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स्कूल बंद के दौरान छात्रों के लिये खाद्य सुरक्षा भत्ता

  • 21 Mar 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

मिड-डे कार्यक्रम, COVID-19

मेन्स के लिये:

भारत में खाद्य सुरक्षा से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने सभी राज्य सरकारों से कक्षा 1 से 8 तक के सभी छात्रों के लिये मिड-डे मील (MDM) कार्यक्रम को जारी रखने या उन्हें खाद्य सुरक्षा भत्ता प्रदान करने को कहा है। 

प्रमुख बिंदु:

  • ध्यातव्य है कि केंद्र सरकार ने बीते दिनों 16 मार्च को कोरोनावायरस (COVID-19) के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से स्कूलों में देशव्यापी बंद की घोषणा की थी, वहीँ दिल्ली और केरल जैसे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों ने सरकार के इस आदेश से पूर्व ही 31 मार्च तक स्कूलों को बंद कर दिया था।
  • इसके अलावा केरल, छात्रों को उनके घर पर पहले से ही मिड-डे मील प्रदान करने की व्यवस्था कर चुका है। केरल सरकार का अनुसरण करते हुए पश्चिम बंगाल ने भी इसी प्रकार के उपाय अपनाने की घोषणा की है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस दिशा में संज्ञान लेते हुए सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर यह पूछा था कि वे किस प्रकार स्कूलों के बंद रहने के दौरान दोपहर के भोजन को सुनिश्चित करेंगे।

कारण

  • भारत सहित संपूर्ण विश्व मौजूदा समय में कोरोनावायरस (COVID-19) महामारी के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है।
  • आँकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर इस वायरस के कारण अब तक 10000 से भी अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है। भारत के संदर्भ में इस वैश्विक महामारी की बात करें तो नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, भारत में अब तक 250 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं।
  • यह वायरस वैश्विक समाज के समक्ष एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है और इससे निपटने के लिये दुनिया भर की सरकारों द्वारा तमाम कदम उठाए जा रहे हैं।
  • स्कूलों को बंद करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम की तरह देखा जा रहा है। स्कूलों में पढने वाले बच्चों को इस वायरस के प्रति काफी संवेदनशील माना जाता है, जिसके कारण उन्हें इसकी चपेट में आने से बचाना आवश्यक है।
  • हालाँकि आँकड़े बताते हैं कि देश का एक वर्ग ऐसा भी है जो आवश्यक पोषक तत्त्वों और आहार की प्राप्ति के लिये मुख्य रूप से स्कूल से मिलने वाले भोजन पर निर्भर रहता है और यदि स्कूलों को लंबे समय के लिये बंद कर दिया जाता है तो उन बच्चों के समक्ष एक बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है।

संबंधित नियम

  • मिड-डे मील (MDM) 2015 के अनुसार, यदि खाद्यान्नों की कमी, खाना पकाने की लागत, ईंधन या कुक (Cook) की अनुपलब्धता के कारण छात्रों को भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा सका है तो ऐसी स्थिति में सरकार से यह उम्मीद की जाती है कि वह प्रत्येक बच्चे को खाद्य सुरक्षा भत्ता प्रदान करेगी।

मिड-डे मील कार्यक्रम

  • मिड-डे मील कार्यक्रम को एक केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में 15 अगस्त, 1995 को पूरे देश में लागू किया गया था।
  • इसके पश्चात् सितंबर 2004 में कार्यक्रम में व्यापक परिवर्तन करते हुए मेनू आधारित पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ की गई।
  • इस योजना के तहत न्यूनतम 200 दिनों हेतु निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 300 कैलोरी ऊर्जा एवं 8-12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान है।
  • मिड-डे मील योजना में सरकारी स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों, विशेष प्रशिक्षण केंद्रों के कक्षा 1 से 8 तक में पढ़ने वाले सभी स्कूली छात्रों को शामिल किया गया है, जिनमें समग्र शिक्षा अभियान के तहत समर्थित मदरसे भी शामिल हैं।
  • आँकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देश के लगभग 9.17 करोड़ छात्र इस योजना का लाभ प्राप्त कर रहे है।

आगे की राह

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कोरोनावायरस (COVID-19) को वैश्विक महामारी घोषित कर दिया है, यह वायरस वैश्विक समुदाय के समक्ष एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है।
  • भारत सरकार द्वारा स्कूलों को बंद करने और इस दौरान छात्रों के लिये मिड-डे मील योजना को जारी रखने अथवा खाद्यान्न भत्ता प्रदान करने का निर्णय सराहनीय है।
  • आवश्यक है कि वैश्विक समुदाय इस महामारी से निपटने के लिये एक साथ एक मंच पर एकत्रित हो और इस संदर्भ में WHO तथा प्रशासन द्वारा जारी विभिन्न दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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