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स्टेट पी.सी.एस.

  • 26 Nov 2022
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उत्तर प्रदेश Switch to English

एमएनएनआईटी ने बनाई भारत की पहली मानव रहित कार

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के बीटेक के छात्रों ने भारत की पहली मानव रहित कार बनाई है। पहले चरण में परीक्षण सफल होने के बाद 27 नवंबर को माइक्रोसाफ्ट एशिया के अध्यक्ष अहमद मजहरी के सामने इसका पहला डेमो होगा।

प्रमुख बिंदु 

  • एमएनएनआईटी के 1995 बैच के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि बिना ड्राइवर के चलने वाली पहली मानव रहित कार के प्रोजेक्ट का पहला चरण दो साल की अथक मेहनत के बाद पूरा कर लिया गया है। प्रयोग के तौर पर गोल्फ कार्ट में इस कार के सिस्टम को फिट किया गया है। कोडिंग और प्रोग्रामिंग सफल होने के बाद फिलहाल इस कार को किसी भी सड़क पर सीधे चलने के लिये उतारा गया है।
  • इस कार के आगे और पीछे कैमरा लगाया गया है, जिससे यह कार बिना किसी मानव चालक के ही सड़क पर स्वत: चल सकेगी। कार को सामने से आने वाली कोई भी गाड़ी, आदमी, भीड़, जानवर या फिर गड्डा, कटान सब कुछ दिख जाएगा और किसी तरह का अवरोध होने पर वह अपने आप ब्रेक लगाकर रुक जाएगी।
  • इसके अलावा अवरोधक के हटने के साथ ही यह मानव रहित कार अपने गंतव्य के लिये रवाना भी हो जाएगी। वह सड़क दुर्घटना के हर कारणों को भाँप सकेगी। फिलहाल यह कार अभी सीधे रास्ते पर ही चल सकेगी।
  • महीने भर बाद दूसरा चरण पूरा होने पर वह किसी भी मोड़ या घुमावदार रास्ते पर चलने के साथ ही आगे पीछे मुड़कर फर्राटा भर सकेगी। इसके बाद कोडिंग के आधार पर यह कार किसी भी लोकेशन पर बिना किसी चालक के ही पहुँचने में सक्षम हो जाएगी।
  • बीटेक छात्र विभांशु समेत सेकेंड ईयर, थर्ड ईयर और फाइनल ईयर के कुल 19 छात्रों ने मिलकर इस कार को तैयार किया है।
  • एमएनएनआई के 1995 बैच के छात्र रहे आरआरडी गो क्रिएटिव के वाइस प्रेसीडेंट रोहित गर्ग के अलावा सड़क एवं परिवहन मंत्रालय नई दिल्ली में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात राजेश कुमार ने इस मानव रहित कार के निर्माण के लिये मार्गदर्शन किया और फंडिंग भी की है। इस कार के निर्माण पर सात लाख रुपए की लागत आई है।  

राजस्थान Switch to English

‘डॉ. अंबेडकर उत्सव धाम योजना’ के अंतर्गत राजस्थान के 568 गाँवों में सामुदायिक भवनों का निर्माण

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को राजस्थान के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री टीकाराम जूली ने बताया कि ‘डॉ. अंबेडकर उत्सव धाम योजना’ के तहत प्रदेश के 568 गाँवों में सामुदायिक भवनों का निर्माण किया जाएगा, जिनके रख-रखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होगी।

प्रमुख बिंदु 

  • मंत्री टीकाराम जूली ने बताया कि यह योजना केवल ‘प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना’ में चयनित गाँवों पर ही लागू की गई है। सामुदायिक हॉल अथवा भवन बनाने के लिये पायलट फेज में प्रदेश के 568 गाँवों का चयन किया गया है।
  • उन्होंने बताया कि सबसे अधिक 103 गाँव श्रीगंगानगर ज़िले में चयनित किये गए हैं। इसके बाद भरतपुर 68, अलवर 47, बाड़मेर 33, जोधपुर व दौसा 31-31 सहित प्रदेश के 32 ज़िलों के चयनित गाँवों में सामुदायिक हॉल/भवन बनेंगे।
  • प्रत्येक गाँव में 25-25 लाख रुपए की लागत के सामुदायिक हॉल, भवनों का निर्माण होगा। यह योजना सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के उपक्रम राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित की जा रही है।

राजस्थान Switch to English

जेम बॉर्स की स्थापना हेतु बैठक का आयोजन

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को राजस्थान के जयपुर में जेम बॉर्स की स्थापना के लिये राजस्थान लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राजीव अरोड़ा की अध्यक्षता में एक अहम बैठक आयोजित की गई।

