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देश-देशांतर : आरटीआई के अधीन आरबीआई

  • 02 May 2019
  • 7 min read

संदर्भ

उच्चतम न्यायालय ने RBI को दिये आदेश में कहा है कि वह RTI के तहत बैंकों की वार्षिक वित्तीय निरीक्षण रिपोर्ट (Annual Financial Inspection Report-AFI) को सार्वजनिक करने से मना नहीं कर सकता। शीर्ष अदालत के मुताबिक ऐसी नीति सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का उल्लंघन है।

  • कोर्ट ने RBI को RTI के तहत सूचना देने में बाधा बनने वाली अपनी नीति को बदलने के लिये भी कहा।
  • शीर्ष न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) RTI के तहत ‘‘राष्ट्रीय आर्थिक हित के विषयों’’ को छोड़कर निरीक्षण रिपोर्ट के बारे में सभी सूचनाएँ और अन्य सामग्री देने के लिये ज़िम्मेदार है।
  • न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की पीठ ने इस तथ्य पर कड़ी आपत्ति जताई कि RBI ने उसके 16 दिसंबर, 2015 के फैसले का उल्लंघन किया और न्यायालय की अवमानना याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लेने के बाद केंद्रीय बैंक ने 12 अप्रैल को अपनी वेबसाइट पर नई खुलासा नीति (Disclosure Policy) जारी की।

क्या है मामला?

  • गौरतलब है कि इस साल जनवरी में शीर्ष अदालत ने सूचना के अधिकार कानून के तहत बैंकों की वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट का खुलासा नहीं करने पर RBI को अवमानना नोटिस जारी किया था। 
  • इससे पहले उच्चतम न्यायालय और केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा था कि RBI तब तक पारदर्शिता कानून के तहत मांगी गई सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता जब तक कि उसे कानून के तहत खुलासे से छूट न प्राप्त हो।
  • रिज़र्व बैंक ने अपने बचाव में कहा था कि वह अपेक्षित सूचना की जानकारी नहीं दे सकता क्योंकि बैंक की वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट में ‘‘न्यासीय’’(Fiduciary) जानकारी निहित है।
  • नई नीति के तहत RBI ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिया था कि वे उन सूचनाओं का खुलासा न करें जिनका शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व के फैसलों में खुलासा करने को कहा था।
  • इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट और केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा था कि RBI तब तक पारदर्शिता कानून के तहत मांगी गई सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता जब तक कि उसे कानून के तहत खुलासा करने से छूट ना मिल जाए।

याचिकाकर्त्ताओं द्वारा कौन-सी जानकारी मांगी जा रही है?

  • उच्चतम न्यायालय रिज़र्व बैंक के खिलाफ सूचना अधिकार कार्यकर्त्ता एस.सी. अग्रवाल और गिरीश मित्तल की अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा था। आरटीआई का उपयोग करते हुए याचिकाकर्त्ताओं ने 1 अप्रैल, 2011 से आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक और भारतीय स्टेट बैंक की वार्षिक वित्तीय निरीक्षण (Annual Financial Inspection-AFI) रिपोर्ट की प्रतियाँ मांगी थीं।
  • आरबीआई से सहारा समूह की कंपनियों और बैंक ऑफ राजस्थान से संबंधित जानकारी भी मांगी गई थी।
  • RBI ने RTI अधिनियम की धारा 8 (1) (a) और (b) के तहत प्राप्त छूट को आधार मानते हुए जानकारी नहीं दी, क्योंकि यह खुलासा राज्य के आर्थिक हित में नहीं था। ऐसा करने से तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्द्धी स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता।
  • विभिन्न बैंकों को RBI द्वारा दिये गए कारण बताओ नोटिस और ज़ुर्माना का अलग-अलग विवरण भी मांगा गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर

  • इस कानून के तहत जब तक छूट नहीं दी जाती है आरबीआई को वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट और अन्य सामग्री (जैसे दंड का विवरण) सार्वजनिक करनी होगी।
  • हालाँकि इससे बैंकिंग के क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता आएगी लेकिन यह आरबीआई की नियामक प्रक्रिया को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
  • RBI से संबंधित वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट में बैंकों से संबंधित जानकारी अत्यधिक संवेदनशील होती है।
  • इन प्रयासों के माध्यम से केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि बैंकिंग प्रणाली न्यूनतम व्यवधान के साथ सुचारु रूप से चलती रहे।
  • ग्रेटर बैंक का डिसक्लोज़र निवेशकों और जमाकर्त्ताओं की मदद करता है लेकिन इसके अनपेक्षित परिणाम भी हो सकते हैं।

RBI वार्षिक निरीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं करना चाहता?

  • RBI जब किसी बैंक का निरीक्षण करता है तो उसमें 4 से 6 माह का समय लगता है फिर वह रिपोर्ट संबंधित बैंक को भेजी जाती है तत्पश्चात् उसका जवाब आता है। उसके बाद रिपोर्ट फाइनल की जाती है।
  • जब यह रिपोर्ट बैंक एवं RBI के पास होती है तो RBI उसका खुलासा क्यों नहीं करता है, यह एक बड़ा प्रश्न है।
  • RBI के एक गवर्नर ने 4R शब्द का इस्तेमाल किया था। इसमें पहला R Recognition था अर्थात् एसेट क्वालिटी का रिव्यू होना चाहिये जो कि सभी बैंकों द्वारा किया जाना ज़रूरी होना चाहिये।
  • दूसरा R था रेज़ोल्यूशन, इसमें हेयरकट शामिल था अर्थात् किसी भी लोन अकाउंट में कितना हेयरकट लिया गया इसका भी निर्धारण होना चाहिये।
  • तीसरा R था Recapitalisation अर्थात् बैंक के एसेट ज़्यादा हो गए हैं तथा पर्याप्त मात्रा में पूंजी नहीं है तो प्राइवेट सेक्टर में ओनर का तथा सरकारी क्षेत्र में सरकारी ओनर का पुनर्पूंजीकरण (Recapitalisation) किया जाना चाहिये।
  • चौथा R था Reform, इसके अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जो भी RTI के अंतर्गत आवेदन हैं उनका खुलासा होना चाहिये।
  • पारदर्शिता को बनाए रखने के लिये RBI को इसमें कोई अड़चन नहीं डालना चाहिये बल्कि RBI को यह निर्देश जारी करना चाहिये कि सभी ब
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