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मध्य प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 05 Dec 2022
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‘अनुगूँज’ का स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री ने किया शुभारंभ

चर्चा में क्यों?

4 दिसंबर, 2022 को प्रदेश के स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री इंदर सिंह परमार ने शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, भोपाल में ‘अनुगूँज’ के चतुर्थ संस्करण का शुभारंभ किया।

प्रमुख बिंदु

  • स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ‘कला से समृद्ध शिक्षा’के अंतर्गत मध्य प्रदेश में प्रतिवर्ष होने वाले शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘अनुगूँज’का आयोजन 5 दिसंबर तक किया जाएगा।
  • ‘अनुगूँज’मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग का वैश्विक शिक्षा प्रणाली STEAM (साइंस, टैक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्टस और मैथेमेटिक्स) की दिशा में ‘कला से समृद्ध शिक्षा’का अभिनव कार्यक्रम है। अब अनुगूँज के कार्यक्रम अन्य संभागों में भी आयोजित किये जा रहे हैं। इन संभागों की कुछ मोहक प्रस्तुतियॉँ राजधानी भोपाल के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी शामिल हैं।
  • मुख्य सचिव स्कूल शिक्षा रश्मि अरुण शमी ने कहा कि भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय ‘अनुगूँज’के चतुर्थ संस्करण में प्रदेश के भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन संभाग के विद्यार्थी प्रतिभागिता कर रहे हैं। ‘अनुगूँज’तीन प्रमुख भागों रंगकार, धनक और सृजन के अंतर्गत संपादित किया जा रहा है।
  • अनुगूँज’विद्यार्थियों को ‘कला के साथ शिक्षा’के संदर्भ में बड़े उत्साह के साथ कलाओं की बारीकियाँ सीखने का अवसर प्रदान करता है।
  • केंद्र सरकार द्वारा परिकल्पित ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’कार्यक्रम में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिये मध्य प्रदेश को उत्तर पूर्वी राज्यों, मणिपुर एवं नागालैंड के साथ समूहबद्ध किया गया है, जिससे अंतर्राज्यीय संस्कृति, कलाओं एवं शैलियों को जानने का अवसर मिले। इस तारतम्य में अनुगूँज 2022 में इन राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी दिखाई देगी।

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कान्हा टाइगर रिज़र्व में जंगली भैंसें बसाएगी सरकार

चर्चा में क्यों?

4 दिसंबर, 2022 को मध्य प्रदेश के पीसीसीएफ वन्यप्राणी, जे.एस. चौहान ने कहा कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में जंगली भैंसें बसाने की तैयारी है। वन विभाग असम सरकार को पत्र लिखकर जंगली भैंसों की मांग करेगा।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में आज से 40 साल पहले जंगली भैंसें पाए जाते थे। धीरे-धीरे वे विलुप्त हो गए। अब राज्य सरकार एक बार फिर प्रदेश के जंगल को जंगली भैंसों से आबाद करने का प्रयास कर रही है।
  • एशियाई जंगली भैंसों की संख्या वर्तमान में चार हजार से भी कम रह गई है। एक सदी पहले तक पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में बड़ी तादाद में पाए जाने वाले जंगली भैंसें आज केवल भारत, नेपाल, बर्मा और थाईलैंड में ही पाए जाते हैं।
  • भारत में असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में ये पाए जाते हैं। मध्य भारत में ये छत्तीसगढ़ में गरियाबंद ज़िले के सीतानदी-उदंती टाइगर रिज़र्व और बीजापुर ज़िले के कुटरु में स्थित इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं।
  • जंगली भैंसों की एक प्रजाति, जिसके मस्तक पर सफेद निशान होता है, पहले मध्य प्रदेश के वनों में भी पाई जाती थी, लेकिन अब विलुप्त है।
  • मादा जंगली भैंस अपने जीवन काल में पाँच बच्चों को जन्म देती है। इनकी जीवन अवधि नौ साल की होती है। आम तौर पर मादा जंगली भैंसे और उनके बच्चे झुंड बनाकर रहती हैं और नर झुंड से अलग रहते हैं। लेकिन यदि झुंड की कोई मादा गर्भ धारण के लिये तैयार होती है तो सबसे ताकतवर नर उसके पास किसी और नर को नहीं आने देता। यह नर आम तौर पर झुंड के आसपास ही बना रहता है।
  • नर बच्चे दो साल की उम्र में झुंड छोड़ देते हैं। जंगली भैंसा का जन्म अक्सर बारिश के मौसम के अंत में होता है। यदि किसी बच्चे की माँ मर जाए तो दूसरी मादाएँ उसे अपना लेती हैं।
  • जंगली भैंसों को सबसे बड़ा खतरा पालतू मवेशियों की संक्रमित बीमारियों से है, इनमें प्रमुख बीमारी फुट एंड माउथ है। रिडंर्पेस्ट नाम की बीमारी ने एक समय इनकी संख्या में बहुत कमी ला दी थी।

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