प्रमुख बिंदु 

  • इस बैठक में जेम्स एंड ज्वैलरी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने राजीव अरोड़ा से आग्रह किया कि जौहरी बाजार में स्थित जेम्स एंड ज्वैलरी व्यापार को व्यापक रूप देने के लिये सीतापुरा में जेम बॉर्स स्थापना की जाए।
  • इसके लिये 15 लाख स्क्वायर मीटर का स्थान रियायती दरों पर आवंटन किया जाए, जिससे जैम्स एंड ज्वैलरी के समस्त छोटे-छोटे व्यापारियों को समुचित स्थान उपलब्ध हो सके और राजस्थान के निर्यात को बढ़ावा मिल सके।
  • जेम बॉर्स की स्थापना से जयपुर से निर्यात को समुचित बढ़ावा मिलेगा एवं युवाओं को रोज़गार के नये अवसर मिलेंगे।

राजस्थान Switch to English

डेफ ओलंपिक पदक विजेताओं को मिलेगी 7 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डेफ ओलंपिक, 2022 में पदक जीतने वाले राज्य के तीन खिलाड़ियों को कुल 7 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दिये जाने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया।

प्रमुख बिंदु

  • इस प्रस्ताव के अनुसार, डेफ ओलंपिक 2022 में डेफ बैडमिंटन में स्वर्ण पदक विजेता अभिनव शर्मा एवं गौरांशी शर्मा को 3-3 करोड़ रुपए दिये जाएंगे। इसके अलावा डेफ राइफल शूटिंग में काँस्य पदक विजेता वेदिका शर्मा को 1 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी।
  • विदित है की राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के लिये अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत एवं काँस्य पदक विजेताओं को क्रमश: तीन करोड़, दो करोड़ तथा एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दी जाती है।
  • उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री द्वारा राजस्थान क्रीड़ा सहायता अनुदान नियम-2022 में शिथिलन प्रदान करते हुए तीनों खिलाड़ियों को यह पुरस्कार राशि दी जाएगी। इस स्वीकृति से खिलाड़ियों को आर्थिक संबल के साथ-साथ प्रदेश के सभी खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिये प्रेरणा मिलेगी।

राजस्थान Switch to English

राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिये ऑनलाइन पेंशन पोर्टल

चर्चा में क्यों?

24 नवंबर, 2022 को राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर.के.शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार की डिजिटलाइजेशन मुहिम के अंतर्गत राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों हेतु ऑनलाइन पेंशन पोर्टल की सुविधा शुरू कर दी गई है।

प्रमुख बिंदु

  • आर.के.शर्मा ने बताया कि निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा पेंशन का विवरण देखने एवं पेंशन स्लिप डाउनलोड करने हेतु डिजिटल सुविधा की मांग की जा रही थी ताकि उन्हें इन कार्यों हेतु कार्यालय न आना पड़े।
  • वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन के विवरण त्वरित उपलब्ध कराने के मद्देनज़र विद्युत उत्पादन निगम के आई टी विभाग को निर्देशित किया गया है।
  • आई टी विभाग ने उत्पादन निगम की वेबसाइट पर पेंशन डिटेल्स के नाम से सुविधा शुरू की है। इससे पेंशनर्स वित्त वर्ष में अपनी पेंशन का विवरण देख सकते हैं तथा पेंशन स्लिप डाउनलोड कर सकते हैं।
  • पेंशन विवरण देखने या डाउनलोड करने में समस्या होने पर आई टी विभाग द्वारा हेल्पलाइन नंबर भी दिया गया है ताकि समस्या का तुरंत निराकरण किया जा सके।   

हरियाणा Switch to English

प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करेगा हरियाणा

चर्चा में क्यों?

