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भारत नागोया प्रोटोकॉल के तहत अनुपालन प्रमाण-पत्र जारी करने में विश्व में अग्रणी

  • 01 Apr 2026
  • 17 min read

चर्चा में क्यों?

भारत नागोया प्रोटोकॉल के अंतर्गत पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS) ढाँचे के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाण-पत्र (IRCC) जारी करने में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश के रूप में उभरा है।

मुख्य बिंदु

  • परिचय: भारत ने कुल 6,311 में से 3,561 IRCC जारी किये हैं, जो विश्व के कुल प्रमाण-पत्रों का 56% से अधिक है, जिससे यह प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में अग्रणी देश बन गया है।
    • ये प्रमाण-पत्र ABS क्लियरिंग-हाउस में अभिलेखित किये जाते हैं, जो आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता तथा उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने हेतु एक वैश्विक मंच है।
  • सीमित वैश्विक भागीदारी: ABS क्लियरिंग-हाउस प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत 142 देशों में से अब तक केवल 34 देशों ने IRCC जारी किये हैं।
    • भारत के बाद सर्वाधिक प्रमाण-पत्र जारी करने वाले देशों में फ्राँस (964), स्पेन (320), अर्जेंटीना (257), पनामा (156) तथा केन्या (144) शामिल हैं।
  • IRCCs का उद्देश्य: IRCCs इस बात का आधिकारिक प्रमाण होते हैं कि पूर्व सूचित सहमति (PIC) प्राप्त कर ली गई है तथा परस्पर सहमति की शर्तें (MAT) आनुवंशिक संसाधनों के उपयोगकर्त्ताओं और प्रदाताओं के बीच स्थापित की गई हैं।
    • ये प्रमाण-पत्र अनुसंधान और नवाचार से लेकर वाणिज्यिक अनुप्रयोगों तक आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग का अनुगमन (tracking) करने में सहायता करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभों का न्यायसंगत वितरण प्रदाता देश के साथ किया जाए।
  • पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS) ढाँचा
    • ABS ढाँचा यह सुनिश्चित करता है कि जब जैविक संसाधनों जैसे पौधों तथा सूक्ष्मजीवों का उपयोग कंपनियों या शोधकर्त्ताओं द्वारा किया जाता है तो उसके लाभों को उन स्थानीय समुदायों और किसानों के साथ साझा किया जाए, जो इन संसाधनों का संरक्षण करते हैं।
  • नागोया प्रोटोकॉल
    • यह जैव विविधता अभिसमय (CBD) के अंतर्गत एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न लाभों का न्यायसंगत एवं समान वितरण सुनिश्चित करना है।
    • नागोया प्रोटोकॉल को 29 अक्तूबर, 2010 को जापान के नागोया में अंगीकृत किया गया था।
    • प्रवर्तन (Came into Force): 12 अक्तूबर, 2014।
    • भारत ने इस प्रोटोकॉल का अनुमोदन (ratification) वर्ष 2012 में किया।

और पढ़ें: जैव विविधता अभिसमय (CBD) , नागोया प्रोटोकॉल, पहुँच और लाभ-साझाकरण (ABS)

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