वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञता जुटाता है, जिसमें सतत् विकास लक्ष्यों और पेरिस जलवायु समझौते का कार्यान्वयन भी शामिल है।
  • SDSN संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों, बहुपक्षीय वित्तपोषण संस्थानों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज के साथ मिलकर काम करता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


भारतीय अर्थव्यवस्था

WTO पैनल की सिफारिश को लागू करने के लिये बाध्य नहीं भारत

प्रीलिम्स के लिये:

विश्व व्यापार संगठन, निर्यात संबंधी योजनाएँ, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि

मेन्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार विवाद संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों?

हाल ही में संसद को सूचित किया गया है कि भारत अपनी निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं पर WTO के विवाद निपटान पैनल की सिफारिशों को लागू करने के लिये बाध्य नहीं है, क्योंकि भारत ने पैनल के इस आदेश को उच्च स्तर पर चुनौती दी है।

प्रमुख बिंदु

  • बीते वर्ष 31 अक्तूबर, 2019 को विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation-WHO) के विवाद निपटान पैनल ने निर्णय दिया था कि भारत की निर्यात संबंधी योजनाएँ (Export-Related Schemes) “सब्सिडी एवं प्रतिकारी उपाय समझौते” के तहत निषिद्ध सब्सिडी (Prohibited Subsidies) की प्रकृति में आती हैं और विश्व व्यापार संगठन के मानदंडों के साथ असंगत हैं।
  • WTO के विवाद निपटान पैनल ने भारत को विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) योजना को वापस लेने के लिये 180 दिनों की समय-सीमा प्रदान की है।

क्या है विवाद?

  • दरअसल 14 मार्च, 2018 को संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (United States Trade Representative-USTR) कार्यालय ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भारत की निर्यात संवर्द्धन योजनाओं को चुनौती दी थी। 
  • USTR का तर्क था कि इन योजनाओं के कारण असमान अवसर पैदा हो रहे हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। USTR के अनुसार, भारत सब्सिडी एवं प्रतिकारी उपाय समझौते (Agreement on Subsidies and Countervailing Measures- SCM Agreement) के तहत  की गई अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन कर रहा है।
  • USTR ने इस संदर्भ में भारत की 5 निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं (निर्यात उन्मुख इकाइयों की योजनाएँ व क्षेत्र-विशिष्ट योजनाएँ) का उल्लेख किया है, जोकि निम्नलिखित हैं-
    • इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर प्रौद्योगिकी पार्क योजना (Electronics Hardware Technology Parks Scheme)
    • भारत से मर्चेंडाइज़ निर्यात के लिये योजना (Merchandise Exports from India Scheme)
    • निर्यात संवर्द्धन कैपिटल गुड्स संबंधी योजना (Export Promotion Capital Goods Scheme)
    • विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones)
    • शुल्क मुक्त आयात अधिकार-पत्र योजना (Duty free Import Authorization Scheme)
  • USTR का मुख्य तर्क यह है कि भारत की उपरोक्त पाँच निर्यात संवर्द्धन योजनाएँ, SCM समझौते के प्रावधान 3.1 (A) और 3.2 का उल्लंघन करती हैं, क्योंकि ये दोनों प्रावधान निर्यात सब्सिडी देने पर रोक लगाते हैं।

व्यापार विवाद और भारत

  • संसद में दी गई सूचना के अनुसार, भारत वर्तमान में WTO में कुल 15 व्यापार विवादों में शामिल है, जिनमें से अधिकांश अमेरिका के साथ हैं। इन विवादों में से 4 में भारत शिकायतकर्त्ता है जबकि 11 विवादों में भारत प्रतिवादी है।

विश्व व्यापार संगठन (WTO)

  • विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization) विश्व में व्यापार संबंधी अवरोधों को दूर कर वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना वर्ष 1995 में मराकेश संधि के तहत की गई थी।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा में है। वर्तमान में विश्व के 164 देश इसके सदस्य हैं।
  • 29 जुलाई, 2016 को अफगानिस्तान इसका 164वाँ सदस्य बना था।
  • सदस्य देशों का मंत्रिस्तरीय सम्मेलन इसके निर्णयों के लिये सर्वोच्च निकाय है, जिसकी बैठक प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित की जाती है।

संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR)

  • संयुक्त राज्य व्यापार प्रतिनिधि (USTR) एक अमेरिकी संस्था है, जो अमेरिका के राष्ट्रपति को व्यापार की नीति विकसित करने और अनुशंसा करने तथा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तरों पर व्यापार वार्ता के आयोजन तथा सरकार के भीतर व्यापार नीति के समन्वयन के लिये ज़िम्मेदार है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस


भारतीय अर्थव्यवस्था

भारत: विद्युत का तीसरा बड़ा उत्पादक

प्रीलिम्स के लिये:

विश्व के शीर्ष विद्युत उत्पादक देश, IEA

मेन्स के लिये:

ऊर्जा सुरक्षा

चर्चा में क्यों?

‘अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी’ (International Energy Agency- IEA) द्वारा प्रकाशित ‘की वर्ल्ड एनर्जी स्टेटिक्स’ (Key World Energy Statistics) के अनुसार, भारत बिजली उत्पादन में तीसरे (वर्ष 2019 में) तथा प्रति व्यक्ति विद्युत खपत के मामले में 106वें स्थान (2017) पर रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • 1,497 टेरावाट-हॉवर  (Terawatt-hour- TWh) विद्युत उत्पादन के साथ भारत अमेरिका एवं चीन के बाद दुनिया का तीसरा बड़ा विद्युत उत्पादक एवं उपभोक्ता देश है। 
  • स्वतंत्रता  के बाद से विद्युत उत्पादन 100 गुना से अधिक हो गया है, परंतु आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि के कारण विद्युत की मांग, उत्पादन से अधिक रही है।

विश्व के शीर्ष विद्युत उपभोक्ता देश:

Index

संबंधित सरकारी पहल:

  • सौभाग्‍य योजना (Saubhagya Scheme): 
    • भारत सरकार ने देश में 40 मिलियन से अधिक परिवारों को विद्युत कनेक्शन उपलब्ध  कराने के उद्देश्य से 'प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना' (Pradhan Mantri Sahaj Bijli Har Ghar Yojana) शुरू की है।
  • उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (Ujwal Discom Assurance Yojana- UDAY): 
    • उदय योजना को विद्युत मंत्रालय ने राज्य डिस्कॉम की खराब वित्तीय स्थिति मे सुधार करने  के लिये आरंभ किया था।
  • उजाला (Unnat Jyoti by Affordable LEDs for All- UJALA):
    • इस योजना का उद्देश्य दक्ष प्रकाश व्यवस्था को बढ़ावा देना, दक्ष उपकरणों के उपयोग करने के बारे में जागरूकता बढ़ाना है तथा विद्युत बिल में कमी लाना है। यह योजना ‘एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड’ ( Energy Efficiency Services Limited) द्वारा क्रियान्वित की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA):

  • अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी एक स्वायत्त संगठन है, जो अपने 30 सदस्य देशों और 8 सहयोगी देशों  के साथ वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय, सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा सुनिश्चित करने हेतु काम करती है।
  • इसकी स्थापना (1974 में) 1973 के तेल संकट के बाद हुई थी जब ओपेक दशों ने तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के साथ दुनिया को चौंका दिया था।
  • IEA के मुख्य क्षेत्र हैं-
    • ऊर्जा सुरक्षा
    • आर्थिक विकास
    • पर्यावरण जागरूकता
    • वैश्विक संबद्धता  (Engagement Worldwide)

भारत वर्ष 2017 में अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का एक सहयोगी सदस्य बना। इसका मुख्यालय पेरिस में है।

वर्ल्ड एनर्जी आउटलुक (World Energy Outlook- WEO):

  • यह रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (International Energy Agency- IEA) द्वारा जारी की जाती है। 

फ्यूचर ऑफ सोलर फोटोवोल्टिक' (Future of Solar Photovoltaic) रिपोर्ट:

