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Mains Marathon

  • 08 Aug 2025 सामान्य अध्ययन पेपर 4 केस स्टडीज़

    दिवस 47: आप एक बड़े चुनाव से पहले एक महानगरीय शहर के ज़िला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत हैं। हाल के हफ्तों में, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डीपफेक वीडियो के प्रसार में तेज़ी आई है। इनमें से कुछ वीडियो में प्रमुख राजनीतिक नेताओं को भड़काऊ बयान देते हुए दिखाया गया है, जो उन्होंने वास्तव में कभी नहीं दिये, जबकि अन्य वीडियो मनगढ़ंत आपत्तिजनक कंटेंट के माध्यम से आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

    एक स्थानीय धार्मिक नेता को अपमानजनक टिप्पणी करते हुए दिखाने वाले एक वायरल डीपफेक वीडियो ने शहर के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न कर दिया है। पुलिस साइबर सेल ने राज्य के बाहर से संचालित कई अज्ञात खातों का स्रोत पता लगाया है, लेकिन अधिकार क्षेत्र के मुद्दों और कंटेंट के तेज़ी से प्रसार के कारण गिरफ्तारी कठिन होती जा रही है।

    नागरिक समाज समूह तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, उनका दावा है कि कार्रवाई न करने से गलत सूचना का प्रसार और सामाजिक अशांति बढ़ेगी। हालाँकि, राजनीतिक दल प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं, उनका कहना है कि कुछ कंटेंट को चुनिंदा रूप से लक्षित करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इस बीच, पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि डीपफेक पर अंकुश लगाने में अतिशयोक्ति का प्रयोग वैध असहमति को दबाने के बहाने के रूप में किया जा सकता है।

    इस जटिलता को और बढ़ाते हुए, आपके ज़िले के एक तकनीकी स्टार्टअप ने निशुल्क परीक्षण के लिये एक AI-आधारित पहचान उपकरण की पेशकश की है, लेकिन इसके लिये नागरिकों की तस्वीरों और आवाज़ के बड़े डेटासेट तक पहुँच की आवश्यकता होती है, जिससे गोपनीयता संबंधी चिंताएँ बढ़ जाती हैं। गृह मंत्रालय ने आपको यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि डिजिटल स्वतंत्रता को अनावश्यक रूप से प्रतिबंधित किये बिना विधि-व्यवस्था बनाए रखी जाए।

    1. इस मामले में शामिल नैतिक मुद्दों का अभिनिर्धारण कीजिये और इनकी विवेचना कीजिये।
    2. आप अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए डीपफेक के खतरे से निपटने के लिये एक संतुलित दृष्टिकोण किस प्रकार सुनिश्चित करेंगे?
    3. इस संकट से निपटने में लोक प्रशासन के कौन-से मूल्य आपका मार्गदर्शन करेंगे?  (250 शब्द)
    उत्तर

    हल करने का दृष्टिकोण

    • स्थिति से उत्पन्न तथ्यों, हितधारकों और नैतिक दुविधाओं का अभिनिर्धारण कीजिये।
    • लागू होने वाले प्रतिस्पर्द्धी मूल्यों और विधिक-नैतिक कार्यढाँचों का परीक्षण कीजिये।
    • संवैधानिक नैतिकता और प्रशासनिक मूल्यों के अनुरूप एक संतुलित, व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक कार्यवाही का सुझाव दीजिये।

    परिचय

    डीपफेक, जिसमें AI तकनीक का दुरुपयोग किया जाता है, गलत सूचना के प्रसार, मानहानि करने तथा सांप्रदायिक अशांति उत्पन्न कर सकते हैं। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में, संवैधानिक स्वतंत्रता, निजता और सार्वजनिक विश्वास की रक्षा करते हुए ऐसे खतरों पर अंकुश लगाना एक चुनौती है।

    हितधारक

    हितधारक

    हित/चिंता

    नागरिक (आम जनता)

    गलत सूचना के प्रसार से सुरक्षा, सांप्रदायिक सद्भाव, निजता के अधिकार

    लक्षित व्यक्ति (नेता, नागरिक)

    मानहानि और प्रतिष्ठा को नुकसान से सुरक्षा

    राजनीतिक दल

    निष्पक्ष राजनीतिक माहौल, पूर्वाग्रह से बचाव

    नागरिक समाज समूह

    गलत सूचना के विरुद्ध कार्रवाई, स्वतंत्रता का संरक्षण

    पत्रकार और मीडिया

    स्वतंत्र प्रेस की सुरक्षा, सेंसरशिप की रोकथाम

    पुलिस और साइबर सेल

    विधिक का प्रवर्तन, क्षेत्राधिकार संबंधी बाधाएँ

    तकनीकी स्टार्टअप

    AI टूल के परीक्षण का अवसर, व्यवसाय विस्तार

    गृह मंत्रालय

    विधि और व्यवस्था बनाए रखना, संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण

