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08 Aug 2025
सामान्य अध्ययन पेपर 4
केस स्टडीज़
दिवस 47: आप महाराष्ट्र के एक सूखाग्रस्त ज़िले के ज़िला कलेक्टर हैं। पिछले एक साल में, इस क्षेत्र में अनियमित मानसून और कीटों के प्रकोप के कारण लगातार फसलें बर्बाद हुई हैं। कई किसान अनौपचारिक साहूकारों से लिये गए ऊँची ब्याज दरों वाले ऋण के बोझ तले दबे हैं, क्योंकि संस्थागत ऋण या तो उपलब्ध नहीं है या विलंब से उपलब्ध होता है।
पिछले हफ्ते, पास के एक गाँव के 42 वर्षीय किसान ने लगातार तीसरे सीज़न में कपास की फसल बर्बाद होने के बाद आत्महत्या कर ली। उसकी मौत के बाद स्थानीय किसान संघों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिन्होंने प्रशासन पर ग्रामीण संकट की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। मीडिया इस घटना को व्यापक रूप से कवर कर रही है और ज़िले को कृषि संकट का प्रतीक बता रही है। विपक्षी दलों ने सभी प्रभावित किसानों के लिये तत्काल मुआवज़ा और ऋण माफी की माँग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिये हैं।
आपकी प्रारंभिक जाँच से पता चलता है कि हालाँकि सरकारी फसल बीमा योजनाएँ मौजूद हैं, लेकिन ज़िले के अधिकतर किसान या तो इन योजनाओं के बारे में नहीं जानते या उन्हें दावा प्रक्रिया बहुत जटिल लगती है। मृतक किसान के परिवार का दावा है कि उन्होंने सहायता के लिये कृषि विभाग से कई बार संपर्क किया, लेकिन कोई सार्थक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
नागरिक समाज के कार्यकर्त्ता आपसे ऐसी आत्महत्याओं को रोकने के लिये कड़े कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं, जिनमें मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सरल ऋण सुविधा और तत्काल वित्तीय राहत शामिल है। हालाँकि, चालू वित्त वर्ष के लिये आपका बजटीय आवंटन पहले से ही सीमित है तथा किसी भी बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रतिबद्धता को राज्य के वित्त विभाग से प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय ने 48 घंटों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।A. इस मामले में नैतिक दुविधाओं और शासन संबंधी चुनौतियों का अभिनिर्धारण कीजिये।
B. कृषि संकट को दूर करने के लिये आप अल्पकालिक राहत और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों के बीच किस प्रकार संतुलन स्थापित करेंगे?
C. स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये आप क्या कदम उठाएँगे?
D. भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिये लोक सेवा के कौन-से मूल्य आपके निर्णयों का मार्गदर्शन करेंगे? (250 शब्द)उत्तर
हल करने का दृष्टिकोण:
- नैतिक दुविधाओं और शासन संबंधी चुनौतियों का अभिनिर्दाहर्ण कीजिये तथा उनका वर्गीकरण कीजिये।
- तत्काल राहत और दीर्घकालिक प्रणालीगत सुधारों के लिये एक द्वि-आयामी रणनीति का सुझाव दीजिये।
- सुनिश्चित कीजिये कि सिफारिशें संवैधानिक मूल्यों, कानूनी आदेशों और लोक प्रशासन की नैतिकता के अनुरूप हों।
परिचय
महाराष्ट्र के एक सूखाग्रस्त क्षेत्र के ज़िला कलेक्टर के रूप में, आपको लगातार फसल विफलताओं और एक किसान की आत्महत्या से उत्पन्न गंभीर कृषि संकट से निपटने का कार्य सौंपा गया है। यह स्थिति तत्काल राहत प्रदान करने और कृषि संकट के दीर्घकालिक समाधानों को लागू करने के बीच एक सावधानीपूर्वक संतुलन की मांग करती है, साथ ही प्रशासन के भीतर पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
हितधारक
हितधारक
भूमिका/प्रभाव
किसान
फसल विफलता, कर्ज और उपेक्षा के प्रत्यक्ष शिकार, जिससे भावनात्मक संकट उत्पन्न होता है।
मृतक किसान का परिवार
संकट से हुए मानवीय नुकसान का प्रतिनिधित्व करता है तथा जवाबदेही एवं सहायता की मांग करता है।
किसान संघ
किसानों के अधिकारों की अनुशंसा करते हैं, मुआवज़े और सुधारों की मांग करते हैं।
विपक्षी दल
प्रशासन की आलोचना करते हैं, मुआवज़े और तत्काल समाधान की मांग करते हैं।
स्थानीय प्रशासन
संकट से निपटने के लिये उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र।
मीडिया
मुद्दे को तूल देता है, जनता की धारणा को आकार देता है और अधिकारियों पर दबाव बढ़ाता है।
नागरिक समाज कार्यकर्त्ता
मानसिक स्वास्थ्य सहायता, सरलीकृत ऋण सुविधा और तत्काल वित्तीय राहत की माँग करते हैं।
राज्य वित्त विभाग
बजटीय आवंटन को नियंत्रित करता है और बड़ी वित्तीय प्रतिबद्धताओं का विरोध करता है।
मुख्यमंत्री कार्यालय
एक विस्तृत रिपोर्ट की मांग करता है तथा कार्रवाई को प्रभावित कर सकता है।
A. नैतिक दुविधाएँ और प्रशासनिक चुनौतियाँ
- नैतिक दुविधाएँ:
- किसान आत्महत्याएँ और ग्रामीण संकट: नैतिक दुविधा एक किसान की आत्महत्या पर प्रतिक्रिया देने में निहित है, जिसका गहन कारण आर्थिक तंगी है। मृतक के परिवार को न्याय सुनिश्चित करते हुए ऐसी त्रासदियों को और रोकने की नैतिक ज़िम्मेदारी है।