24 नवंबर, 2022 को हरियाणा के मुख्य सचिव संजीव कौशल ने चंडीगढ़ में प्राकृतिक खेती पर हुई समीक्षा बैठक में बताया कि राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक किसानों को इस ओर प्रोत्साहित करने हेतु हरियाणा अब प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करेगा, जिससे इस पद्धति की पूरी प्रक्रिया, समयावधि और परिणामों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।

प्रमुख बिंदु 

  • मुख्य सचिव ने बताया कि प्राकृतिक खेती पर वैज्ञानिक रिसर्च पेपर तैयार करने के लिये चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति और रिसर्च निदेशक से बातचीत कर जल्द से जल्द इस कार्य को अमलीजामा पहनाया जाएगा।
  • उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती धीरे-धीरे समय की ज़रूरत बनती जा रही है। इस पद्धति से कम लागत के साथ किसान जैविक पैदावार बढ़ा सकता है और अपनी आय में भी वृद्धि कर सकता है।
  • प्राकृतिक खेती का उद्देश्य रसायन मुक्त कृषि, प्रकृति के अनुरूप जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देना और पर्यावरण एवं जलवायु प्रदूषण में कमी लाते हुए इस पद्धति को स्थायी आजीविका के रूप में स्थापित करना है। इसके लिये राज्य सरकार द्वारा किसानों को जागरूक और प्रशिक्षित भी किया जा रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि वर्तमान में राज्य में 2 प्रशिक्षण केंद्रों गुरुकुल (कुरुक्षेत्र) और घरौंडा (करनाल) में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा, जल्द ही तीन स्थानों चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हिसार), हमेटी (जींद) तथा मंगियाणा (सिरसा) में 3 और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किये जाएंगे।
  • उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का मूल उद्देश्य खान-पान को बदलना है, इसके लिये ‘खाद्यान्न ही औषधि’की धारणा को अपनाना होगा। किसानों को इसके प्रति जागरूक करने के लिये हर खंड में एक प्रदर्शनी खेत में प्राकृतिक खेती करवाई जाएगी। अब तक 5 ज़िलों में इस प्रकार के प्रदर्शनी खेत तैयार किये जा चुके हैं।
  • बैठक में बताया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये अप्रैल, 2022 में राज्य सरकार ने पोर्टल लॉन्च किया था, जिस पर प्राकृतिक खेती अपनाने के इच्छुक किसान अपना पंजीकरण करवा सकें। अब तक इस पोर्टल पर 2992 किसानों ने अपना पंजीकरण करवाया है। 1201 किसानों ने रबी सीजन के दौरान प्राकृतिक खेती करने के लिये अपनी सहमति प्रदान कर दी है। इसके अलावा, 3600 मृदा सैंपल भी एकत्रित किये गए हैं।
  • प्राकृतिक खेती के लिये प्रथम चरण में सरकार की ओर से प्रशिक्षण और जागरूकता पर अधिक जोर दिया जा रहा है, ताकि किसान इस पद्धति को अच्छे से समझ सके। प्राकृतिक खेती के लिये अब तक 405 एटीएम, बीटीएम तथा 119 प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये अब मास्टर ट्रेनर के रूप में अन्य किसानों को प्रशिक्षित करने का काम करेंगे। इसके अलावा 151 युवाओं को भी इस खेती की पद्धति का प्रशिक्षण दिया गया है।
  • विदित है कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये देसी गाय की खरीद पर 25 हज़ार रुपए तक की सब्सिडी व प्राकृतिक खेती के लिये जीवामृत का घोल तैयार करने के लिये चार बड़े ड्रमों के लिये हर किसान को 3 हज़ार रुपए दिये जा रहे हैं। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है।
  • इसके अलावा प्राकृतिक खेती के उत्पादों की पैकिंग सीधे किसान के खेतों से ही हो, ऐसी योजना भी तैयार की गई है, ताकि बाज़ार में ग्राहकों को इस बात की शंका न रहे कि यह प्राकृतिक खेती का उत्पाद है या नहीं।      

झारखंड Switch to English

झारखंड के 6 लोगों को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को नई दिल्ली स्थित संगीत नाटक अकादमी के सचिव एपी राजन ने ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (वर्ष 2019, 2020, 2021)’ की घोषणा करते हुए बताया कि रंगमंच और संगीत के क्षेत्र में दखल रखनेवाली झारखंड की छह शख्सियतों को देश के प्रतिष्ठित ‘संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार’के लिये चुना गया है।

