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उत्तराखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 31 Jan 2026
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गूगल डीपमाइंड का अल्फाजीनोम AI टूल

चर्चा में क्यों?

गूगल डीपमाइंड ने अल्फाजीनोम नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरण लॉन्च किया है, जिसे यह अनुमान लगाने के लिये विकसित किया गया है कि आनुवंशिक उत्परिवर्तन जीन नियमन को कैसे प्रभावित करते हैं और मानव रोगों में कैसे योगदान करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: गूगल डीपमाइंड द्वारा विकसित यह AI उपकरण दीर्घ DNA अनुक्रमों का विश्लेषण करने और आनुवंशिक भिन्नताओं के जैविक प्रभाव का पूर्वानुमान लगाने के लिये उपयोग किया जाता है।
    • यह मुख्य रूप से नॉन-कोडिंग (नियामक)  DNA क्षेत्रों को लक्षित करता है, जो मानव जीनोम का लगभग 98% हिस्सा हैं और जीन विनियमन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • DNA विश्लेषण क्षमता: एक साथ एक मिलियन DNA बेस पेयर्स तक का विश्लेषण करने में सक्षम, जिससे लंबी दूरी के आनुवंशिक नियामक प्रभावों का मूल्यांकन संभव होता है।
    • जीन अभिव्यक्ति, RNA स्प्लाइसिंग, क्रोमैटिन पहुँच और नियामक गतिविधि पर उत्परिवर्तनों के प्रभाव का अनुमान लगाता है।
    • कैंसर, हृदय रोग, स्वप्रतिरक्षा रोग और तंत्रिका संबंधी स्थितियों जैसे जटिल रोगों के आनुवंशिक कारणों की पहचान में सहायता करता है।
  • प्रशिक्षण डेटा: इसे मनुष्यों तथा चूहों के बड़े पैमाने पर उपलब्ध सार्वजनिक जीनोमिक डेटासेट पर प्रशिक्षित किया गया है, ताकि DNA अनुक्रमों और जैविक परिणामों के बीच संबंध स्थापित करने वाले पैटर्न की पहचान की जा सके।
    • यह एक आभासी प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है, जो वैज्ञानिकों को महँगे और समय लेने वाले जैविक प्रयोग करने से पहले आनुवंशिक परिकल्पनाओं के परीक्षण में सक्षम बनाता है।
  • उपलब्धता: वैश्विक वैज्ञानिक सहयोग का समर्थन करने के लिये गैर-वाणिज्यिक अनुसंधान उपयोग हेतु API के माध्यम से जारी किया गया।
  • सीमाएँ: नैदानिक ​​निदान या व्यक्तिगत चिकित्सा उपचार के लिये स्वीकृत नहीं है तथा इसकी भविष्यवाणियाँ प्रशिक्षण डेटा की गुणवत्ता और विविधता पर निर्भर करती हैं।

और पढ़ें: कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आनुवंशिक भिन्नताएँ, DNA, RNA 


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महाराष्ट्र की झॉंकी ने गणतंत्र दिवस परेड 2026 में पहला स्थान जीता

चर्चा में क्यों?

महाराष्ट्र की राज्य झॉंकी ने गणतंत्र दिवस परेड 2026 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया।

मुख्य बिंदु:

  • महाराष्ट्र झॉंकी की थीम: ‘गणेशोत्सव: आत्मनिर्भरता का प्रतीक’ ने सांस्कृतिक विरासत, सामुदायिक भागीदारी, सामाजिक एकता और आत्मनिर्भरता पर बल दिया।
    • झॉंकी में गणेशोत्सव के उत्सवों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें परंपराओं और सामुदायिक शक्ति को दर्शाया गया। नागपुर के ढोल-ताशा समूह की भागीदारी ने इसके सांस्कृतिक आकर्षण को और बढ़ाया।
  • अन्य विजेता:
    • दूसरा स्थान: जम्मू-कश्मीर हस्तशिल्प और लोक नृत्यों के प्रदर्शन के लिये।
    • तीसरा स्थान: केरल ने वाटर मेट्रो और 100% डिजिटल साक्षरता पर झॉंकी पेश की।
  • मार्चिंग टुकड़ियाँ: तीनों सशस्त्र बलों में भारतीय नौसेना को सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग कंटिंजेंट घोषित किया गया।
    • केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में दिल्ली पुलिस को यह सम्मान मिला।
  • मंत्रालय श्रेणी: केंद्रीय मंत्रालयों में संस्कृति मंत्रालय को अपनी प्रस्तुति ‘वंदे मातरम – राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ के लिये सर्वश्रेष्ठ झॉंकी का पुरस्कार मिला।
  • महत्त्व: ये पुरस्कार सांस्कृतिक प्रस्तुति में उत्कृष्टता, विषयगत रचनात्मकता को दर्शाते हैं तथा भारत की विविधता, विरासत और विकास गाथाओं को प्रदर्शित कर राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देते हैं।

और पढ़ें:  गणतंत्र दिवस 2026, वंदे मातरम्


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PFRDA ने किया NPS के लिये SAARG पर विशेषज्ञ समिति का गठन

चर्चा में क्यों?

पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) की निवेश रूपरेखा की समीक्षा और आधुनिकीकरण के लिये रणनीतिक परिसंपत्ति आवंटन और जोखिम शासन (SAARG) पर एक विशेषज्ञ समिति गठित की है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: NPS के फंड प्रबंधन को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाना तथा अंशधारकों के लिये दीर्घकालिक सेवानिवृत्ति परिणामों को सुदृढ़ करना।
  • लक्ष्य: विविधीकरण में सुधार, जोखिम प्रबंधन प्रथाओं को सशक्त बनाने तथा अंशधारकों के लिये उपलब्ध निवेश विकल्पों का विस्तार करके NPS की दीर्घकालिक निवेश संरचना को मज़बूत करना।
  • समिति की संरचना: SAARG समिति के अध्यक्ष मॉर्गन स्टेनली इंडिया के पूर्व कंट्री हेड नारायण रामचंद्रन हैं।
    • विशेषज्ञ: इसमें परिसंपत्ति प्रबंधन, पूंजी बाज़ार, विनियमन और निवेश परामर्श से जुड़े विशेषज्ञों के साथ-साथ PFRDA के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हैं।
  • समिति का दायित्व: SAARG को सरकारी और गैर-सरकारी दोनों क्षेत्रों के लिये मौजूदा NPS निवेश दिशानिर्देशों की व्यापक समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया है।
    • इस समीक्षा में भारत की पेंशन निवेश रूपरेखा की तुलना अग्रणी वैश्विक पेंशन प्रणालियों तथा विकसित होते घरेलू निवेश पारितंत्र से भी की जाएगी।
  • महत्त्व: यह पहल पेंशन फंडों के पोर्टफोलियो को अधिक सुदृढ़ बनाने, प्रतिफलों को अनुकूलित करने तथा जोखिमों को कम करने में अहम भूमिका निभाती है।
    • यह भारत की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिसके तहत वृद्ध होती जनसंख्या के लिये वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है और दीर्घकालिक घरेलू पूंजी संसाधनों को सशक्त किया जा रहा है।

और पढ़ें: PFRDA, नेशनल पेंशन सिस्टम, मॉर्गन स्टेनली इंडिया


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केरल आधिकारिक तौर पर 'राज्य सूक्ष्मजीव' घोषित करने वाला पहला भारतीय राज्य बना

चर्चा में क्यों?

केरल सरकार ने आधिकारिक तौर पर बैसिलस सबटिलिस को अपने राज्य सूक्ष्मजीव (State Microbe) के रूप में घोषित किया है और ऐसा करने वाला यह पहला भारतीय राज्य बन गया है जिसने अपने राज्य प्रतीकों की सूची में किसी सूक्ष्मजीव को शामिल किया।

मुख्य बिंदु:

  • परिचय: बैसिलस सबटिलिस, जिसे आमतौर पर ‘हे बैसिलस (Hay Bacillus)’ कहा जाता है, एक ग्राम-पॉजिटिव, छड़ के आकार का बैक्टीरिया है, जो मुख्य रूप से मृदा और मनुष्यों तथा जुगाली करने वाले पशुओं के जठरांत्र संबंधी मार्ग में पाया जाता है।
    • यह जीवाणु गैर-रोगजनक है तथा मृदा, किण्वित खाद्य पदार्थों और मानव ऑंत में व्यापक रूप से पाया जाता है।
  • सहनशीलता: यह कठोर, सुरक्षात्मक एंडोस्पोर बनाने की क्षमता के लिये प्रसिद्ध है, जो इसे अत्यधिक पर्यावरणीय परिस्थितियों जैसे गर्मी और सूखे में जीवित रहने में सक्षम बनाती है।
  • सुरक्षा: इसे वैश्विक खाद्य प्राधिकरणों द्वारा GRAS (सामान्यतः सुरक्षित माने जाने वाले) श्रेणी में रखा गया है और यह पारंपरिक किण्वित खाद्य पदार्थों जैसे जापानी नट्टो (Natto) में एक प्रमुख घटक है।
  • ‘वन हेल्थ’ को बढ़ावा: यह कदम मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के आपसी जुड़ाव को रेखांकित करता है, क्योंकि बी. सबटिलिस (B. subtilis) तीनों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  • एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) से मुकाबला: ‘अच्छे बैक्टीरिया (गुड बैक्टीरिया)’ को उजागर करके, राज्य जनता को माइक्रोबायोम के बारे में शिक्षित करना चाहता है, जिससे एंटीबायोटिक्स के असंगत उपयोग को कम किया जा सके जो AMR का कारण बनता है।
  • जैव प्रौद्योगिकी केंद्र: केरल माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी में अग्रणी बनने का लक्ष्य रखता है।

और पढ़ें: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, वन हेल्थ


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