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उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन कानून के अंतर्गत अंतरधार्मिक विवाहों पर प्रतिबंध नहीं: उच्च न्यायालय

  • 24 Feb 2026
  • 19 min read

चर्चा में क्यों?

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम न तो अंतरधार्मिक विवाहों पर प्रतिबंध लगाता है और न ही युगलों को लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहने से रोकता है।

मुख्य बिंदु:

  • न्यायालय का निर्णय: उच्च न्यायालय ने कहा कि सहमति देने वाले वयस्कों के बीच अंतरधार्मिक विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप धर्म संपरिवर्तन कानून द्वारा प्रतिबंधित नहीं हैं।
    • न्यायालय ने इस तर्क पर ज़ोर दिया कि यह कानून केवल उन मामलों में लागू होता है, जहाँ वास्तविक धर्म संपरिवर्तन बल, धोखाधड़ी, दबाव, प्रलोभन या समान अनुचित तरीकों से कराया गया हो।
  • मौलिक अधिकारों की पुष्टि: पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समता का अधिकार), अनुच्छेद 15 (भेदभाव का निषेध) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लेख करते हुए यह स्पष्ट किया कि वयस्कों को धर्म की परवाह किये बिना अपने जीवनसाथी का चयन करने का अधिकार है।
  • धर्म संपरिवर्तन की आवश्यकता: न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धर्म संपरिवर्तन-विरोधी कानून के लागू होने के लिये धर्म परिवर्तन के ठोस प्रमाण होने चाहिये। केवल किसी अन्य धर्म के व्यक्ति से विवाह करना या उसके साथ रहना अपने आप में धर्म संपरिवर्तन नहीं माना जाएगा।
  • पृष्ठभूमि: यह निर्णय 12 याचिकाओं के एक समूह से उत्पन्न हुआ, जो सामाजिक और पारिवारिक विरोध के बीच संरक्षण की मांग करने वाले अंतरधार्मिक युगलों द्वारा दायर की गई थी।
    • न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि इन मामलों में किसी भी शिकायतकर्त्ता ने बलपूर्वक या धोखाधड़ी से कराए गए धर्म संपरिवर्तन का आरोप नहीं लगाया था।
    • उच्च न्यायालय पूर्व में भी अंतरधार्मिक युगलों को संरक्षण प्रदान करता रहा है और लगातार यह मानता आया है कि वयस्कों के विवाह संबंधी चयन में परिवार के सदस्य या राज्य बिना किसी विधिक आधार के हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
  • प्रभाव: यह स्पष्टीकरण धर्म संपरिवर्तन-विरोधी प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकता है, ताकि अंतरधार्मिक युगलों को परेशान न किया जा सके और यह सुनिश्चित करता है कि कानून केवल बलपूर्वक या धोखाधड़ी से किये गए धर्म संपरिवर्तन के मामलों में ही सख्ती से लागू हो।
  • महत्त्व: यह निर्णय स्पष्ट करता है कि सहमति देने वाले वयस्कों के बीच अंतरधार्मिक विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप उत्तर प्रदेश के धर्म संपरिवर्तन-विरोधी कानून का उल्लंघन नहीं करते। इससे संवैधानिक संरक्षण की पुष्टि होती है और कानून की व्याख्या को सीमित व स्पष्ट किया जाता है।

और पढ़ें: उच्च न्यायालय, मौलिक अधिकार, उत्तर प्रदेश धर्म संपरिवर्तन विरोधी कानून

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