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उत्तराखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 11 Feb 2026
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उत्तराखंड में शारदा नदी कॉरिडोर

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत ज़िले के टनकपुर में शारदा नदी कॉरिडोर की आधारशिला रखी।

मुख्य बिंदु:

  • स्थान: यह परियोजना उत्तराखंड के चंपावत ज़िले में टनकपुर के पास शारदा (महाकाली/काली) नदी के किनारे स्थित है।
    • शारदा नदी कॉरिडोर के लिये कुल प्रस्तावित निवेश लगभग ₹3,300 करोड़ है।
  • शारदा घाट पुनर्विकास: इस परियोजना में शारदा घाट का पुनर्विकास शामिल है, ताकि नदी तट की अवसंरचना और सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार किया जा सके।
    • इसमें टनकपुर के ड्रेनेज सिस्टम का विकास, बहुमंज़िला पार्किंग का निर्माण तथा नागरिक सुविधाओं और संपर्क को बेहतर बनाने के लिये चूका में एक हेलीपैड का निर्माण भी शामिल है।
  • पर्यटन: योजनाओं में शारदा नदी में रिवर राफ्टिंग और पैराग्लाइडिंग सुविधाओं का विकास शामिल है, ताकि साहसिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।
    • यह कॉरिडोर पूर्णागिरी मंदिर और आसपास के पवित्र स्थलों से जुड़े तीर्थ पर्यटन को सुदृढ़ करने का भी लक्ष्य रखता है।
    • सरकार तीन महीने तक चलने वाले पूर्णागिरी मेले को साल भर चलने वाले पर्यटन आकर्षण में बदलने का इरादा रखती है।
  • उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य पर्यटन-आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, रोज़गार के अवसर सृजित करना और क्षेत्रीय अवसंरचना में सुधार करना है।
  • महत्त्व: यह परियोजना उत्तराखंड में क्षेत्रीय विकास, पर्यटन विविधीकरण और स्थानीय आजीविकाओं को समर्थन देने वाला एक एकीकृत नदी-गलियारा विकास मॉडल प्रस्तुत करती है।

और पढ़ें: शारदा नदी, पर्यटन


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जर्मनी में BIOFACH 2026 में भारत को ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ चुना गया

चर्चा में क्यों?

भारत को फरवरी 2026 में जर्मनी के नूर्नबर्ग में आयोजित होने वाले जैविक उत्पादों के विश्व के अग्रणी व्यापार मेले BIOFACH 2026 में ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ (Country of the Year) का प्रतिष्ठित खिताब प्रदान किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • कार्यक्रम: BIOFACH 2026 जर्मनी में आयोजित होने वाला जैविक उत्पादों का विश्व का सबसे बड़ा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला है।
    • भारत को वैश्विक मंच पर अपनी जैविक कृषि की ताकत और निर्यात क्षमता को मान्यता देते हुए आधिकारिक रूप से ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ घोषित किया गया है।
  • आयोजन प्राधिकरण: भारत की भागीदारी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) द्वारा आयोजित की जा रही है।
    • पैन-इंडिया प्रतिनिधित्व: 20 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रदर्शक भाग ले रहे हैं, जो भारत की कृषि तथा क्षेत्रीय विविधता को प्रदर्शित करते हैं।
    • उत्पाद: यहाँ चावल, तिलहन, दलहन, मसाले, जड़ी-बूटियाँ, काजू, अदरक, हल्दी, बड़ी इलायची, दालचीनी, आम प्यूरी, आवश्यक तेल तथा अन्य मूल्यवर्द्धित जैविक उत्पादों की विस्तृत शृंखला प्रदर्शित की जा रही है।
  • निर्यात प्रोत्साहन: यह आयोजन भारतीय जैविक निर्यातकों को वैश्विक खरीदारों से जुड़ने, बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने और वैश्विक जैविक बाज़ार में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिये एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच प्रदान करता है।
  • महत्त्व: BIOFACH में ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ के रूप में भारत की पहचान उसकी जैविक कृषि में नेतृत्व भूमिका, बढ़ते निर्यात प्रभाव और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संधारणीय कृषि पद्धतियों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

और पढ़ें: APEDA, कृषि, संधारणीय कृषि पद्धतियाँ 


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विशाखापत्तनम में ऐतिहासिक समुद्री संगम

चर्चा में क्यों?

पहली बार भारत एक साथ तीन प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय समुद्री आयोजनों—अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा (International Fleet Review–IFR) 2026, अभ्यास मिलन 2026 और हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (IONS) के नौसेना प्रमुखों के सम्मेलन का आयोजन कर रहा है।

मुख्य बिंदु:

  • स्थल: विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश — भारत की पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय और एक रणनीतिक समुद्री प्रवेश द्वार।
  • मुख्य आयोजन: यह पहली बार होगा जब भारत इन तीनों प्रमुख समुद्री आयोजनों की मेज़बानी एक साथ कर रहा है।
  • IFR 2026: 18 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू युद्धपोतों के एक विशाल बेड़े की समीक्षा करेंगी, जिसमें INS विक्रांत जैसे पोतों के साथ भारत की ‘बिल्डर नेवी’ को प्रदर्शित किया जाएगा।
  • अभ्यास मिलन 2026: मिलन भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास है, जिसमें पेशेवर आदान-प्रदान, सामरिक अभ्यास और संयुक्त समुद्री अभियानों को शामिल किया जाता है।
  • IONS सम्मेलन: भारत वर्ष 2025–2027 की अवधि के लिये अध्यक्षता सॅंभाल रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा के लिये 25 से अधिक देशों की मेज़बानी कर रहा है।
  • भागीदारी: 50-70 से अधिक देशों के युद्धपोतों और विमानों के भाग लेने की उम्मीद है, जो प्रमुख समुद्री शक्तियों तथा क्षेत्रीय साझेदारों का प्रतिनिधित्व करेंगे।
  • वैश्विक उपस्थिति: संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, श्रीलंका, ईरान, यूनाइटेड किंगडम, यूएई, दक्षिण अफ्रीका सहित कई देश इसमें भाग लेंगे, जो व्यापक कूटनीतिक सहभागिता को दर्शाता है।

और पढ़ें: अभ्यास मिलन, हिंद महासागर नौसैनिक संगोष्ठी


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