रैपिड फायर
वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट
- 24 Feb 2026
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केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने तमिलनाडु के तूतीकोरिन स्थित वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट में 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की अवसंरचना और हरित ऊर्जा परियोजनाओं का उद्घाटन किया तथा उनकी आधारशिला रखी।
- VOC पोर्ट: पहले इसे तूतीकोरिन पोर्ट के नाम से जाना जाता था। इसे वर्ष 2011 में स्वतंत्रता सेनानी वी. ओ. चिदंबरनार के सम्मान में वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट नाम दिया गया। वी.ओ. चिदंबरनार ने 1906 में स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी की स्थापना कर ब्रिटिश समुद्री एकाधिकार को चुनौती दी थी।
- वी.ओ.सी. पोर्ट (VOC Port) कोरोमंडल तट पर स्थित एक कृत्रिम, हर मौसम में चालू रहने वाला गहरा समुद्री बंदरगाह है, जो भूमध्यसागरीय क्षेत्र, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ भारत के समुद्री व्यापार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- स्थान: वी.ओ. चिदंबरनार (VOC) पोर्ट मन्नार की खाड़ी में कोरोमंडल तट पर स्थित एक कृत्रिम, हर मौसम में चालू रहने वाला गहरे समुद्र का बंदरगाह है। यह पूर्व–पश्चिम अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग के निकट रणनीतिक रूप से स्थित होने के कारण भूमध्यसागरीय क्षेत्र, यूरोप और अमेरिका के साथ भारत के व्यापार में इसे महत्त्वपूर्ण बढ़त प्रदान करता है।
- सुरक्षित जलक्षेत्र: वी.ओ. चिदंबरनार (VOC) पोर्ट दक्षिण-पूर्व दिशा में श्रीलंका की उपस्थिति के कारण तूफानों और चक्रवातों से प्राकृतिक रूप से सुरक्षित रहता है।
- बंदरगाह आधुनिकीकरण: वी.ओ. चिदंबरनार (VOC) पोर्ट देश का पहला बंदरगाह है जिसने स्थल पर ही ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन और उपयोग शुरू किया है, जहाँ वर्ष 2025 के अंत से एक पायलट परियोजना सक्रिय है।
- यह भारत का पहला बंदरगाह है जिसने डिजिटल ट्विन प्लेटफॉर्म को लागू किया है, जिसके माध्यम से बंदरगाह संचालन की वास्तविक-समय (रीयल-टाइम) आभासी प्रतिकृति बनाई जाती है। इससे पूर्वानुमानात्मक रखरखाव और डेटा-आधारित अनुकूलन संभव होता है।
- फरवरी 2026 में वी.ओ. चिदंबरनार (VOC) पोर्ट भारत का पहला बंदरगाह बना, जिसने रडार और रेडियो फ्रीक्वेंसी तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्नत एंटी-ड्रोन प्रणाली लागू की, ताकि महत्त्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
- सांस्कृतिक संरक्षण: VOC मैरीटाइम हेरिटेज म्यूज़ियम एक प्रमुख सांस्कृतिक धरोहर स्थल है, जो कोरोमंडल तट के समुद्री इतिहास को उजागर करता है।
- आउटर हार्बर परियोजना: वर्तमान विस्तार कार्यों का उद्देश्य बड़े जहाज़ों और मेगा-कैरियर्स (विशाल मालवाहक जहाजों) को सँभालने की क्षमता विकसित करना है, जिससे यह बंदरगाह दक्षिण भारत के भविष्य के ट्रांसशिपमेंट हब के रूप में स्थापित किया जा सके।
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