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मध्य प्रदेश

मुख्यमंत्री ने किया ‘1857 की क्रांति और नीमच’ पुस्तक का विमोचन

  • 24 Dec 2021
  • 2 min read

चर्चा में क्यों?

23 दिसंबर, 2021 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कक्ष में डॉ. सुरेंद्र शक्तावत द्वारा लिखित पुस्तक ‘अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति और नीमच’ पुस्तक का विमोचन किया।

प्रमुख बिंदु

  • पुस्तक के लेखक डॉ. सुरेंद्र शक्तावत इतिहास संकलन समिति नीमच के संयोजक तथा नीमच ज़िला पुरातत्त्व संघ के सदस्य हैं। शक्तावत बालकवि बैरागी महाविद्यालय कनावटी के प्राचार्य हैं।
  • डॉ. शक्तावत ने ग्राम गाथा पिपलिया रावजी, इतिहास की नजर में नीमच ज़िले के स्वतंत्रता सेनानी, मालवा का लोकनाट्य मंच और अन्य विधाएँ, मालवा की चित्रकला आदि पुस्तकें लिखी हैं।
  • प्रस्तुत ग्रंथ में अंग्रेज़ों की क्रूरता का प्रतीक भूमिया खेड़ी का अग्निकांड, निंबाहेड़ा के निर्दोष पटेल ताराचंद की हत्या और तात्या की फाँसी पर अंग्रेज़ी न्याय की स्व-प्रमाणित पोल खोलने का प्रयत्न कर लेखक ने सिद्ध किया है कि नीमच की क्रांति केवल सैन्य विद्रोह न होकर जनक्रांति थी, जिसमें स्थानीय जन-समुदाय की भी भागीदारी रही।
  • मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे के अनुसार डॉ. सुरेंद्र शक्तावत द्वारा लिखित पुस्तक क्षेत्रीय इतिहास का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में नीमच के क्रांतिकारियों की विशिष्ट भूमिका रही। 
  • मध्य प्रदेश में सर्वप्रथम क्रांति का सूत्रपात नीमच की लाल माटी से 3 जून, 1857 को मोहम्मद अली बेग ने किया था। क्रांतिवीर अलीबेग नीमच से विजय पताका लेकर चित्तौड़, बनेड़ा, नसीराबाद, देवली होते हुए आगरा पहुँचे, जहाँ अंग्रेज़ों पर विजय प्राप्त की।
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