  • यह रिपोर्ट ऊर्जा थिंक टैंक ‘अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी’ (International Renewable Energy Agency- IRENA) द्वारा जारी की जाती है। 

‘की वर्ल्ड एनर्जी  स्टेटिक्स’ (Key World Energy Statistics- KWES):

  • KWES रिपोर्ट अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी द्वारा प्रकाशित किया जाता है।

स्रोत: पीआईबी


भारतीय अर्थव्यवस्था

प्रकटीकरण मानदंडों में सेबी की छूट

प्रीलिम्स के लिये:

सेबी, COVID-19

मेन्स के लिये:

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर COVID-19 के प्रभाव, निवेशकों और सूचीबद्ध कंपनियों के हितों की रक्षा में सेबी की भूमिका  

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत में COVID-19 के कारण उत्पन्न हुई चुनौतियों को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India-SEBI) ने सूचीबद्ध कंपनियों के हितों की रक्षा के लिये प्रकटीकरण मानदंडों की अनिवार्यताओं में अस्थायी छूट देने की घोषणा की है।

मुख्य बिंदु:

  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा 20 मार्च, 2020 को दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनियों को चौथी तिमाही के परिणाम प्रस्तुत करने के लिये 45 दिनों की छूट के साथ कुछ अन्य मामलों में भी राहत प्रदान की जाएगी।
  • इस घोषणा के अनुसार, कंपनियों को अपने वार्षिक आँकड़े/परिणाम प्रस्तुत करने के लिये एक माह की अतिरिक्त छूट प्रदान की गई है।
  • सेबी द्वारा कंपनियों को त्रैमाषिक गवर्नेंस रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिये भी एक माह (15 मई) तक की छूट दी गई है। 
  • साथ ही सेबी ने कंपनियों की दो बोर्ड बैठकों के बीच अनिवार्य समयांतराल में भी राहत प्रदान की है।  
  • सेबी के अनुसार, COVID-19 के प्रसार से उत्पन्न हुई चुनौतियों को देखते हुए सूचीबद्ध कंपनियों के लिये नियमों के अनुपालन में अस्थायी राहत प्रदान करने की आवश्यकता महसूस की गई है। 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड

(Securities and Exchange Board of India-SEBI):

  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की स्थापना ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992’ के प्रावधानों के तहत 12 अप्रैल, 1992 को की गई थी।
  • इसका मुख्यालय मुंबई (महाराष्ट्र) में स्थित है।
  • इसके अतिरिक्त सेबी के चार क्षेत्रीय कार्यालय नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और अहमदाबाद में स्थित हैं।
  • सेबी प्रतिभूति बाज़ार (Securities Market) का विकास और उसके विनियमन का कार्य करता है। 
  • इसके अतिरिक्त यह प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले निवेशकों के हितों के संरक्षण और प्रतिभूति बाज़ार के बारे में जागरूकता फैलाने का कार्य करता है।     

नियमों के अनुपालन में अस्थायी छूट का प्रभाव: 

  • सेबी ने वर्तमान संशोधनों के आधार पर 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के वार्षिक परिणाम प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि को 30 जून तक बढ़ा दिया है। आमतौर पर सूचीबद्ध कंपनियों को एक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के 60 दिनों के अंदर अपने वार्षिक परिणाम प्रस्तुत करने होते हैं।
  • साथ ही सूचीबद्ध इकाइयों के निदेशक मंडल और ऑडिट कमेटी को  1 दिसंबर, 2019 और 30 जून, 2020 की अवधि के बीच होने वाली बैठकों के बीच अनिवार्य समयांतराल का पालन करने से भी छूट प्रदान की गई है।
  • हालाँकि सेबी के आदेश के अनुसार, निदेशक मंडल और ऑडिट कमेटी को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे निर्धारित विनियमों के तहत वर्ष भर में चार बार अवश्य मिलेंगे।  
  • इस अस्थायी छूट के तहत त्रैमासिक शेयर होल्डिंग पैटर्न और निवेशक शिकायत रिपोर्ट का विवरण प्रस्तुत करने की समय-सीमा को तीन सप्ताह (15 मई) तक बढ़ा दिया गया है।
  • सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों को शेयर हस्तांतरण सुविधा के संदर्भ में अर्द्धवार्षिक अनुपालन प्रमाण पत्र (Half-Yearly Compliance Certificate) और वार्षिक सचिवीय अनुपालन रिपोर्ट (Annual Secretarial Compliance Report) प्रस्तुत करने के लिये भी एक माह की छूट प्रदान की है।
  • इस छूट के बाद अब सूचीबद्ध कंपनियाँ शेयर हस्तांतरण सुविधा के अर्द्धवार्षिक अनुपालन प्रमाण पत्र को 31 मई तक और वार्षिक सचिवीय अनुपालन रिपोर्ट को 30 जून तक प्रस्तुत कर सकेंगी। 

