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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ ने आवारा पशुओं के संरक्षण के लिये ‘गौधाम योजना’ शुरू की

  • 18 Mar 2026
  • 14 min read

चर्चा में क्यों?

14 मार्च, 2026 को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने बिलासपुर ज़िले के लाखासर गाँव में ‘गौधाम योजना’ शुरू की। इस योजना का उद्देश्य आवारा और परित्यक्त पशुओं को सुरक्षित आश्रय प्रदान करना तथा गो-आधारित जैविक उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।

मुख्य बिंदु:

  • लक्षित अवसंरचना: छत्तीसगढ़ 1,460 गौधाम (प्रत्येक विकासखंड में 10) स्थापित करने की योजना बना रहा है।
  • चरणबद्ध क्रियान्वयन: पहले चरण में 11 ज़िलों में 29 गौधामों का वर्चुअल उद्घाटन किया गया।
  • चारे के लिये वित्तीय सहायता: दीर्घकालिक देखभाल को प्रोत्साहित करने के लिये प्रति पशु प्रतिदिन चरणबद्ध सब्सिडी लागू की गई है:
    • वर्ष 1: ₹10 प्रति पशु/दिन
    • वर्ष 2: ₹20 प्रति पशु/दिन
    • वर्ष 3: ₹30 प्रति पशु/दिन
    • वर्ष 4 के बाद: ₹35 प्रति पशु/दिन
  • अवसंरचना सहायता: प्रत्येक केंद्र के रखरखाव और मरम्मत के लिये सरकार प्रति वर्ष ₹5 लाख प्रदान करेगी।
  • देखभालकर्त्ताओं के लिये मानदेय: चरवाहों (₹10,916) और गौ-सेवकों (₹13,126) के लिये मासिक भुगतान का प्रावधान किया गया है।
  • प्रशिक्षण केंद्र: ‘सुरभि गौधाम’ के रूप में ये केंद्र पशुपालन प्रशिक्षण हब के साथ-साथ वर्मीकम्पोस्ट और प्राकृतिक कीटनाशकों जैसे मूल्यवर्द्धित उत्पादों के उत्पादन केंद्र के रूप में भी कार्य करेंगे।
  • महत्त्व: यह योजना स्थानीय स्वरोज़गार को बढ़ावा देने हेतु गो-आधारित सूक्ष्म उद्यमिता और जैविक कृषि की दिशा में परिवर्तन को दर्शाती है।
    • सार्वजनिक सुरक्षा: राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर आवारा पशुओं से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को कम करने का लक्ष्य है।
  • शासन: यह योजना पंजीकृत समितियों और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) के माध्यम से सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन के उपयोग को दर्शाती है।

और पढ़ें: NGO, सूक्ष्म-उद्यमिता, जैविक कृषि 

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