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उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के पहले आर्थिक सर्वेक्षण में 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का रोडमैप पेश किया

  • 12 Feb 2026
  • 46 min read

चर्चा में क्यों?

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य विधानमंडल में अपना पहला आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 प्रस्तुत किया, जिसमें निवेश-प्रेरित विकास, सुदृढ़ अवसंरचना, क्षेत्रीय विस्तार और नीतिगत सुधारों के माध्यम से देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने के लिये डेटा-आधारित रूपरेखा प्रस्तुत की गई है।

मुख्य बिंदु:

समष्टि-आर्थिक परिदृश्य 

संकेतक

आँकड़ा/मूल्य

प्रवृत्ति / टिप्पणी

GSDP (वर्तमान 2024-25)

₹30.25 लाख करोड़

वर्ष 2016-17 (₹13.30 लाख करोड़) से अर्थव्यवस्था दोगुनी।

GSDP लक्ष्य (2025-26)

₹36.00 लाख करोड़

लगभग 12% की अनुमानित वृद्धि दर।

वृद्धि दर (CAGR)

10.8%

वर्ष 2016-17 से 2024-25 के बीच गणना की गई।

भारत में योगदान

9.1% (2024-25)

वर्ष 2016-17 के 8.6% से वृद्धि।

प्रति व्यक्ति आय

₹1,09,844 (2024-25)

