मध्य प्रदेश Switch to English
सांसद ने पहले राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 का उद्घाटन किया
चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव–2026 का उद्घाटन किया। यह एक अनूठा खेल आयोजन है, जिसमें दिव्यांग खिलाड़ी 100 घंटे तक लगातार क्रिकेट खेलकर एक नया वैश्विक रिकॉर्ड स्थापित करेंगे।
मुख्य बिंदु:
- महोत्सव का उद्घाटन: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के पुलिस लाइन ग्राउंड में आयोजित पहले राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव–2026 की शुरुआत की।
- उन्होंने पिच पर उतरकर बल्लेबाज़ी की और मध्य प्रदेश तथा राजस्थान की टीमों के बीच पहले मैच का औपचारिक उद्घाटन किया।
- थीम: यह महोत्सव ‘नॉट आउट @ 100’ थीम पर आधारित है, जिसके अंतर्गत 25 राज्यों के लगभग 350 दिव्यांग खिलाड़ी 100 घंटे तक लगातार क्रिकेट खेलेंगे। यह आयोजन वैश्विक स्तर पर अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है।
- यह खेल महोत्सव सामाजिक सुधारक स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी को समर्पित है, जो रिकॉर्ड बनाने से आगे सामाजिक उत्थान का संदेश देता है।
- आयोजन: इस महोत्सव में मैराथन स्टाइल में कई T-20 मैच खेले जा रहे हैं। इसका आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे ट्रस्ट, TASK इंटरनेशनल सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च तथा अन्य सहयोगी संगठनों के सहयोग से किया जा रहा है।
- आयोजक 100 घंटे तक चलने वाले इस निरंतर क्रिकेट आयोजन का दस्तावेज़ीकरण कर इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में शामिल कराने की योजना बना रहे हैं।
- महत्त्व: यह महोत्सव न केवल विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर दिव्यांग खिलाड़ियों में खेल भावना, समावेशन और सशक्तीकरण को भी बढ़ावा देता है। यह एक सशक्त संदेश देता है कि संकल्प और अवसर के साथ किसी भी सीमा को पार किया जा सकता है।
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राजस्थान Switch to English
राजस्थान में अग्नि वर्षा 2026 सैन्य अभ्यास
चर्चा में क्यों?
भारतीय सेना द्वारा पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में समेकित अग्नि एवं संचालन अभ्यास (IFME) ‘अग्नि वर्षा’ का आयोजन किया गया, जिसमें मरुस्थलीय युद्ध वातावरण में सेना की उन्नत युद्ध तत्परता, संयुक्त संचालन क्षमता और सटीक अग्नि शक्ति का प्रदर्शन किया गया।
मुख्य बिंदु:
- सैन्य अभ्यास का स्वरूप: समेकित अग्नि एवं संचालन अभ्यास (Integrated Fire and Manoeuvre Exercise – IFME)
- स्थान: पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज, जैसलमेर
- संचालन परिवेश: मरुस्थलीय एवं अर्द्ध-मरुस्थलीय क्षेत्र
- उद्देश्य: लगभग युद्धक्षेत्र जैसी परिस्थितियों में आक्रामक अभियानों की पुष्टि, समन्वित संचालन (मैन्युवर) तथा सटीक अग्नि शक्ति के प्रयोग का सत्यापन।
- समेकित युद्ध शक्ति: इस सैन्य अभ्यास में यांत्रिकीकृत बलों, तोपखाने और सैन्य विमानन तत्त्वों सहित संयुक्त हथियार प्रणालियों के समन्वित उपयोग का प्रदर्शन किया गया।
- भाग लेने वाले प्लेटफॉर्म और प्रणालियाँ: ‘समेकित संचालन बल’ द्वारा स्वदेशी एवं उन्नत हथियार प्रणालियों की व्यापक शृंखला का उपयोग किया गया—
- बख्तरबंद एवं यांत्रिकीकृत बल: T-90 मुख्य युद्धक टैंक तथा इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल्स (ICVs)।
- तोपखाना: K-9 वज्र स्वचालित होवित्ज़र, शारंग और बोफोर्स तोप प्रणालियाँ, साथ ही सटीक प्रहार करने वाले रॉकेट प्लेटफॉर्म।
- विमानन: स्वदेशी ALH ध्रुव (WSI) हेलीकॉप्टर तथा AH-64 अपाचे आक्रमण हेलीकॉप्टर।
- ड्रोन: बहु-क्षेत्रीय अभियानों के लिये निगरानी और प्रहार करने वाले विभिन्न प्रकार के ड्रोन।
- प्रौद्योगिकी का समावेशन: सैन्य अभ्यास में आधुनिक युद्धक्षेत्र प्रौद्योगिकियाँ जैसे मानव रहित हवाई प्रणालियाँ (UAS), काउंटर-ड्रोन उपाय और नेटवर्क-आधारित निगरानी संसाधन शामिल किये गए।
- अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति: इस आयोजन को 25 मित्र देशों के विदेशी रक्षा पत्रकारों ने देखा, जिससे भारत के विकसित होते युद्धक सिद्धांत और उसकी विश्वसनीय प्रतिरोधक क्षमता को रेखांकित किया गया।

उत्तराखंड Switch to English
उत्तराखंड में धर्म गार्जियन 2026 का शुभारंभ
चर्चा में क्यों?
भारतीय सेना और जापान ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्स (JGSDF) के बीच आयोजित वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘धर्म गार्जियन’ का 7वाँ संस्करण फरवरी 2026 में उत्तराखंड के चौबटिया में प्रारंभ हुआ।
मुख्य बिंदु:
- द्विपक्षीय रक्षा सहयोग: धर्म गार्जियन भारत और जापान के बीच आयोजित एक वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास है, जिसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच अंतःक्रियाशीलता तथा परिचालन समन्वय को सुदृढ़ करना है।
- भारतीय सेना का दल लद्दाख स्काउट्स से लिया गया है, जबकि JGSDF का प्रतिनिधित्व 32वीं इन्फैंट्री रेजिमेंट के सैनिक कर रहे हैं।
- मुख्य फोकस क्षेत्र: यह अभ्यास अर्द्ध-शहरी परिवेश में संयुक्त अभियानों की क्षमता को मज़बूत करने, सामरिक योजना को बेहतर बनाने, अभ्यासों का समन्वय करने तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी और खुफिया प्रक्रियाओं को शामिल करने पर केंद्रित है।
- प्रशिक्षण गतिविधियाँ: भाग लेने वाली सेनाएँ विभिन्न सामरिक गतिविधियाँ करेंगी, जिनमें अस्थायी संचालन अड्डे (TOB) की स्थापना, खुफिया-निगरानी-टोही (ISR) ग्रिड का विकास, मोबाइल चेक पोस्ट की स्थापना, कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन का संचालन, हेलिबोर्न अभियानों का निष्पादन तथा भवन/घर में हस्तक्षेप (हाउस इंटरवेंशन) अभ्यास शामिल हैं।
- रणनीतिक महत्त्व: यह अभ्यास भारत-जापान के बीच रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करता है, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में योगदान देता है और संयुक्त परिचालन परिदृश्यों के लिये दोनों सेनाओं की पारस्परिक समझ, पेशेवर दक्षता एवं तत्परता को बढ़ाता है।
- अन्य भारत-जापान सैन्य अभ्यास: JIMEX (जापान-भारत समुद्री अभ्यास), वीर गार्जियन (वायु अभ्यास), शिन्यू मैत्री (वायु अभ्यास), सहयोग काइजिन (कोस्ट गार्ड अभ्यास), मलाबार (भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका)।
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