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टोंगा में ज्वालामुखी विस्फोट

  • 17 Jan 2022
  • 5 min read

हाल ही में टोंगा के दक्षिणी प्रशांत द्वीप में एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ है, जिससे प्रशांत महासागर के चारों ओर सुनामी लहरें उठी रही हैं।

  • टोंगा द्वीप समूह ‘रिंग ऑफ फायर’ में मौजूद है, जो कि प्रशांत महासागर के बेसिन को घेरने वाली ऊँची ज्वालामुखी और भूकंपीय गतिविधि की परिधि है।

Volcanic-Eruption

प्रमुख बिंदु

  • परिचय
    • यह एक अंडर-सी ज्वालामुखी विस्फोट है, जिसमें दो छोटे निर्जन द्वीप, हुंगा-हापाई और हुंगा-टोंगा शामिल हैं।
    • पिछले कुछ दशकों में हुंगा-टोंगा-हुंगा-हापाई में नियमित रूप से ज्वालामुखी विस्फोट हो रहा है।
      • वर्ष 2009 और वर्ष 2014-15 की घटनाओं के दौरान भी मैग्मा और भाप के गर्म जेट के साथ विस्फोट हुए थे। लेकिन हालिया घटनाओं (जनवरी 2022) की तुलना में ये विस्फोट काफी छोटे थे।
    • इस बार का विस्फोट उन बड़े विस्फोटों में से एक है, जो प्रत्येक हज़ार वर्ष में रिकॉर्ड किये जाते हैं।
    • इसके अत्यधिक विस्फोटक होने का एक कारण ‘फ्यूल-कूलेंट इंटरेक्शन’ है।
  • प्रभाव:
    • विशाल ज्वालामुखी विस्फोट कभी-कभी अस्थायी वैश्विक शीतलन का कारण बन सकते हैं क्योंकि सल्फर डाइऑक्साइड को समताप मंडल में पंप किया जाता है। लेकिन टोंगा विस्फोट के मामले में प्रारंभिक उपग्रह माप से संकेत मिलता है कि सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा का केवल 0.01 सेल्सियस वैश्विक औसत शीतलन पर एक छोटा प्रभाव डालेगा।
    • विस्फोट ने वायुमंडलीय दबाव को बदल दिया जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका में सिएटल में कोहरे को दूर करने में कुछ समय के लिये मदद की होगी।
    • इन लहरों ने प्रशांत को पार किया और इनकी वजह से पेरू में दो लोग डूब गए तथा न्यूज़ीलैंड एवं सांताक्रूज़, कैलिफोर्निया में मामूली क्षति हुई।
    • यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने अनुमान लगाया है कि विस्फोट 5.8 तीव्रता के भूकंप के बराबर था।

ज्वालामुखी

  • ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह में एक उद्घाटन या टूटन है जो मैग्मा के रूप में गर्म तरल और अर्द्ध-तरल चट्टानों, ज्वालामुखीय राख और गैसों के रूप में बहार निकलता है।
  • ज्वालामुखीय हॉटस्पॉट वे स्थान होते हैं जहांँ पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट आपस में मिलती हैं।
  • ज्वालामुखी विस्फोट तब होता है जब ज्वालामुखी से लावा और गैस कभी-कभी विस्फोटक रूप में बहार निकलती है।

समुद्र के नीचे ज्वालामुखी:

  • समुद्र के नीचे ज्वालामुखी विस्फोट एक ऐसे ज्वालामुखी में होता है जो समुद्र की सतह के नीचे स्थित होता है। समुद्र के भीतर अनुमानित एक मिलियन ज्वालामुखी हैं और उनमें से अधिकांश टेक्टोनिक प्लेटों के पास स्थित हैं।
  • इन छिद्रों से लावा के अलावा राख भी निकलती है। ये समुद्र के तल पर जमा हो जाते हैं और समुद्री टीले का निर्माण करते हैं - पानी के नीचे स्थित पर्वत जो समुद्र के तल पर निर्मित होते हैं लेकिन पानी की सतह तक नहीं पहुंँचते हैं।

ईंधन-शीतलक इंटरैक्शन

  • यदि मैग्मा समुद्र के पानी में धीरे-धीरे ऊपर उठता है, तो लगभग 1200 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी मैग्मा तथा पानी के बीच भाप की एक पतली परत बन जाती है। यह मैग्मा की बाहरी सतह को ठंडा करने के लिये इन्सुलेशन की एक परत प्रदान करता है। लेकिन यह प्रक्रिया तब काम नहीं करती जब तक कि ज्वालामुखी गैस से भरी जमीन से मैग्मा का विस्फोट न हो।
  • जब मैग्मा तेज़ी से पानी में प्रवेश करता है तो भाप की परत जल्द ही बाधित हो जाती है, जिससे गर्म मैग्मा ठंडे पानी के सीधे संपर्क में आ जाता है।
  • यह एक रासायनिक विस्फोटों के समान है।
  • अत्यधिक हिंसक विस्फोट मैग्मा को अलग कर देता हैं।
  • एक शृंखला प्रतिक्रिया शुरू होती है, नए मैग्मा के टुकड़े पानी के लिये ताज़ा गर्म आंतरिक सतहों को उज़ागर करते हैं और विस्फोट अंततः ज्वालामुखी कणों को बाहर निकालते हैं तथा सुपरसोनिक गति के साथ विस्फोट करते हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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