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस


जीव विज्ञान और पर्यावरण

हंटिंगटन रोग

प्रीलिम्स के लिये:

हंटिंगटन रोग

मेन्स के लिये:

आनुवंशिक रोग 

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केंद्र (National Centre for Cell Science- NCCS) पुणे के वैज्ञानिकों की एक टीम ने फ्रूट फ्लाई (Fruit Flies) पर किये अध्ययन में पाया कि हंटिंगटन (Huntingtin- HTT) नामक जीन में उत्परिवर्तन के कारण न केवल हंटिंगटन प्रोटीन मे कमी होती है अपितु यह उत्परिवर्तन समग्र प्रोटीन उत्पादन में कमी का कारण बनता है। 

हंटिंगटन रोग (Huntington Disease- HD): 

  • यह मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला आनुवंशिक विकार है। 

रोग का कारण:

  • यह रोग HTT नामक जीन में उत्परिवर्तन के कारण होता है। HTT जीन हंटिंगटन नामक प्रोटीन के निर्माण में भाग लेते हैं।  HTT जीनों का कार्य प्रोटीन निर्माण के लिये निर्देश देना हैं।
  • HTT जीन में उत्परिवर्तित होने के कारण इन जीनों की निर्देश देने की क्षमता मे बाधा उत्पन्न होती है तथा इससे त्रुटिपूर्ण प्रोटीन का निर्माण होता है। 
  • त्रुटिपूर्ण प्रोटीन जिन्हे क्लंपस (Clumps) भी कहा जाता है, मस्तिष्क की कोशिकाओं के सामान्य कामकाज को बाधित करते हैं। अंततः मस्तिष्क की न्यूरॉन्स मृत हो जाती है तथा ये त्रुटिपूर्ण प्रोटीन हंटिंगटन रोग का कारण बनते हैं।

रोग का प्रभाव:

  • इस रोग के कारण शरीर पर नियंत्रण नहीं रहता है तथा संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट आती है।  
  • इससे अलावा ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, स्मृति विलोप, मूड स्विंग, व्यक्तित्व में बदलाव आदि के लक्षण देखे जाते हैं।

शोध का महत्त्व:

  • अब तक वैज्ञानिक समुदाय यह नहीं जान पाए थे कि त्रुटिपूर्ण क्लंपस हंटिंगटन प्रोटीन निर्माण के अलावा अन्य प्रोटीन के निर्माण को भी प्रभावित करते हैं या नहीं।
  • इस शोध में वैज्ञानिकों ने HTT जीन के अध्ययन में पाया कि रोगजनक हंटिंगटन प्रोटीन कोशिकाओं के ‘समग्र प्रोटीन उत्पादन’ में कमी का कारण बनता है। 
  • अध्ययन के माध्यम से प्राप्त अंतर्दृष्टि मानव में हंटिंगटन रोग को समझने में मदद करेगा। 