वर्ष 2016-17 के ₹54,564 से दोगुनी।

लक्षित प्रति व्यक्ति आय

₹1,20,000

वित्तीय वर्ष 2025-26 का लक्ष्य।

  • लक्षित अर्थव्यवस्था का आकार: सर्वेक्षण के अनुसार, निवेश, अवसंरचना और उत्पादकता को सुदृढ़ करते हुए मध्यम अवधि में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर (लगभग ₹83 लाख करोड़) तक पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • GSDP वृद्धि: उत्तर प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 10.8% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ा है, जो वर्ष 2016-17 में ₹13.30 लाख करोड़ से बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹30.25 लाख करोड़ हो गया है और वर्ष 2025-26 में ₹36 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।
  • निवेश पाइपलाइन: राज्य ने औद्योगिक प्रस्तावों के माध्यम से ₹50 लाख करोड़ से अधिक की निवेश पाइपलाइन तैयार की है, जो घरेलू और वैश्विक निवेशकों की मज़बूत रुचि को दर्शाती है।
  • अवसंरचना पर ध्यान:
    • उत्तर प्रदेश स्वयं को भारत के एक्सप्रेसवे हब के रूप में स्थापित कर रहा है, जहाँ 22 एक्सप्रेसवे हैं। राज्य के पास देश का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और वह अपने विमानन पारितंत्र का विस्तार कर 24 हवाई अड्डों तक पहुँचाने की योजना बना रहा है, जिनमें पाँच अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल होंगे।
  • औद्योगिक विविधीकरण:
    • पंजीकृत कारखानों की संख्या 30,000 से अधिक हो गई है, जबकि औद्योगिक सकल मूल्य संवर्द्धन (GVA) में 25% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक है।
    • क्षेत्रीय हब विकसित किये जा रहे हैं (जैसे—लखनऊ में AI, कानपुर में ड्रोन निर्माण, नोएडा में IT और इलेक्ट्रॉनिक्स)।
    • डिजिटल क्षेत्र में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पारितंत्र में चौथे स्थान पर है।
    • क्लस्टर-आधारित विकास:
      • लखनऊ: AI सिटी एवं कैपिटल रीजन।
      • कानपुर: ड्रोन निर्माण एवं परीक्षण हब।
      • नोएडा: IT, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं डेटा सेंटर हब।
      • बुंदेलखंड: रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर।
  • कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की वृद्धि:
    • कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश अग्रणी बना हुआ है और राज्य देश का सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक है। सिंचाई, फसल विविधीकरण और सहायता कार्यक्रमों के माध्यम से उत्पादकता तथा किसानों की आय में वृद्धि हुई है।
    • दूध उत्पादन: भारत के कुल दूध उत्पादन में 15.66% योगदान (देश में सर्वाधिक)।
    • राष्ट्रीय हिस्सेदारी: भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश का 20.6% योगदान।
    • रैंकिंग: उत्तर प्रदेश देश में गन्ना, दूध और आलू का सबसे बड़ा उत्पादक है।
    • विशेष ध्यान: लखनऊ में सीड पार्क (बीज पार्क) की स्थापना और फसल विविधीकरण (दलहन/तिलहन मिशन) पर ज़ोर।
    • उत्पादकता: प्रति हेक्टेयर सकल मूल्य संवर्द्धन (GVA) वर्ष 2017-18 के ₹0.98 लाख से बढ़कर 2024-25 में ₹1.73 लाख हो गया है।
      • फसल तीव्रता बढ़कर 193.7% हो गई है।
    • सिंचाई: वर्ष 2024-25 में सिंचित क्षेत्र बढ़कर 2.76 करोड़ हेक्टेयर हो गया है।
  • सार्वजनिक वित्त एवं राजकोषीय स्थिति:
    • राज्य का बजट नौ वर्षों में दोगुने से अधिक बढ़कर वर्ष 2025-26 में ₹8.33 लाख करोड़ हो गया है। स्वयं के कर राजस्व में 2.5 गुना वृद्धि हुई है तथा ऋण-GSDP अनुपात अनुकूल 28% पर है।
    • राजकोषीय घाटा: GSDP के 3% पर सफलतापूर्वक सीमित रखा गया है।
    • राजस्व अधिशेष: GSDP का 2.6% अनुमानित, जो सुदृढ़ वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
    • कर राजस्व: राज्य का स्वयं का कर राजस्व 2.5 गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ हो गया है।
      • विशेष रूप से उत्पाद शुल्क राजस्व में एक दशक से कम समय में तीन गुना वृद्धि हुई है।
    • ऋण स्थिति: ऋण-GSDP अनुपात 28% है, जो राष्ट्रीय औसत से कम है और पूंजीगत व्यय के लिये पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।
  • मानव विकास संकेतक:
    • प्रति व्यक्ति आय बढ़कर वर्ष 2024-25 में ₹1,09,844 हो गई है और वर्ष 2025-26 में ₹1,20,000 तक पहुँचने का अनुमान है।
    • उत्तर प्रदेश आयुष्मान भारत और जन-धन खातों के कवरेज में भी अग्रणी है, जो सामाजिक समावेशन में सुधार को दर्शाता है।
  • निर्यात एवं डिजिटल प्रदर्शन:
    • राज्य ने निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 में चौथा स्थान प्राप्त किया है, भू-आवेष्ठित (Landlocked) राज्यों में प्रथम स्थान पर रहा है तथा ई-प्रॉसिक्यूशन में राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया है। साथ ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली का विस्तार किया गया है।
  • ऊर्जा एवं शहरी नियोजन:
    • स्थापित क्षमता में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है। लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन और 100 नए टाउनशिप विकसित करने की योजनाएँ तीव्र शहरीकरण तथा भावी जनसांख्यिकीय चुनौतियों के प्रबंधन हेतु बनाई गई हैं।
  • ट्रिपल ‘S’ फ्रेमवर्क: सरकार की निवेश रणनीति सुरक्षा, स्थिरता और गति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था में सुधार, नीतिगत सुनिश्चितता तथा निवेश मित्र (Nivesh Mitra) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से त्वरित स्वीकृतियाँ प्रदान करना है।
  • भविष्य की रूपरेखा एवं शहरीकरण:
    • शहरीकरण: वर्ष 2046 तक शहरी जनसंख्या 35.8% तक पहुँचने का अनुमान है।
    • नए विकास कार्य:
      • लखनऊ स्टेट कैपिटल रीजन का गठन।
      • शहरी विस्तार को प्रबंधित करने के लिये 100 नए टाउनशिप विकसित करने की योजना।
  • विकास की कार्ययोजना: आर्थिक सर्वेक्षण वार्षिक आर्थिक मूल्यांकन को संस्थागत रूप प्रदान करता है और सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये नीतिगत योजना, राजकोषीय प्रबंधन तथा प्रदर्शन निगरानी हेतु एक व्यापक, डेटा-आधारित रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
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