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विश्व बैंक ने UP में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिये भारत के साथ साझेदारी की

  • 18 Mar 2026
  • 15 min read

चर्चा में क्यों?

विश्व बैंक, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश की स्वच्छ वायु योजना को समर्थन देने के लिये एक समझौते पर हस्ताक्षर किये, जिसका उद्देश्य राज्य की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिये समेकित समाधान विकसित करना और युवाओं तथा महिलाओं के लिये रोज़गार के अवसर सृजित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • परियोजना: उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करना।
  • लक्षित क्षेत्र: यह कार्यक्रम इंडो-गंगेटिक प्लेन (IGP) पर केंद्रित है, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के उच्च प्रदूषण वाले क्षेत्रों (जैसे नोएडा, कानपुर, लखनऊ और वाराणसी) को लक्षित करता है।
  • उद्देश्य: वर्ष 2030 तक भाग लेने वाले शहरों में PM2.5 स्तर में 30% की कमी लाना, जो राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के लक्ष्यों के अनुरूप है।
  • फोकस: उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (299.66 मिलियन डॉलर) परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में स्वच्छ वायु परिवर्तन पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसके सकारात्मक प्रभाव अन्य राज्यों तक भी पहुँचेंगे।
  • नए मॉनिटर: लगभग 200 नए वायु गुणवत्ता मॉनिटर स्थापित किये जाएंगे, जिनका डेटा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त होगा।
  • कुल परियोजना लागत: 500 मिलियन डॉलर, जिसे विश्व बैंक के इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (IBRD) के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा।
    • वित्तीय विवरण: विश्व बैंक का 299.66 मिलियन डॉलर का ऋण, जिसकी अवधि 10 वर्ष है, जिसमें 2 वर्ष की छूट अवधि शामिल है।
    • निजी निवेश: परिवहन और MSME क्षेत्रों में 150 मिलियन डॉलर के निजी निवेश का लक्ष्य रखा गया है।
  • क्षेत्रीय रणनीति: उत्तर प्रदेश का यह कार्यक्रम इंडो-गंगेटिक प्लेन्स और हिमालयी तराई क्षेत्र (IGP-HF) में विश्व बैंक के क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा है, जो वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण का एक प्रमुख हॉटस्पॉट है।

और पढ़ें: विश्व बैंक, राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)

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