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यूपीएससी 2021 में लड़कियों ने फहराया जीत का परचम।

सिविल सेवा परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों की सूची में शुरू के 25 स्थानों में 10 लड़कियाँ शामिल हैं। आइये जानें, क्या है टॉपर्स की सफलता का मूल मंत्र 

हम उस देश में रहते हैं जहाँ अधिकांश घरों में लड़कियों के पैदा होने पर शोक की लहर दौड़ जाती है; जहाँ बेटों की चाह में बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है; जहाँ स्त्रियों को हमेंशा से उपेक्षित और दयनीय समझा जाता रहा है। ऐसे सभी परिवारों को, जो आज के समय में भी अपनी संकीर्ण मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाये हैं और बेटियों को बोझ समझते हैं, उन्हें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा जारी सिविल सेवा परीक्षा 2021 के परिणाम पर ज़रूर गौर करना चाहिये। देश की सबसे बड़ी परीक्षा में शुरू के तीन स्थानों पर लड़कियों का दबदबा रहा है। लाखों अभ्यर्थियों को पीछे छोड़कर श्रुति शर्मा ने पहले स्थान पर,अंकिता अग्रवाल ने दूसरे स्थान पर और गामिनी सिंगला ने तीसरे स्थान पर अपना कब्ज़ा जमाया है। तो चलिये आपको बताते हैं इन टॉपर्स की यूपीएससी की यात्रा से जुड़े किस्सों और भविष्य की योजनाओं के बारे में।

श्रुति शर्मा

उत्तर प्रदेश के बिजनौर की रहने वाली श्रुति शर्मा ने सिविल सेवा 2021 की परीक्षा में पहली रैंक हासिल की है। उन्हें यह सफलता दूसरे प्रयास में मिली है। श्रुति को इतिहास विषय में शुरू से ही रुचि रही है इसलिये उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में इतिहास चुना था। वह यूपी कैडर में काम करना चाहती हैं। अपना पदभार संभालने के बाद वह शिक्षा,महिला सशक्तीकरण और अपने क्षेत्र से संबंधित अन्य गंभीर समस्याओं पर काम करना चाहती हैं।

सिविल सेवा परीक्षा में प्राप्त अंक:  श्रुति को लिखित परीक्षा में 932 और साक्षात्कार में 173 अंक मिले हैं। इस प्रकार उन्होंने कुल 2025 अंकों में से 1105 अंक प्राप्त किये हैं।

परीक्षा का माध्यम-  अंग्रेज़ी

शैक्षिक पृष्ठभूमि:  श्रुति की पूरी पढ़ाई दिल्ली में हुई है। उन्होंने 12वीं कक्षा कला वर्ग से पास की है; इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। स्नातक पूरा होने के बाद, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में दाखिला लिया, लेकिन यूपीएससी के चलते उन्होंने पाठ्यक्रम पूरा किये बिना ही JNU छोड़ दिया। उन्होंने स्नातक के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने के बारे में सोचा। श्रुति ने ज़ामिया मिलिया इस्लामिया की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (आरसीए) से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की थी। श्रुति के मुताबिक, उन्हें पहले प्रयास में मुख्य परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला था, लेकिन एक अंक से साक्षात्कार के लिये चूक गई थीं।  

पारिवारिक पृष्ठभूमि: श्रुति के पिता वास्तुकार (Architect) हैं और माँ अध्यापिका रह चुकी हैं।

रुचि: श्रुति को कविताएँ पढ़ना, मूवीज़ देखना और योग करना बहुत पसंद है।

रणनीति: श्रुति ने अपने आधार को मज़बूत करने के लिये NCERT और अन्य बेसिक किताबें पढ़ी थीं। इसके अलावा, उन्होंने महत्तवपूर्ण टॉपिक्स के नोट्स बनाकर तैयारी की जिससे मुख्य परीक्षा में बहुत मदद मिली। उनका कहना है कि, पढ़ाई के घंटे गिनने की बजाय गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देना चाहिये; ज़्यादा से ज़्यादा घंटे पढ़ने की बज़ाय कम घंटों में पूरे ध्यान से की गई पढ़ाई अधिक लाभदायक है।

सफलता का मंत्र: श्रुति का कहना है कि, अपने आस-पास उन्हीं लोगों को रखें जो आपको मानसिक सहारा दे सकें, न कि ऐसे लोगों को, जो आपको हतोत्साहित करें। अपनी रुचि के अनुसार ही वैकल्पिक विषय चुनें। एक सही रणनीति बनाकर तैयारी शुरू करें; सीमित मात्रा में अध्ययन सामग्री रखें; समय-समय पर रिवीज़न और उत्तर लेखन अभ्यास करें। साथ ही, मॉक टेस्ट के जरिये अपना मूल्यांकन करें।

अंकिता अग्रवाल

सिविल सेवा परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल करने वाली अंकिता अग्रवाल मूल रूप से बिहार के मधेपुरा की रहने वाली हैं, लेकिन वर्तमान में उनका परिवार कोलकाता में रहता है। अंकिता ने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। हालांकि साल 2019 में, उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा में 236वीं रैंक हासिल की थी।

वर्तमान में वह IRS अधिकारी हैं। अंकिता को अपने पहले प्रयास में ही IRS का पद मिला था, लेकिन वह IAS बनना चाहती थीं इसलिये वह लगातार मेहनत करती रहीं और तीसरे प्रयास में उन्होंने अपना परचम लहरा दिया। उनका वैकल्पिक विषय राजनीति विज्ञान और अंतर्राष्ट्रीय संबंध था। अंकिता अपने होम कैडर पश्चिम बंगाल से अपने काम की शुरुआत करना चाहती हैं। पदभार ग्रहण करने के बाद वह गरीबी, बेरोज़गारी और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं पर काम करना चाहती हैं।

