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राजस्थान स्टेट पी.सी.एस.

  • 31 Jan 2026
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राजस्थान में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिये वार्षिक कार्य योजनाएँ

चर्चा में क्यों?

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में आने वाले राजस्थान के ज़िलों द्वारा वायु प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु अपनाई गई वार्षिक कार्य योजनाओं (AAPs) और क्षेत्र-विशिष्ट उपायों की समीक्षा की।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य वार्षिक कार्य योजनाओं (AAPs) के तहत प्रदूषण नियंत्रण उपायों की तैयारी और क्रियान्वयन का आकलन करना है।
  • कानूनी स्थिति: यह CAQM अधिनियम, 2021 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है।
  • CAQM के निर्देश: क्रियान्वयन तंत्र को मज़बूत करना, अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करना, निवारक उपाय अपनाना तथा रियल-टाइम निगरानी और रिपोर्टिंग में सुधार करना।
  • लक्ष्य: PM2.5 और PM10 के स्तर को कम करना तथा NCR राज्यों में समान वायु गुणवत्ता प्रबंधन सुनिश्चित करना।
    • PM10 (स्थूल कण): 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कण।
    • PM2.5 (सूक्ष्म कण): 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले कण।
  • फोकस क्षेत्र: परिवहन, उद्योग, निर्माण एवं ध्वस्तीकरण (C&D), सड़क की धूल, जैव-अपशिष्ट व अपशिष्ट दहन आदि।
  • महत्त्व:
    • क्षेत्रीय दृष्टिकोण: NCR राज्यों में वायु प्रदूषण को सीमा-पार समस्या के रूप में संबोधित करता है।
    • नीति एकीकरण: राज्य कार्य योजनाओं को राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता लक्ष्यों के अनुरूप सुनिश्चित करता है।
    • जन-स्वास्थ्य प्रभाव: लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने का लक्ष्य रखता है।
    • शासन सुदृढ़ीकरण: ज़िला और राज्य स्तर पर जवाबदेही तथा क्रियान्वयन दक्षता बढ़ाता है।
  • ढाँचा-सामंजस्य: ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के साथ संरेखण।

और पढ़ें: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP)


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

गूगल डीपमाइंड का अल्फाजीनोम AI टूल

चर्चा में क्यों?

गूगल डीपमाइंड ने अल्फाजीनोम नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरण लॉन्च किया है, जिसे यह अनुमान लगाने के लिये विकसित किया गया है कि आनुवंशिक उत्परिवर्तन जीन नियमन को कैसे प्रभावित करते हैं और मानव रोगों में कैसे योगदान करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: गूगल डीपमाइंड द्वारा विकसित यह AI उपकरण दीर्घ DNA अनुक्रमों का विश्लेषण करने और आनुवंशिक भिन्नताओं के जैविक प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने के लिये उपयोग किया जाता है।
    • यह मुख्य रूप से नॉन-कोडिंग (नियामक)  DNA क्षेत्रों को लक्षित करता है, जो मानव जीनोम का लगभग 98% हिस्सा हैं और जीन विनियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • DNA विश्लेषण क्षमता: एक साथ एक मिलियन DNA बेस पेयर्स तक का विश्लेषण करने में सक्षम, जिससे लंबी दूरी के आनुवंशिक नियामक प्रभावों का मूल्यांकन संभव होता है।
    • जीन अभिव्यक्ति, RNA स्प्लाइसिंग, क्रोमैटिन पहुँच और नियामक गतिविधि पर उत्परिवर्तनों के प्रभाव का अनुमान लगाता है।
    • कैंसर, हृदय रोग, स्वप्रतिरक्षा रोग और तंत्रिका संबंधी स्थितियों जैसे जटिल रोगों के आनुवंशिक कारणों की पहचान में सहायता करता है।
  • प्रशिक्षण डेटा: इसे मनुष्यों तथा चूहों के बड़े पैमाने पर उपलब्ध सार्वजनिक जीनोमिक डेटासेट पर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि DNA अनुक्रमों और जैविक परिणामों के बीच संबंध स्थापित करने वाले पैटर्न की पहचान की जा सके।
    • यह एक आभासी प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है, जो वैज्ञानिकों को महँगे और समय लेने वाले जैविक प्रयोग करने से पहले आनुवंशिक परिकल्पनाओं के परीक्षण में सक्षम बनाता है।
  • उपलब्धता: वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करने के लिये गैर-वाणिज्यिक अनुसंधान उपयोग हेतु API के माध्यम से जारी किया गया।
  • सीमाएँ: नैदानिक ​​निदान या व्यक्तिगत चिकित्सा उपचार के लिये स्वीकृत नहीं है तथा इसकी भविष्यवाणियाँ प्रशिक्षण डेटा की गुणवत्ता और विविधता पर निर्भर करती हैं।

और पढ़ें: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आनुवंशिक भिन्नताएँ, DNA, RNA 


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