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UP में कालिंजर किला क्षेत्र राष्ट्रीय भू-धरोहर स्थल घोषित
- 25 Mar 2026
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चर्चा में क्यों?
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने आधिकारिक रूप से उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले में स्थित कालिंजर किले के आसपास के पहाड़ी क्षेत्र को राष्ट्रीय भू-धरोहर स्थल घोषित किया है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: यह स्थल उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले में स्थित है और विंध्य पर्वतमाला का हिस्सा है, जो अपनी प्राचीन शैल संरचनाओं के लिये प्रसिद्ध है।
- भूवैज्ञानिक महत्त्व: यहाँ ‘एपार्कियन अनकन्फॉर्मिटी’ पाई जाती है, जहाँ 2.5 बिलियन वर्ष पुराने बुंदेलखंड ग्रेनाइट के ऊपर 1.2 बिलियन वर्ष पुराने कैमूर सैंडस्टोन की परत है, जो पृथ्वी के प्रारंभिक इतिहास के अध्ययन के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत:
- शासक वंश: इस किले पर गुप्त, वर्धन, चंदेल, मुगल, मराठा और ब्रिटिश सहित कई वंशों का शासन रहा।
- चंदेल स्थापत्य: चंदेल शासकों ने किले का महत्त्वपूर्ण विकास किया और ‘कालंजराधिपति’ की उपाधि धारण की।
- महत्त्वपूर्ण मंदिर: किले में प्रसिद्ध नीलकंठ महादेव मंदिर स्थित है, जो भगवान शिव को समर्पित है और चंदेल शासक परमादित्य देव द्वारा निर्मित है।
- पौराणिक महत्त्व: मान्यता के अनुसार, भगवान शिव ने समुद्र मंथन के दौरान निकले विष का पान कालिंजर में किया था, इसी कारण मंदिर को ‘नीलकंठ’ (नीले कंठ वाले) कहा जाता है।
- प्रमुख स्मारक: हनुमान द्वार, लाल दरवाज़ा, गणेश द्वार, राजा अमन सिंह महल, रानी महल, पाताल गंगा और सीता कुंड।
- शेर शाह सूरी की 1545 में कालिंजर किले की घेराबंदी के दौरान मृत्यु हुई थी।
- पर्यटन संभावनाएँ: इस विरासत का दर्जा मिलने से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है तथा यह शोधकर्त्ताओं, विद्यार्थियों और भूविज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों को आकर्षित करेगा।
- यह स्थल कालिंजर, खजुराहो और चित्रकूट को जोड़ने वाले व्यापक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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