    A. इसमें सम्मिलित नैतिक मुद्दे

    • सत्य बनाम असत्य - डीपफेक प्रामाणिकता को कमज़ोर करते हैं, सार्वजनिक संचार में विश्वास को कम करते हैं।
    • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम हानि निवारण - अनुच्छेद 19(1)(a) को अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंधों के साथ संतुलित करना।
    • निजता बनाम सार्वजनिक सुरक्षा - पहचान उपकरणों के लिये डेटासेट तक पहुँच निजता का उल्लंघन (अनुच्छेद 21) कर सकती है।
    • पक्षपात बनाम तटस्थता - प्रवर्तन में राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना।
    • प्रौद्योगिकी नैतिकता - दुरुपयोग के विरुद्ध सुरक्षा उपायों के साथ AI का ज़िम्मेदारी से उपयोग करना।
    • विधि का शासन - अधिकार क्षेत्र और कानूनी आदेशों के भीतर कार्य करना।
    • पारदर्शिता और जवाबदेही - मनमाने सेंसरशिप से बचना।

    B. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए डीपफेक खतरे से निपटने के लिये संतुलित दृष्टिकोण।

    • तत्काल रोकथाम के उपाय: हानिकारक कंटेंट को तुरंत चिह्नित करने और हटाने के लिये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ समन्वय करना।
      • आधिकारिक माध्यमों से वायरल डीपफेक का खंडन करते हुए सार्वजनिक सलाह जारी करना।
      • सत्यापित, समय पर प्रति-सूचना के साथ तथ्य-जाँच प्रकोष्ठों की तैनाती करना।
    • विधिक और प्रक्रियात्मक कदम: साइबर अपराध और मानहानि के लिये आईटी अधिनियम, 2000 और IPC के प्रावधानों का उपयोग करना।
      • जाँच के लिये CrPC की धारा 166A और 166B के तहत अंतर-राज्यीय सहयोग का अनुरोध करना।
    • सुरक्षा उपायों के साथ तकनीकी समाधान: निजता की रक्षा के लिये अज्ञात डेटासेट या सिंथेटिक परीक्षण डेटा के साथ परीक्षण AI-आधारित पहचान उपकरण।
      • पूर्ण पैमाने पर तैनाती से पहले स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट सुनिश्चित करना।
    • हितधारक जुड़ाव: राजनीतिक तटस्थता सुनिश्चित करने के लिये बहुदलीय और नागरिक समाज की बैठकें आयोजित करना।
      • पारदर्शिता को बढ़ावा देने और अफवाहों को रोकने के लिये मीडिया ब्रीफिंग जारी रखना।
    • दीर्घकालिक उपाय: हेरफेर की गई सामग्री की पहचान करने के लिये डिजिटल साक्षरता अभियान।
      • डीपफेक विनियमन के लिये विधायी सुदृढ़ीकरण की सिफारिश करना।

    C. कार्रवाई का मार्गदर्शन करने के लिये लोक प्रशासन के मूल्य

    • सत्यनिष्ठा - राजनीतिक दबाव की परवाह किये बिना निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करना।
    • निष्पक्षता - साक्ष्य-आधारित निर्णय लेना, व्यक्तिगत या राजनीतिक पूर्वाग्रह से प्रभावित नहीं होना।
    • जवाबदेही - उठाए गए कदमों और तर्क का पारदर्शी संचार।
    • विधि का शासन - विधिक प्रावधानों और संवैधानिक आदेशों के भीतर सख्ती से कार्य करना।
    • सहानुभूति - लक्षित व्यक्तियों को हुए नुकसान और आघात का अभिनिर्धारण करना।
    • गैर-पक्षपात - सभी पक्षों और समुदायों के लिये समान व्यवहार।
    • विवेक - तात्कालिक जन सुरक्षा और दीर्घकालिक डिजिटल अधिकारों के बीच संतुलन।
    • जन सेवा के प्रति प्रतिबद्धता - सांप्रदायिक सद्भाव और नागरिक विश्वास को बनाए रखना।

    निष्कर्ष

    अंततः, डीपफेक की चुनौती से निपटने के लिये सत्य की रक्षा करते हुए स्वतंत्रता को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है। महात्मा गांधी के शब्दों में, “किसी त्रुटि का बार-बार प्रचार करने से वह सत्य नहीं बन जाती और न ही सत्य इसलिये त्रुटि बन जाता है क्योंकि कोई उसे देखता ही नहीं।” प्रशासन को सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और विवेक के साथ कार्य करते हुए डिजिटल सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता, दोनों को सुनिश्चित करना चाहिये।

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