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मेन्स प्रैक्टिस प्रश्न

  • यद्यपि शेरशाह का शासनकाल काफी छोटा था परंतु वह भारतीय इतिहास में अपने सुधाराें के लिये जाना जाता है, जो कि शासन के प्रत्येक पहलू को स्पर्श करता है। चर्चा करें।

    13 Dec, 2019 वैकल्पिक विषय इतिहास

    उत्तर :

    प्रश्न विच्छेद

    • कथन शेरशाह द्वारा अपने शासनकाल में किये गए सुधारों से संबंधित है।

    हल करने का दृष्टिकोण

    • शेरशाह के शासनकाल के विषय में संक्षिप्त उल्लेख के साथ परिचय लिखिये।

    • शेरशाह के शासनकाल में विभिन्न क्षेत्रों में किये गए सुधारों का उल्लेख कीजिये।

    • उचित निष्कर्ष लिखिये।

    शेरशाह सूरी को वास्तव में भारत के राष्ट्रीय नायकों में से एक माना जाता है। इसने अपने शासनकाल की पाँच वर्ष की एक छोटी सी अवधि (1540-1545) में अपने सुधारों के माध्यम से शासन के अधिकांश पहलुओं को स्पर्श किया।

    शेरशाह के शासनकाल में विभिन्न क्षेत्रों में किये गए सुधार निम्नलिखित रूपों में वर्णित हैं-

    केंद्र सरकार में कई विभाग शामिल थे। राज़ा को चार महत्त्वपूर्ण मंत्रियों की मदद मिलती थी। शेरशाह का साम्राज्य 47 सरकारों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सरकार कई परगनाओं में विभाजित थी। कई प्रशासनिक इकाइयाँ भी थीं जिन्हें इक्ता कहा जाता था।

    राज्य को औसत उत्पादन का एक-तिहाई हिस्सा प्राप्त होता था जिसका भुगतान नकद या फसल के रूप में किया जाता था। संपूर्ण खेती योग्य भूमि को अच्छी, मध्यम एवं खराब तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया था।

    शेरशाह सूरी ने कलकत्ता से पेशावर के बीच पुराने राजमार्ग ग्रांट ट्रंक रोड को पुन: चालू करवाया। शेरशाह ने सोनारगाँव से सिंध, आगरा से बुरहानपुर, जोधपुर से चित्तौड़ और मुल्तान से लाहौर तक चार महत्त्वपूर्ण राजमार्गों के निर्माण द्वारा संचार व्यवस्था को सुदृढ़ किया।

    पुलिस का पुनर्गठन कुशलता पूर्वक किया गया था जिसकी वजह से उसके शासन के दौरान अपराध कम होते थे। सैन्य प्रशासन का पुनर्गठन भी कुशलता से किया गया था। शेरशाह ने घोड़ों की ब्रांडिंग जैसे कई विचारों को अलाउद्दीन खिलजी से प्राप्त किया था।

    शेरशाह के शासनकाल में न्याय व्यवस्था के तहत खुद अपने कबीले के लोगों, रिश्तेदारों एवं अन्य लोगों के बीच भेदभाव न करने और सत्ताधारी वर्ग तथा अन्य लोगों द्वारा किये जाने वाले अत्याचारों को रोकने पर विशेष बल दिया गया था।

    शेरशाह के शासन के तहत भूमि राजस्व प्रशासन को अच्छी तरह से संगठित किया गया था और भूमि सर्वेक्षण ध्यानपूर्वक किया जाता था। उसके राजस्व सुधारों ने राज्य के राजस्व में वृद्धि की।

    शेरशाह ने ‘दाम’ कहे जाने वाले चांदी के नए सिक्के जारी किये जो 1835 ई. तक प्रचलन में थे। शेरशाह ने ‘रुपए’ (मुद्रा) का प्रारंभ किया और एक व्यवस्थित डाक सेवा की शुरुआत की।

    शेरशाह सूरी ने दिल्ली के निकट यमुना नदी के किनारे एक नया नगर बसाया था। वास्तुशिल्प के क्षेत्र में सूरी का उत्कृष्ट योगदान उसके द्वारा सादगी और लालित्य के मिश्रण से सासाराम, बिहार में बनाया गया स्वयं का मकबरा है।

    शेरशाह द्वारा किये गए सुधार उसे एक बहादुर, बुद्धिमान, व्यवहार कुशल सैन्य प्रशासक, पैनी राजनीतिक परख एवं नगर प्रशासन में असाधारण कौशल और योग्यता रखने वाला व्यक्ति सिद्ध करते हैं। कई मायनों में शेरशाह के सुधारों की प्रभावशीलता के विषय में स्पष्ट रूप से कुछ कह पाना कठिन है।

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