- सरकारी योजनाओं तक असमान पहुँच: कई किसान सरकारी फसल बीमा योजनाओं से अनजान रहते हैं या उन तक पहुँचने में असमर्थ रहते हैं। यह संचार, पारदर्शिता और समान सेवा वितरण में विफलता को उजागर करता है।
- राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव: तत्काल मुआवज़े और ऋण माफी के राजनीतिक दबाव को स्थायी, दीर्घकालिक नीतिगत सुधारों की आवश्यकता के साथ संतुलित करना नैतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है।
- शासन संबंधी चुनौतियाँ:
- बजटीय बाधाएँ: पहले से ही दबावग्रस्त बजट पर और बोझ डाले बिना किसानों की तत्काल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये सावधानीपूर्वक योजना एवं प्राथमिकता निर्धारण की आवश्यकता है।
- कमज़ोर प्रशासनिक प्रतिक्रिया: कृषि विभाग की ओर से समय पर प्रतिक्रिया न मिलना, और संकटग्रस्त किसानों को सहायता प्रदान करने में संस्थानों की विफलता, प्रणालीगत अक्षमता एवं जवाबदेही के मुद्दों को दर्शाती है।
B. अल्पकालिक राहत और दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों के बीच संतुलन
- अल्पकालिक राहत:
- तत्काल वित्तीय राहत: मृतक किसान के परिवार और संकटग्रस्त अन्य लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान की जानी चहिये, जैसे कि तत्काल बोझ कम करने के लिये छोटा मुआवज़ा और ब्याज-मुक्त ऋण।
- बीमा दावों को सरल बनाएँ: किसानों को फसल बीमा को समझने और उस तक पहुँचने में सहायता करने के लिये स्थानीय अधिकारियों को सक्रिय करना आवश्यक है तथा दावे दायर करने में सहायता प्रदान करनी चाहिये।
- मानसिक स्वास्थ्य सहायता: मानसिक आघात को कम करने के लिये प्रभावित परिवारों और किसानों के लिये अस्थायी मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन एवं परामर्श स्थापित किये जाने चाहिये।
- दीर्घकालिक सुधार:
- संस्थागत ऋण सुलभता: ऋण आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाकर संस्थागत ऋण की पहुँच को मज़बूत किया जाना चाहिये, विशेषकर उन किसानों के लिये जो अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर हैं।
- कृषि विविधीकरण: एक ही फसल पर निर्भरता कम करने के लिये फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाना चहिये, जो अनियमित मौसम के प्रति संवेदनशील होती है।
- जागरूकता अभियान: किसानों को सरकारी योजनाओं, बीमा और सतत् कृषि तकनीकों के बारे में शिक्षित करने के लिये जागरूकता कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिये।
C. स्थानीय प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये कदम
- कार्यनिष्पादन निगरानी: कृषि और ऋण वितरण से जुड़े अधिकारियों के लिये नियमित कार्यनिष्पादन समीक्षा की एक प्रणाली शुरू की जानी चाहिये ताकि त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।
- पारदर्शिता और शिकायत निवारण: एक पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित की जानी चाहिये जहाँ किसान आसानी से विलंबित या उपेक्षा की रिपोर्ट कर सकें और अपनी शिकायतों की प्रगति पर नज़र रख सकें।
- दक्षता को प्रोत्साहित करना: स्थानीय अधिकारियों के प्रदर्शन को किसानों के मुद्दों, जैसे बीमा दावों का समय पर निपटान और ऋण वितरण, के समाधान में उनकी दक्षता से जोड़ना आवश्यक है।
D. लोक सेवा को दिशा देने वाले नैतिक मूल्य
- सहानुभूति: एक लोक सेवक के रूप में, किसानों की पीड़ा को समझना और उनकी कठिनाइयों को कम करने के लिये करुणा के साथ कार्य करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- सत्यनिष्ठा: सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिये और प्रशासन के सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार को दूर करना चाहिये।
- जवाबदेही: प्रशासन को कृषि संकट से निपटने और किसानों का कल्याण सुनिश्चित करने की पूरी ज़िम्मेदारी लेनी चाहिये।
- न्याय: यह सुनिश्चित करना चाहिये कि प्रत्येक किसान, विशेषकर सीमांत समुदायों के किसानों को सरकारी सहायता एवं संसाधनों तक समान पहुँच प्राप्त हो।
- लोक कल्याण: प्राथमिक ध्यान समुदाय के समग्र कल्याण में सुधार लाने पर होना चाहिये, जिसमें तात्कालिक राहत और दीर्घकालिक संवहनीयता का संतुलन हो।
निष्कर्ष
यह मामला लोक प्रशासन में, विशेष रूप से संकट के समय में, नैतिक निर्णय लेने के महत्त्व को रेखांकित करता है। जैसा कि अल्बर्ट श्वित्ज़र ने ठीक ही कहा था, “मानव जीवन का उद्देश्य सेवा करना, दूसरों के प्रति करुणा और सहायता की इच्छाशक्ति प्रदर्शित करना है।” यह प्रकरण सीमांत समुदायों के संकट का समाधान करने और समाज की बेहतरी के लिये अल्पकालिक राहत एवं दीर्घकालिक सुधारों को लागू करने में एक लोक सेवक की मूल नैतिक ज़िम्मेदारियों को दर्शाता है।