प्रमुख बिंदु 

  • एपी राजन ने बताया कि इस वर्ष विभिन्न कला विधाओं से जुड़े देश भर के 128 लोगों व संस्थाओं का चयन अकादमी पुरस्कार के लिये किया गया है, जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा।
  • राज्य से स्वतंत्र रंगकर्मी अजय मलकानी, रायकेला शैली के छऊ नृत्य गुरु सह कलाकार ब्रजेंद्र कुमार पटनायक तथा ट्राइबल फोक व म्यूजिक हेतु नायक टोली हटिया के महावीर नायक को अमृत अवॉर्ड के लिये, संथाली म्यूजिक हेतु जादूगोड़ा पूर्वी सिंहभूम के दुर्गा प्रसाद मुर्मू को संगीत नाटक अकादमी-2021 के लिये, सिमडेगा के जगदीश बड़ाईक को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार-2020 के लिये और बोकारो के बिनोद महतो को उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार-2021 के लिये चुना गया है।
  • गौरतलब है कि अजय मलकानी मारवाड़ी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर व राँची विश्वविद्यालय के परफॉर्मिंग एंड फाइन आर्ट विभाग के निदेशक पद से सेवानिवृत्त रंगकर्मी वर्तमान में एनएसडी एकेडमिक काउंसिल के सदस्य हैं। उन्हें थियेटर में निर्देशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिये चुना गया है। वे नाट्य संस्था युवा रंगमंच के संस्थापक हैं और देश भर में मंचित 50 से भी ज्यादा नाटकों का निर्देशन कर चुके हैं।
  • ज्ञातव्य है कि मलकानी राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से 1986 में निर्देशन में डिप्लोमा करनेवाले संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सैलरी एंड प्रोडक्शन ग्रांट कमेटी के सदस्य, झारखंड सरकार की फिल्म नीति के अंतर्गत तकनीकी सलाहकार परिषद के सदस्य व गोवा में आयोजित 48वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2017 के फिल्म रिव्यू के सदस्य भी रहे हैं।

छत्तीसगढ़ Switch to English

मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का सातवाँ चरण 1 दिसंबर से

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग द्वारा मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’के सातवें चरण की शुरूआत 1 दिसंबर से होगी। राज्य के चार मलेरिया संवेदी ज़िलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा में एक माह तक यह अभियान संचालित किया जाएगा।

प्रमुख बिंदु 

  • गौरतलब है कि मलेरिया के मामलों को निम्नतम स्तर तक ले जाकर पूर्ण मलेरिया मुक्त राज्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिये प्रदेश में लगातार यह अभियान चलाया जा रहा है।
  • प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के पिछले छह चरणों के अच्छे नतीजे आए हैं। प्रदेश में वर्ष 2018 में वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई दर) 63 था, जो अभी घटकर 0.92 पर आ गया है। बस्तर के साथ-साथ समूचे छत्तीसगढ़ में मलेरिया संक्रमण की दर अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर तक पहुँच चुकी है।
  • मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के छटवें चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सात लाख छह हज़ार घरों में जाकर 33 लाख 96 हज़ार 998 लोगों की मलेरिया जाँच की थी। इस दौरान मलेरियाग्रस्त पाए गए लोगों का तत्काल उपचार भी किया गया।
  • 1 दिसंबर से शुरू हो रहे सातवें चरण में भी स्वास्थ्य विभाग की टीम बस्तर संभाग के चार ज़िलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा के घने जंगलों और पहाड़ों से घिरे दुर्गम एवं दूरस्थ इलाकों में घर-घर पहुँचकर सभी लोगों में मलेरिया की जाँच करेगी। इस दौरान पॉजिटिव पाए गए लोगों को तत्काल मलेरिया की दवाई खिलाई जाएगी।
  • मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत मलेरिया की जाँच और इलाज के साथ ही इससे बचाव के लिये जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियाँ भी चलाई जाएंगी। इस दौरान लोगों को रोज मच्छरदानी के प्रयोग के लिये प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही घरों के आसपास एकत्रित पानी और नालियों में डीडीटी या जले हुए तेल का छिड़काव किया जाएगा। घर के आसपास स्वच्छता बनाए रखने और मच्छरों को पनपने से रोकने के उपाय भी लोगों को बताए जाएंगे।                

उत्तराखंड Switch to English

उत्तराखंड में ड्रोन ट्रैफिक सँभालने के लिये बनेंगे कॉरिडोर

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को उत्तराखंड के सूचना प्रौद्योगिकी एवं विकास एजेंसी (आईटीडीए) के निदेशक अमित सिन्हा ने बताया कि ड्रोन तकनीक में नए प्रयोगों के साथ प्रदेश में ड्रोन ट्रैफिक सँभालने के लिये सभी ज़िलों में कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं। हवाई सेवाओं की तर्ज पर ये ऐसे रास्ते होंगे, जिनसे सरकारी और निजी ड्रोन उड़ान भर सकेंगे।

