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टंट्या मामा और भील जनजाति

  • 30 Jan 2026
  • 18 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित जनजातीय नायक टंट्या मामा की नई धातु प्रतिमा स्थापित किये जाने की घोषणा के बाद वे हाल के दिनों में चर्चा का विषय बने हैं।

टंट्या मामा 

  • परिचय: ये भील समुदाय के एक प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी थे। भील समुदाय मध्य प्रदेश की 1.53 करोड़ जनजातीय आबादी (ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में भारत की सर्वाधिक जनजातीय आबादी रहती है, जो राज्य की कुल जनसंख्या का 21% है) का लगभग 40% है।
  • प्रतिरोध का काल: उन्होंने 1878 और 1889 के बीच ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का सक्रिय विरोध किया। यह संघर्ष 1857 के विद्रोह के बाद के घटनाक्रमों, राजस्व उत्पीड़न (कर की सख्ती) और जनजातीय समुदायों के शोषण की पृष्ठभूमि में हुआ था।
  • लोकप्रिय छवि: अमीर ज़मींदारों और अंग्रेज़ों के सहयोगियों को निशाना बनाने और फिर उन संसाधनों को गरीब और शोषित आदिवासियों में बांटने के कारण उन्हें "भारतीय रॉबिन हुड" के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्हें स्नेहपूर्वक "मामा" के नाम से भी पुकारा जाता है।

भील जनजाति

  • परिचय: भील भारत (2011 की जनगणना के अनुसार इनकी संख्या 46.1 लाख है, जो कुल अनुसूचित जनजाति आबादी का 37.7% है) का सबसे बड़ा जनजातीय समूह है। ये मुख्य रूप से गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में निवास करते हैं।
  • धार्मिक मान्यताएँ: ये मुख्य रूप से हिंदू धर्म को मानते हैं जिसमें प्रकृति पूजा के तत्त्व भी शामिल हैं। ये नाग देवताओं और प्रकृति के अन्य देवताओं की पूजा करते हैं। कुछ समूह  (जैसे– महाराष्ट्र के निर्धी और तड़वी भील) इस्लाम का भी पालन करते हैं।
  • औपनिवेशिक प्रतिरोध और शोषण का इतिहास: ब्रिटिश शासन द्वारा 'आपराधिक जनजाति अधिनियम, 1871' के तहत इन्हें ‘आपराधिक जनजातीय’ घोषित कर दिया गया था। इनके प्रमुख विद्रोहों में शामिल हैं:
    • भगत आंदोलन (1883): गोविंद गुरु के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ यह आंदोलन 1913 के मानगढ़ नरसंहार  पर समाप्त हुआ, जिसे जनजातीय जलियाँवाला बाग  भी कहा जाता है।
    • एकी आंदोलन (1920): मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में चलाया गया।
  • समृद्ध सांस्कृतिक विरासत: यह क्षेत्र पिथौरा चित्रकला (मध्य प्रदेश) और भील कला (बिंदु शैली) जैसी विशिष्ट कला शैलियों के साथ-साथ भगोरिया (मध्य प्रदेश) और गोल गधेड़ो (गुजरात) जैसे प्रसिद्ध त्योहारों के लिये जाना जाता है।

Major_Tribes_in_India

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