हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:
झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य प्रतियोगिता परीक्षा 2016 -परीक्षाफलछत्तीसगढ़ पीसीएस प्रश्नपत्र 2019छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा, 2019 (महत्त्वपूर्ण अध्ययन सामग्री).छत्तीसगढ़ पी.सी.एस. प्रारंभिक परीक्षा – 2019 सामान्य अध्ययन – I (मॉडल पेपर )
हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स (Hindi Literature: Pendrive Course)
मध्य प्रदेश पी.सी.एस. (प्रारंभिक) परीक्षा , 2019 (महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री)मध्य प्रदेश पी.सी.एस. परीक्षा मॉडल पेपर.Download : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (प्रवर) प्रारंभिक परीक्षा 2019 - प्रश्नपत्र & उत्तर कुंजीअब आप हमसे Telegram पर भी जुड़ सकते हैं !यू.पी.पी.सी.एस. परीक्षा 2017 चयनित उम्मीदवार.UPSC CSE 2020 : प्रारंभिक परीक्षा टेस्ट सीरीज़

मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • समानता. स्वतंत्रता एवं भातृत्व ने फ्रांसीसी क्रांति के प्रथम चरण और साथ ही द्वितीय चरण को भी नेतृत्व प्र्दान किया टिप्पणी करें।

    12 May, 2020 सामान्य अध्ययन पेपर 1 इतिहास

    उत्तर :

    हल करने का दृष्टिकोण:

    • भूमिका

    • फ्रांसीसी क्रांति में समानता, स्वतंत्रता एवं भातृत्व की भूमिका

    • निष्कर्ष

    1789 ई. में सम्पन्न फ्रांसीसी क्रांति मुख्यत: निरंकुश, अराजक राजतंत्र के विरुद्ध प्रतिक्रिया थी जिसने जनता ने अपने अधिकारों को पाने संगठित संघर्ष किया गया तथा सत्ता परिवर्तन कर जनरल असेम्बली या काउन्सिल के शासन को स्थापित किया।

    इस क्रांति का सूत्र वाक्य स्वतंत्रता, समानता तथा भ्रातृत्व था। जहाँ स्वतंत्रता से आशय स्पष्ट रूप से रूसो जैसे विचारकों का समर्थन था जहाँ मनुष्य को जन्म से ही स्वतंत्र माना गया था। इसके अलावा अन्य दार्शनिकों- जैसे वाल्टेयर, माण्टेम्यू आदि के विचार भी वास्तविक अधिकार के प्रति जनता को प्रेरित करने में सफल रहे तथा स्वतंत्रता बोध के आधार पर क्रांति को संगठित करने में सफल रहे।

    मध्यम वर्गीय चिंतकों का मानना था कि उच्च वर्गीय पादरी हो या सामंत कोई भी वर्ग विशेष किसी भी प्रकार के विशेषाधिकार तथा राज्य हवा के योग्य नहीं है। बल्कि राज्य के द्वारा सभी को समान अधिकार प्रदान किये जाने चाहिये।

    भ्रातृत्व के सिद्धांत से आशय वर्ग-विभेद होते हुए भी सभी के मध्य समतामूलक तथा मानवतावादी विचारों का प्रसार किया जाना चाहिये। इन सम्मिलित उद्देश्यों को लेकर फ्रांसीसी क्रांति के प्रथम चरण को नेतृत्व प्रदान किया गया।

    किंतु सत्ता परिवर्तन के बाद असेम्बली के द्वारा जब पुन: राजतंत्र की कमियों को स्वीकार किया जाने लगा तो जनता उद्वेलित हुई जिसका लाभ नेपोलियन ने उठाया। नेपोलियन ने पुन: स्वतंत्रता, समानता बंधुत्व का नारा देकर अराजक राज्य को समाप्त करने का प्रयास किया जिसमें नेपोलियन सफल हुआ किंतु जनता को पुन: निराशा ही हाथ लगी क्योंकि नेपोलियन ने सभी शक्तियों का अधिग्रहण कर निरंकुश राजतंत्र की स्थापना कर दी।

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close