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मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सुप्रीम लीडर
- 10 Mar 2026
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चर्चा में क्यों?
मोजतबा खामेनेई एक ईरानी धर्मगुरु हैं और इस्लामिक गणराज्य ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर हैं। उन्हें 8 मार्च, 2026 को इस पद पर नियुक्त किया गया। उन्होंने अपने पिता अली खामेनेई का स्थान लिया, जो वर्ष 1989 से देश पर शासन कर रहे थे।
मुख्य बिंदु:
- प्रारंभिक जीवन: मोजतबा खामेनेई का जन्म ईरान के मशहद शहर में हुआ था।
- उन्होंने शिया विद्वता के प्रमुख केंद्र कोम के धार्मिक शिक्षण संस्थानों (सेमिनरी) में इस्लामी धर्मशास्त्र का अध्ययन किया।
- ईरान–इराक युद्ध के दौरान उन्होंने कथित रूप से स्वयंसेवी बलों में सेवा दी।
- सैन्य संबंध: उन्होंने वर्ष 1987 में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में शामिल होकर ईरान–इराक युद्ध के अंतिम वर्षों में सेवा की। उनके IRGC और खुफिया एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहरे एवं दीर्घकालिक संबंध माने जाते हैं।
- राजनीतिक भूमिका: माना जाता है कि वर्ष 2005 और 2009 में कट्टरपंथी नेता महमूद अहमदीनेजाद के उभार के पीछे वे प्रमुख रणनीतिकार थे।
- विरोध का दमन: आलोचकों और सुधारवादी नेताओं ने लंबे समय से उन पर 2009 के ग्रीन मूवमेंट तथा बाद के सरकार-विरोधी प्रदर्शनों पर हुए हिंसक दमन की योजना बनाने का आरोप लगाया है।
- वंशानुगत उत्तराधिकार: उनका चयन ऐतिहासिक और विवादास्पद माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 1979 की ईरानी क्रांति ने वंशानुगत शासन को अस्वीकार किया था।
- इस प्रकार की ‘वंशवादी’ व्यवस्था की ओर यह बदलाव देश के भीतर असंतोष को और बढ़ा सकता है।
- कट्टर नीति की निरंतरता: विशेषज्ञों के अनुसार उनका नेतृत्व यह संकेत देता है कि ईरान अपनी टकरावपूर्ण नीतियों को जारी रख सकता है।
- उन्हें अपने पिता की तुलना में परमाणु हथियार विकसित करने के प्रति अधिक समर्थक माना जाता है।
- भूराजनैतिक तनाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें ‘कमज़ोर नेता’ बताते हुए इस चयन को ‘अस्वीकार्य’ कहा है, जबकि इज़राइल ने संकेत दिया है कि उनका उत्तराधिकारी अभी भी ‘निशाना बनाए जाने योग्य’ है।
- इसके विपरीत रूस और चीन ने ईरानी संविधान के आधार पर उनकी नियुक्ति का समर्थन व्यक्त किया है।