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उत्तराखंड स्टेट पी.सी.एस.

  • 15 Jun 2024
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जोशीमठ और कोसियाकुटोली के नाम परिवर्तन

चर्चा में क्यों?

 हाल ही में केंद्र ने उत्तराखंड सरकार के चमोली ज़िले में जोशीमठ तहसील का नाम बदलकर ज्योतिर्मठ और नैनीताल ज़िले में कोसियाकुटोली तहसील का नाम बदलकर परगना श्री कैंची धाम तहसील करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी।

  • यह कदम इन क्षेत्रों, विशेषकर ऐसे राज्य में जो पहले से ही धार्मिक पर्यटन के लिये एक प्रमुख गंतव्य है, के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व को बढ़ाएगा।

मुख्य बिंदु:

  • जोशीमठ वर्ष 2023 में चर्चा में था, जब शहर की कई सड़कों और सैकड़ों इमारतों के ज़मीन में धँसने के कारण बड़ी दरारें पड़ गईं।
    • दूसरी ओर, कोसियाकुटोली तहसील नीम करोली बाबा के कैंची धाम आश्रम के लिये प्रसिद्ध है।
  • ज्योतिर्मठ (जिसे ज्योतिर पीठ के नाम से भी जाना जाता है) चार प्रमुख मठों में से एक है, जिसके बारे में माना जाता है कि 8वीं शताब्दी के दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन को बढ़ावा देने के लिये पूरे भारत में स्थापित किये थे।
    • ज्योतिर्मठ की स्थापना आध्यात्मिक ज्ञान और प्रथाओं के संरक्षण एवं प्रसार के लिये की गई थी।
  • ज्योतिर्मठ इस पहाड़ी शहर का प्राचीन नाम था। समय के साथ, स्थानीय आबादी ने इस क्षेत्र को "जोशीमठ" कहना शुरू कर दिया। यह परिवर्तन संभवतः क्रमिक और स्वाभाविक था, जो क्षेत्रीय भाषाओं, स्थानीय बोलियों एवं उच्चारण की सहजता से प्रभावित था। यह परिवर्तन किसी विशिष्ट ऐतिहासिक घटना के बजाय भाषायी और सांस्कृतिक विकास को दर्शाता है।
  • हाल के वर्षों में कुछ निवासियों ने शहर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व को सम्मान देने के लिये नाम में बदलाव की मांग की है।
    • मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2023 में चमोली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बदलाव की घोषणा की।
  • जोशीमठ जहाँ पुराने नाम से एक सूक्ष्म परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं कोसियाकुटोली का मामला एक कम-ज्ञात नाम को बदलने के संदर्भ में है जिसे व्यापक मान्यता नहीं मिली है।
    • इसका नाम बदलकर परगना श्री कैंची धाम करने से इसकी पहचान नीम करोली बाबा के कैंची धाम आश्रम से जुड़ जाती है, जो यहाँ का एक प्रमुख स्थल है जो विश्व भर से भक्तों को आकर्षित करता है।
  • "कोसियाकुटोली" नाम में "कोसी" उसी नाम की नदी को संदर्भित करता है जो नैनीताल ज़िले से होकर बहती है और उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र के लिये महत्त्वपूर्ण है। प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने के साथ-साथ यह स्थानीय पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के लिये भी महत्त्वपूर्ण है। "कुटोली" शब्द स्थानीय भाषा से लिया गया है, जो किसी गाँव या बस्ती को संदर्भित करता है। कुमाऊँनी भाषा में नदी जैसी प्रमुख भौगोलिक विशेषता के नाम पर किसी स्थान का नाम रखना आम बात है और नामों का अर्थ प्रायः परिदृश्य, स्थानीय इतिहास या सांस्कृतिक विशेषताओं से जुड़ा होता है।

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