प्रमुख बिंदु 

  • गौरतलब है कि ड्रोन के भविष्य में उपयोग को देखते हुए इसके लिये रास्ते तैयार करने की ज़रूरत महसूस की जा रही है। इसके लिये सूचना प्रौद्योगिकी एवं विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने ड्रोन कॉरिडोर बनाने काम शुरू किया है।
  • आईटीडीए के निदेशक ने बताया कि प्रदेश के सभी ज़िलों में ड्रोन संचालन के लिये जो कॉरिडोर बनेंगे, उन्हें आपस में लिंक किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश में ड्रोन के समर्पित रास्तों का पूरा नेटवर्क तैयार हो जाएगा। नियम को तोड़ने वालों पर भविष्य में कार्रवाई भी हो सकेगी।
  • उन्होंने बताया कि ड्रोन कॉरिडोर बनाने का एक उद्देश्य यह भी है कि इससे ऐसे रास्ते तैयार किये जाएंगे, जो हवाई सेवाओं को बाधित न करें। इसके अलावा सीमांत प्रदेश होने के नाते तमाम प्रतिबंधित क्षेत्रों को भी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
  • ज्ञातव्य है कि वर्तमान में प्रदेश में उत्तरकाशी से दून या अन्य जगहों पर ड्रोन संचालन का कोई समर्पित कॉरिडोर नहीं है, जिससे कई ड्रोन को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इससे अधिक समय लगने और ड्रोन की बैटरी भी जल्द खत्म होने का खतरा है। ड्रोन कॉरिडोर के बन जाने से उड़ान का समय तो कम होगा ही, उसकी बैटरी भी लंबी दूरी की उड़ान में मदद करेगी।
  • ड्रोन के क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे विकास के मद्देनज़र उत्तराखंड सरकार जल्द ही ड्रोन नीति लाने जा रही है। आईटीडीए ने इसका ड्राफ्ट शासन को भेजा है। इसके तहत ड्रोन संचालन से लेकर ड्रोन की खरीद तक के सभी प्रावधान किये जाएंगे। जल्द ही यह नीति कैबिनेट में आने का अनुमान है।

उत्तराखंड Switch to English

उत्तराखंड और अमेरिकी कंपनी के बीच हुआ दो साल का करार

चर्चा में क्यों?

25 नवंबर, 2022 को उत्तराखंड की नियोजन सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि राज्य सरकार ने अग्रणी अंतर्राष्ट्रीय परामर्शदाता अमेरिकी कंपनी मैकेंजी ग्लोबल को उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सुधार का जिम्मा देते हुए कंपनी के साथ दो साल का करार किया है।

प्रमुख बिंदु

  • डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि राज्य सरकार का मैकेंजी ग्लोबल के साथ करार होने से राज्य अगले पाँच साल में आर्थिक विकास दर (जीडीपी) दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता प्राप्त करेगा। वर्तमान में राज्य में 05 प्रतिशत जीडीपी का अनुमान है।
  • छह महीने में कंपनी विकास की संभावनाओं वाले उन क्षेत्रों का चयन करेगी, जिनमें वह देश और दुनिया के नामी विशेषज्ञ कंपनियों से निवेश करा सकती है। डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, मैकेंजी ग्लोबल कंपनी किसी राज्य में पहली बार काम करेगी।
  • इस करार के तहत कंपनी छह महीने राज्य में उन सेक्टरों का चयन करेगी, जिनमें नए निवेश और सुधारों के जरिये तरक्की की जा सकती है। बाकी के डेढ़ साल में चिह्नित क्षेत्रों में निवेश के लिये नामी कंपनियों को लाएगी।
  • एजेंसी फसलों और उत्पादों की पैदावार में वृद्धि और उनकी गुणवत्ता में सुधार के लिये निवेश कराएगी। उत्पादों को निर्यात बाज़ार दिलाने का भी काम करेगी। यदि कंपनी बेहतर परिणाम देगी, तो उसके करार को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • उल्लेखनीय है कि मैकेंजी ग्लोबल को अंतर्राष्ट्रीय अनुभव प्राप्त है। वियतनाम में कंपनी ने चुनिंदा उत्पादों चावल, कॉफी, केला, मशरूम पर काम किया है। उनकी गुणवत्ता सुधारी, पैदावार बढ़ाई और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार उपलब्ध कराया। इससे वहाँ की अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ।
  • राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिये, न्यू टाउनशिप, पर्यटन, उद्यान, ऊर्जा, आयुष, योग, वेलनेस टूरिज्म, आईटी इंडस्ट्री, होटल इंडस्ट्री समेत कई अन्य क्षेत्रों में कंपनी काम कर सकती है।

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