उत्तर प्रदेश Switch to English
उत्तर प्रदेश में प्रथम राज्य स्तरीय ब्रेल पुस्तकालय
चर्चा में क्यों?
उत्तर प्रदेश ने लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (DSMNRU) में अपने पहले राज्य स्तरीय ब्रेल पुस्तकालय का उद्घाटन किया।
मुख्य बिंदु
- कार्यक्रम: इस पुस्तकालय का उद्घाटन ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल की जयंती पर किया गया।
- स्थान: ब्रेल पुस्तकालय विश्वविद्यालय परिसर में स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय की पहली मंजिल पर स्थित है।
- पुस्तक संग्रह: इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप 54 स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को समाहित करने वाली 4,000 से अधिक ब्रेल पुस्तकें रखी गई हैं।
- समावेशी पहुँच: विश्वविद्यालय के बाहर के दृष्टिबाधित छात्र भी पुस्तकालय के संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।
- महत्त्व: यह उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा के प्रयासों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
- विस्तार योजनाएँ: एक वर्ष के भीतर संग्रह को 10,000 ब्रेल पुस्तकों तक विस्तारित करने की योजनाएँ बनाई जा रही हैं।
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
पिपरावा के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन
चर्चा में क्यों?
भारत ने नई दिल्ली में भगवान बुद्ध के पवित्र पिपरावा अवशेषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जिसमें देश की बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक धरोहर को प्रदर्शित किया गया।
मुख्य बिंदु
- शीर्षक: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “प्रकाश और कमल: जागृत व्यक्ति के अवशेष” शीर्षक वाली इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
- अवशेषों का महत्त्व: ये पवित्र अवशेष 125 वर्षों के बाद यूनाइटेड किंगडम से भारत वापस लाए गए।
- आयोजन स्थल: प्रदर्शनी ऐतिहासिक राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
- खोज: पिपरावा के अवशेष वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरावा गाँव में स्थित एक बौद्ध स्तूप से उत्खनन के दौरान प्राप्त किये गए थे।
- बौद्ध संबंध: बौद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर संरक्षित करने के भारत के प्रयास थाईलैंड, वियतनाम, मंगोलिया और रूस जैसे देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय श्रद्धालु आकर्षित होते हैं।
- शास्त्रीय भाषा: बुद्ध की शिक्षाएँ मूल रूप से पाली भाषा में थीं और भारत पाली को वर्ष 2024 में शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता देते हुए वैश्विक स्तर पर इसको बढ़ावा दे रहा है।
- महत्त्व: यह प्रदर्शनी बौद्ध विरासत के संरक्षक के रूप में भारत की भूमिका को सशक्त करती है और शांति, सद्भाव तथा वैश्विक सांस्कृतिक एकता को प्रोत्साहित करती है।
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