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भारतीय इतिहास

भारतीय चित्रकला भाग- 4

  • 11 Mar 2019
  • 4 min read

मुगलकालीन चित्रकला

  • चित्रकला की मुगल शैली की शुरुआत सम्राट अकबर के शासनकाल में 1560 ई. में हुई।
  • मुगल शैली का विकास चित्रकला की स्वदेशी भारतीय शैली और फारसी चित्रकला की सफाविद् शैली के उचित संश्लेषण से हुआ।
  • प्रकृति के घनिष्ठ अवलोकन और उत्तम तथा कोमल आरेखन पर आधारित सुनम्य प्रकृतिवाद मुगल शैली की एक विशेषता है।

अकबरकालीन चित्रकला

  • इस शैली में प्रयुक्त रंग चमकदार हैं।
  • इसमें चेहरे के एक तरफ का हिस्सा ही चित्रित किया जाता था जिसमें आँखें मछली की तरह बनाई जाती थीं।
  • चित्र अलंकारिक न होकर व्यक्तियों या शबीहों के तथा घटना प्रधान हैं।
  • अकबरकालीन प्रमुख चित्र हैं- हमज़ानामा, अनवर-सुहावली, गुलिस्तां-ए-दीवान, आमिर शाही की दीवान, रज़्मनामा (महाभारत का फारसी अनुवाद), दराबनाम, अकबरनामा आदि।
  • अकबरकालीन प्रसिद्ध चित्रकार हैं- दसवंत, मिसकिन, नन्हा, बसावन, मनोहर, दौलत, मंसूर, केसू, भीम गुजराती, धर्मदास, मधु, सूरदास, लाल, शंकर, गोवर्धन और इनायत।

बाबर के समकालीन प्रसिद्ध ईरानी चित्रकार बेहजाद था।

हुमायूँ के दरबार में दो प्रसिद्ध ईरानी चित्रकार थे- अब्दुस्समद और मीर सैयद अली।

जहाँगीरकालीन चित्रकला

  • जहाँगीर के अधीन मुगल चित्रकला ने अधिकाधिक आकर्षण, परिष्कार एवं गरिमा प्राप्त की।
  • चित्रकला में रूढ़ियों के स्थान पर वास्तविकता के दर्शन होते हैं; संभवत: ऐसा बढ़ते हुए यूरोपीय प्रभाव के कारण हुआ।
  • इस काल में प्रकृति का अधिक सजीव और बारीक चित्रण किया गया है। पशु, पक्षी, पूलों, वनस्पतियों का बेहद सुंदर चित्रांकन किया गया है।
  • एक छोटे आकार के चित्र (मिनेयेचर) बनाने की परंपरा की शुरुआत हुई।
  • इस युग के विशिष्ट उदाहरण हैं- ‘अयार-ए- दानिश’ (पशुओं के किस्से-कहानी की पुस्तक) ‘गुलिस्तां’ (कुछ लघु चित्रकलाएँ,) ‘हाफिज़ का दीवान’ तथा ‘अनवर-ए-सुहावली’ आदि।
  • वर्जिन मैरी को अपने हाथ में पकड़े जहाँगीर का लघु चित्र (मिनेयेचर) प्रमुख है।
  • जहाँगीर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकार हैं- अकारिज़ा, आबुल हसन, मंसूर, बिशन दास, मनोहर, गोवर्धन, बालचंद, दौलत, मुखलिस, भीम और इनायत।

शाहजहाँकालीन चित्रकला

  • शाहजहाँ के अधीन मुगल चित्रकला ने अपने अच्छे स्तर को बनाए रखा तथा यह परिपक्व भी हुई।
  • इस काल के चित्रों के विषयों में यवन सुंदरियाँ, रंगमहल, विलासी जीवन और ईसाई धर्म शामिल हुए।
  • इस काल में स्याह कलम चित्र बने जिसे कागज पर फिटकिरी और सरेस आदि के मिश्रण से तैयार किया जाता था।
  • इनकी खासियत, बारीकियों का चित्रण था, जैसे- दाढ़ी का एक-एक बाल दिखना, रंगों को हल्की घुलन के साथ लगाना।
  • शाहजहाँकालीन जाने-माने कलाकार हैं- विचित्र, चैतरमन, अनुप चत्तर, समरकंद का मोहम्मद नादिर, इनायत और मकर।
  • औरंगज़ेब अति धर्मनिष्ठ व्यक्ति था, अत: इस दौर में मुगल चित्रकला में गिरावट आई और इसकी पूर्ववर्ती गुणवत्ता कहीं विलुप्त हो गई। राजदरबार के अधिकतम चित्रकार प्रांतीय राजदरबारों में चले गए।
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