मध्य प्रदेश Switch to English
खजुराहो नृत्य महोत्सव 2026
चर्चा में क्यों?
भारत के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों में से एक, शास्त्रीय नृत्य परंपराओं के उत्सव के रूप में आयोजित होने वाला खजुराहो नृत्य महोत्सव फरवरी 2026 में मध्य प्रदेश के खजुराहो स्मारक समूह में आयोजित किया गया।
मुख्य बिंदु:
- उत्सव: खजुराहो नृत्य उत्सव एक वार्षिक सांस्कृतिक आयोजन है, जो मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले में स्थित खजुराहो के ऐतिहासिक मंदिरों की पृष्ठभूमि में भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं का प्रदर्शन करता है।
- अवधि: यह सात-दिवसीय उत्सव है, जिसमें संपूर्ण भारत से प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य कलाकारों द्वारा प्रतिदिन सायंकालीन प्रस्तुतियाँ दी जाती हैं।
- ये प्रस्तुतियाँ चित्रगुप्त मंदिर और विश्वनाथ मंदिर परिसर में आयोजित होती हैं, जो खजुराहो समूह के मंदिरों का हिस्सा हैं तथा यूनेस्को विश्व विरासत स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।
- नृत्य शैलियाँ: इस उत्सव में भारत की प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों जैसे कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मणिपुरी और कथकली का प्रदर्शन किया जाता है, जिनका प्रदर्शन अग्रणी कलाकारों और उभरती प्रतिभाओं द्वारा किया जाता है।
- आयोजक संस्था: यह महोत्सव मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उस्ताद अलाउद्दीन खान संगीत एवं कला अकादमी जैसे सांस्कृतिक संस्थानों के माध्यम से राज्य के पर्यटन और संस्कृति विभागों के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
- आरंभ: खजुराहो नृत्य उत्सव की शुरुआत वर्ष 1975 में भारत की शास्त्रीय नृत्य विरासत को प्रोत्साहित करने तथा खजुराहो मंदिरों के कलात्मक महत्त्व को उजागर करने के उद्देश्य से की गई थी।
- महत्त्व: यह उत्सव भारत की शास्त्रीय नृत्य परंपराओं, सांस्कृतिक पर्यटन तथा विरासत संरक्षण को बढ़ावा देता है। साथ ही यह मंदिर वास्तुकला और प्रदर्शन कला के बीच कलात्मक संबंध को भी रेखांकित करता है।
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और पढ़ें: खजुराहो नृत्य महोत्सव 2025, यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, कथकली |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
रवि शंकर प्रसाद लोकसभा विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष
चर्चा में क्यों?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के लिये संसद के 15 सदस्यों को मनोनीत किया, जिसका कार्यकाल 3 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गया है।
मुख्य बिंदु:
- अध्यक्ष: पटना साहिब से लोकसभा सांसद रवि शंकर प्रसाद को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
- विशेषाधिकार समिति संसद के विशेषाधिकारों के उल्लंघन या सदन की अवमानना से संबंधित मामलों की जाँच करती है तथा उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश करती है।
- इस समिति को शिकायतों की जाँच करने, व्यक्तियों को तलब करने, आवश्यक दस्तावेज़ मांगने तथा जाँच-पड़ताल करने का अधिकार भी प्राप्त है। जाँच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
- उद्देश्य: यह समिति संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों की रक्षा करती है, जिससे सांसद बिना किसी बाधा या भय के अपने विधायी कर्त्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
- भारत में संसदीय विशेषाधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत प्रदान किये गए हैं, जो संसद और उसके सदस्यों को कुछ शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान करता है।
- विशेषाधिकार का उल्लंघन: यह तब माना जाता है जब सांसदों के कार्यों में बाधा, धमकी या हस्तक्षेप किया जाए अथवा सदन के अधिकार को प्रभावित किया जाए।
- जाँच के बाद समिति अपनी सिफारिशें अध्यक्ष या सदन को प्रस्तुत करती है, जिनमें उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार चेतावनी, फटकार या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल हो सकती है।
- महत्त्व: यह समिति संसद की गरिमा, अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा विधायी व्यवस्था के भीतर अनुशासन बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
| और पढ़ें: संसदीय विशेषाधिकार, भारत का संविधान, लोकसभा अध्यक्ष, विशेषाधिकार समिति |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
अलेक्ज़ेंडर स्टब रायसीना संवाद 2026 में मुख्य अतिथि
चर्चा में क्यों?