सिविल सेवा परीक्षा में प्राप्त अंक: अंकिता अग्रवाल ने लिखित परीक्षा में 871 और साक्षात्कार में 179 अंक प्राप्त किये हैं। इस प्रकार उन्हें कुल 2025 अंकों में से 1050 अंक मिले हैं।

शैक्षिक पृष्ठभूमि: अंकिता की प्रारंभिक शिक्षा बिहारीगंज में हुई है। इसके बाद उनका परिवार कोलकाता में रहने लगा। उन्होंने कोलकाता के दिल्ली पब्लिक स्कूल से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र (ऑनर्स) में स्नातक किया है। साल 2017 में स्नातक पास करने के बाद अंकिता ने निजी क्षेत्र की कंपनी में काम किया। एक साल काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने दिल्ली में रहकर ही यूपीएससी की तैयारी की है।

पारिवारिक पृष्ठभूमि- अंकिता के पिता हार्डवेयर व्यवसायी हैं।

रुचि: अंकिता को किताबें पढ़ने और बास्केटबॉल खेलने का शौक है।

रणनीति: सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान अंकिता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से दूरी बना ली थी क्योंकि इससे उनका ध्यान भटकता था। उन्होंने कंप्यूटर पर अपने नोट्स बनाये और बिना भटकाव के नियमित पढ़ाई करती रहीं।

सफलता का मंत्र: अंकिता का कहना है कि, अपनी क्षमता के अनुसार योजनाएँ बनायें और उनका अनुसरण करें। खुद से प्रेरित रहें और नियमित पढ़ाई करें।

गामिनी सिंगला

देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा (भारतीय सिविल सेवा) में ऑल इंडिया तीसरी रैंक लाने वाली गामिनी सिंगला चंडीगढ़ की निवासी हैं। गामिनी ने दूसरे प्रयास में यह सफलता अर्जित की है। उन्होंने वैकल्पिक विषय के तौर पर सामाजिक विज्ञान चुना था। प्रशासनिक पदभार संभालने के बाद गामिनी देश के विकास और लोगों के कल्याण के लिये काम करना चाहती हैं।

सिविल सेवा परीक्षा में प्राप्त अंक:  गामिनी ने लिखित परीक्षा में 858 और साक्षात्कार में 187 अंक प्राप्त किये हैं। इस प्रकार उन्हें कुल 2025 अंकों में से 1045 अंक मिले हैं।

शैक्षिक पृष्ठभूमि: गामिनी सिंगला ने चंडीगढ़ के पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में स्नातक किया है। साल 2019 में स्नातक पूरा करने के बाद उन्हें जेपी मॉर्गन में नौकरी का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिये इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। तैयारी के दौरान उन्होंने कोचिंग की बज़ाय खुद से पढ़ाई (Self Study) को अधिक प्राथमिकता दी।

पारिवारिक पृष्ठभूमि:  गामिनी सिंगला के माता-पिता (दोनों) हिमाचल प्रदेश सरकार में चिकित्सा अधिकारी हैं।

रणनीति:  गामिनी प्रतिदिन 9 से10 घंटे पढ़ाई करती थीं। गामिनी के मुताबिक, उन्होंने पहले प्रयास में जो गलतियां की थीं उन्हें सुधारकर आगे बढ़ीं। इसके अलावा, रिवीज़न, मॉक टेस्ट, पिछले सालों के पेपर और मुख्य परीक्षा के लिये नियमित उत्तर लेखन का अभ्यास करती थीं।

सफलता का मंत्र- गामिनी का कहना है कि, खुद पर भरोसा रखें और हार न मानें। साथ ही, अपनी गलतियों को पहचानें और उन्हें सुधारकर आगे बढ़ें।

सिविल सेवा परीक्षा 2021 में कुल 685 उम्मीदवारों का चयन किया गया है जिसमें 177 लड़कियाँ हैं। इतना ही नहीं, शुरू के 25 स्थानों में 10 लड़कियाँ शामिल हैं।

तो ये हैं हमारे देश की बेटियाँ, जिन्होंने उन सभी लोगों को गलत साबित कर दिया जो स्त्रियों को कमज़ोर समझते हैं। जिन स्त्रियों को नाकाबिल समझकर शुरू से ही घर की चार दीवारी में कैद करके रखा गया था, आज वे देश के प्रशासन की बागडोर संभाल रहीं हैं। यहीं नहीं, हर क्षेत्र में महिलायें आगे बढ़ रहीं हैं। वे सेना में शामिल होकर कंधों पर बंदूक थामती हैं; पायलट बनकर विमान उड़ाती है; खेलों में स्वर्ण पदक लाती हैं और संसद में बैठकर देश के लिये नीतियाँ भी बनाती हैं। मेहनत और लगन से सब कुछ संभव है। उम्मीद है कि आने वाले समय में लड़कियाँ ऐसे ही अपना परचम लहराती रहेंगी।

शालिनी बाजपेयी

"शालिनी ने 2018-19 में आईआईएमसी, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया है। साहित्य और  लेखन इनकी हमेशा से रुचि रही है इसीलिए यह लेखन के क्षेत्र में ही अपने करियर को एक नई उड़ान देना चाहती हैं।"

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