स्रोत: PIB


विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 21 मार्च, 2020

विश्व गौरेया दिवस 2020

प्रत्येक वर्ष 20 मार्च को दुनिया भर में विश्व गौरेया दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के आयोजन का मुख्य उद्देश्य गौरेया के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उसके संरक्षण की दिशा में कार्य करना है। ध्यातव्य है कि गौरेया की आबादी में तेज़ी से आ रही गिरावट को देखते हुए भारतीय पर्यावरणवविद् मोहम्मद दिलावर की नेचर फॉरएवर सोसायटी (Nature Forever Society) द्वारा इस दिवस की शुरुआत की गई थी। विश्व गौरेया दिवस पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया था। गौरेया भारत में पाई जाने वाली एक सामान्य चिड़िया है, किंतु बीते कुछ वर्षों में यह देश के शहरी क्षेत्रों में विलुप्ति के कगार पर है। एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में बीते 40 वर्षों में अन्य पक्षियों की संख्या में वृद्धि हुई है, किंतु गौरेया की संख्या में 60 प्रतिशत की कमी आई है। दुनिया भर में गौरैया की 26 प्रजातियाँ हैं, जबकि उनमें से 5 भारत में पाई जाती हैं।

‘वंडरचिकन’ (Wonderchicken)

जीवाश्मविज्ञानी (Palaeontologists) के एक अंतर्राष्ट्रीय समूह ने आधुनिक पक्षी के सबसे पुराने जीवाश्म की पहचान की है। खोजकर्त्ताओं ने इस जीवाश्म को ‘वंडरचिकन’ (Wonderchicken) नाम दिया है। इस जीवाश्म में पक्षी की लगभग संपूर्ण खोपड़ी शामिल है। खोजकर्त्ताओं के अनुमानों के अनुसार, यह जीवाश्म डायनासोर की समाप्ति से भी लाखों वर्ष पहले का है। खोजकर्त्ताओं का मानना है कि इस नए जीवाश्म की खोज से दुनिया भर के शोधकर्त्ताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि क्रीटेशस अवधि (Cretaceous Period) के अंत में पक्षी बड़े पैमाने पर विलुप्त होने से बच गए, जबकि विशालकाय डायनासोर ऐसा नहीं कर सके। जीवाश्म में प्राप्त खोपड़ी के विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, इसकी विभिन्न विशेषताएँ आधुनिक मुर्गी और बत्तख जैसे पक्षियों के समान हैं।

पी.के. बनर्जी

भारत के प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी प्रदीप कुमार बनर्जी का 83 वर्ष की उम्र में कोलकाता में निधन हो गया है। 23 जून, 1936 को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी शहर में जन्मे पी.के. बनर्जी को वर्ष 1961 में अर्जुन पुरस्कार और वर्ष 1990 में पद्मश्री से नवाज़ा जा चुका है। इसके अलावा पी.के. बनर्जी वर्ष 1962 में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थे, उन्होंने फाइनल मुकाबले में भारत के लिये गोल भी किया था। पी.के. बनर्जी ने अपने संपूर्ण करियर में भारत की ओर से कुल 84 मैच खेले थे, जिसमें उन्होंने कुल 65 गोल किये। इसके अलावा पी.के बनर्जी ने तीन बार एशियाई खेलों में और 2 बार ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। भारतीय फुटबॉल में पी.के. बनर्जी के योगदान की सराहना करते हुए फीफा (FIFA) ने वर्ष 2004 में अपने सौ साल पूरे होने पर उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया था। उल्लेखनीय है कि यह फीफा का सर्वोच्च सम्मान है।

‘स्वावलंबन एक्सप्रेस’

हाल ही में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (Small Industries Development Bank of India-SIDBI) ने उद्यमियों के लिये ‘स्वावलंबन एक्सप्रेस’ शुरू करने की घोषणा की है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, स्वावलंबन एक्सप्रेस 5 जून, 2020 को लखनऊ (उत्तर प्रदेश) से चलेगी और 11 उद्यमशील शहरों की यात्रा करेगी जिसमें जम्मू, दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, मुंबई, बंगलूरु, हैदराबाद, भुवनेश्वर, कोलकाता और वाराणसी शामिल हैं। स्वावलंबन एक्सप्रेस 15 दिनों में 7,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। इस दौरान कई कार्यशालाएँ और कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे, जिनका उद्देश्य युवाओं में उद्यमी संस्कृति को बढ़ावा देना है।


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