भारत ने नई दिल्ली में रायसीना संवाद 2026 के 11वें संस्करण की मेज़बानी की, जिसमें फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्य बिंदु:
- मुख्य अतिथि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब ने मार्च 2026 में भारत का दौरा किया ।
- फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में पदभार सॅंभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा थी।
- रायसीना संवाद: रायसीना संवाद भारत का प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है, जो भू-राजनीति (Geopolitics) और भू-अर्थशास्त्र (Geo-economics) से संबंधित विषयों पर आयोजित किया जाता है। इसमें वैश्विक नेता, नीति-निर्माता तथा विशेषज्ञ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।
- इस संवाद का आयोजन ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) द्वारा भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है।
- विषय: संवाद का 2026 संस्करण मार्च 2026 में ‘संस्कार: अभिकथन, समायोजन, उन्नति’ विषय के साथ आयोजित किया गया था।
- उद्देश्य: डिजिटलीकरण, सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में भारत-फिनलैंड सहयोग को सशक्त करना।
- महत्त्व: रायसीना संवाद में भागीदारी और इस यात्रा ने भारत-फिनलैंड के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया तथा वैश्विक भू-राजनीतिक विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका को भी उजागर किया।
| और पढ़ें: रायसीना संवाद 2025, भारत-फिनलैंड सहयोग |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
9 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों के पदस्थापन में परिवर्तन (मार्च 2026) को राष्ट्रपति की स्वीकृति
चर्चा में क्यों?
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदस्थापन में परिवर्तन को स्वीकृति प्रदान की।
मुख्य बिंदु:
- पदस्थापन में परिवर्तन:
- राष्ट्रपति भवन ने दिल्ली, लद्दाख, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और नागालैंड सहित नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदों में परिवर्तन की घोषणा की है।
- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस का त्याग-पत्र राष्ट्रपति द्वारा नए नियुक्तियों की घोषणा से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था।
- राष्ट्रपति भवन ने दिल्ली, लद्दाख, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और नागालैंड सहित नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदों में परिवर्तन की घोषणा की है।
- प्रमुख नियुक्तियाँ:
- आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया (इससे पहले वे तमिलनाडु के राज्यपाल थे)।
- शिव प्रताप शुक्ला तेलंगाना के राज्यपाल नियुक्त किये गए।
- जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- नंद किशोर यादव नागालैंड के राज्यपाल नियुक्त किये गए।
- सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- अतिरिक्त परिवर्तन:
- केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
- लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्तियाँ:
- दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया तथा पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।
- कार्यान्वयन:
- ये नियुक्तियाँ संबंधित नियुक्त व्यक्तियों द्वारा अपने कार्यालयों का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी।
- महत्त्व:
- इस प्रकार के परिवर्तन से अनुभवी प्रशासकों तथा राजनीतिक नेतृत्व को महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्त कर शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाता है, साथ ही केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
| और पढ़ें: राज्यपाल , उपराज्यपाल |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
जनगणना 2027 के शुभंकर 'प्रगति' और 'विकास' का अनावरण
चर्चा में क्यों?
अमित शाह ने हाल ही में जनगणना 2027 के लिये आधिकारिक शुभंकर ‘प्रगति’ (महिला) और ‘विकास’ (पुरुष) का अनावरण किया। इसके साथ ही भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना प्रक्रिया को समर्थन देने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किये गए।
मुख्य बिंदु:
- प्रतीक: प्रगति और विकास नामक शुभंकर जनगणना 2027 के जनसंचार प्रतीकों के रूप में कार्य करेंगे, जो नागरिकों के अनुकूल तरीके से जनगणना के बारे में जानकारी प्रसारित करने में मदद करेंगे।
- समानता का प्रतिनिधित्व: ये राष्ट्र निर्माण में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का प्रतीक हैं तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के अनुरूप हैं।
- उद्देश्य: इन्हें ‘हितैषी जन राजदूत (Friendly Public Ambassadors)’ के रूप में तैयार किया गया है, ताकि जनगणना की प्रक्रिया को अधिक सहज, सहभागितापूर्ण तथा नागरिक-केंद्रित बनाया जा सके।
- भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना: जनगणना 2027 भारत के इतिहास में पहली डिजिटल जनगणना होगी।
- डेटा संग्रह की प्रक्रिया परंपरागत कागज़-आधारित विधियों के स्थान पर सुरक्षित मोबाइल एप्लीकेशन एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपन्न की जाएगी।
- स्व-गणना (Self-Enumeration) की शुरुआत: नागरिकों को स्व-गणना (SE) पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार से संबंधित जानकारी ऑनलाइन प्रस्तुत करने का विकल्प दिया जाएगा।
- जानकारी प्रस्तुत करने के बाद परिवारों को एक स्व-गणना ID प्राप्त होगी, जिसका सत्यापन फील्ड दौरे के दौरान गणनाकर्त्ता (Enumerators) द्वारा किया जाएगा।
- जाति गणना: वर्ष 1931 के बाद पहली बार दशकीय जनगणना में सभी समुदायों की व्यापक जाति गणना शामिल की जाएगी।
- कानूनी आधार: यह जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियम, 1990 के अंतर्गत आयोजित की जाती है।
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और पढ़ें: जनगणना अधिनियम, 1948 |
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