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आंध्र प्रदेश में भारत का पहला स्वदेशी हरित यूरिया संयंत्र
चर्चा में क्यों?
भारत का पहला बड़े पैमाने पर स्वदेशी हरित यूरिया संयंत्र आंध्र प्रदेश के पुडीमडका ग्रीन हाइड्रोजन हब में विकसित किया जाएगा और चालू किया जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक समझौता ज्ञापन (MoU): NTPC ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NGEL), जो NTPC लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है और असागो इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड के बीच एक MoU पर हस्ताक्षर किये गए हैं।
- समझौते के तहत, NGEL असागो को हरित अमोनिया, नवीकरणीय विद्युत, CO₂ तथा अन्य उपयोगिताएँ उपलब्ध कराएगा।
- उद्देश्य: हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करके हरित यूरिया का उत्पादन करना, जिससे जीवाश्म ईंधन आधारित अमोनिया पर निर्भरता कम होगी।
- यह पहल घरेलू हरित यूरिया मूल्य शृंखला के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जिससे आयातित उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी।
- इसका लक्ष्य रोज़गार सृजन करना, हरित ऊर्जा क्षेत्र को मज़बूत करना और आंध्र प्रदेश के औद्योगिक विकास में योगदान देना है।
- पर्यावरणीय प्रभाव: पारंपरिक यूरिया संयंत्रों की तुलना में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
- यह भारत के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य और राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति के अंतर्गत ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को समर्थन देता है।
- नवाचार: भारत में पहली बार विकसित की जा रही स्वदेशी हरित यूरिया तकनीक, जो उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी।
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और पढ़ें: नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, NTPC, हरित अमोनिया |
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प्लास्टइंडिया 2026 नई दिल्ली में शुरू हुआ
चर्चा में क्यों?
प्लास्टइंडिया 2026, जो विश्व की सबसे बड़ी प्लास्टिक प्रदर्शनियों में से एक है, फरवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में शुरू हुई।
मुख्य बिंदु:
- कार्यक्रम: यह प्लास्टिक उद्योग के त्रिवार्षिक (हर तीन वर्ष में आयोजित होने वाले) मेगा आयोजन प्लास्टइंडिया 2026 का 12वाँ संस्करण है।
- यह आयोजन पाँच रणनीतिक स्तंभों व्यापार, प्रौद्योगिकी, प्रतिभा, परंपरा और पर्यटन पर आधारित है, जो उद्योग की वृद्धि, नवाचार, कौशल विकास तथा सांस्कृतिक एकीकरण पर ज़ोर देता है।
- आयोजक: रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (DCPC), रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय द्वारा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय के सहयोग से।
- थीम: प्लास्टइंडिया 2026 का आयोजन ‘भारत नेक्स्ट’ थीम के अंतर्गत किया जा रहा है।
- यह प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य घरेलू प्लास्टिक उद्योग तथा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है।
- सततता पर ज़ोर: पहली बार इसे शून्य अपशिष्ट प्रदर्शनी (Zero Waste Exhibition) के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न सभी ठोस अपशिष्टों का पृथक्करण, पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।
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और पढ़ें: आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत, MSME |
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केरल के सीएम ने इनवेसिव स्पीशीज़ डिटेक्शन ऐप लॉन्च किया
चर्चा में क्यों?
केरल ने पूरे राज्य में आक्रामक पौधों की प्रजातियों की पहचान और निगरानी के लिये विकसित AI-संचालित मोबाइल एप्लीकेशन NeophyteID को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया है।
मुख्य बिंदु:
- लॉन्च और विकासकर्त्ता: यह ऐप 2 फरवरी, 2026 को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया। इसे मालाबार बॉटनिकल गार्डन एंड इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट साइंसेज़ (MBGIPS) ने विकसित किया है।
- AI तकनीक: YOLOv11 मशीन लर्निंग मॉडल का उपयोग करते हुए यह उपकरण केरल में लगभग 98 आक्रामक प्रजातियों की वास्तविक-समय पहचान और भू-स्थानिक (जियोस्पैशियल) ट्रैकिंग प्रदान करता है।
- कार्यप्रणाली और पहुँच: उपयोगकर्त्ता पौधों की तस्वीर खींचकर अंग्रेज़ी और मलयालम दोनों भाषाओं में त्वरित, डेटा-आधारित पहचान प्राप्त कर सकते हैं।
- पारिस्थितिक प्रभाव: NeophyteID का लक्ष्य उन्मूलन अभियानों के समय देशी पौधों को होने वाली क्षति से बचाना है।
- डेटा-आधारित संरक्षण: AI और भू-स्थानिक ट्रैकिंग का उपयोग शोधकर्त्ताओं को आक्रामक प्रजातियों के वितरण पैटर्न पर समृद्ध आँकड़े उपलब्ध कराता है, जो हटाने और पुनर्स्थापन रणनीतियों की योजना बनाने के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं।

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