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नई औषधि एवं नैदानिक ​​परीक्षण नियम, 2019 में संशोधन

  • 30 Jan 2026
  • 14 min read

स्रोत: पीआईबी 

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई औषधि एवं नैदानिक ​​परीक्षण (NDCT) नियम, 2019 में महत्त्वपूर्ण संशोधन अधिसूचित किये हैं, जिनका उद्देश्य नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” फ्रेमवर्क के तहत औषधीय अनुसंधान को गति देना है।

  • लाइसेंस परीक्षण में छूट: अनुसंधान, परीक्षण या विश्लेषण के लिये सीमित मात्रा में दवाओं के गैर-व्यावसायिक निर्माण हेतु सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन (CDSCO) से लाइसेंस परीक्षण प्राप्त करने की आवश्यकता को अब पूर्व-अधिसूचना तंत्र से प्रतिस्थापित किया गया है।
  • समय-सीमा में कमी: इस सुधार से दवा विकास चक्र में लगभग 90 दिनों की बचत होने की उम्मीद है।
    • जिन श्रेणियों के लिये लाइसेंस आवश्यक है, उनके लिये कानूनी प्रसंस्करण अवधि 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दी गई है। इससे CDSCO के मौजूदा मानव संसाधन का बेहतर उपयोग और नियामक दक्षता में वृद्धि होगी।
  • नैदानिक अध्ययन के लिये सुविधा: निम्न-जोखिम वाले जैव उपलब्धता/जैव समतुल्यता (BA/BE) अध्ययनों के संचालन के लिये पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। अब ये अध्ययन केवल CDSCO को ऑनलाइन सूचना के साथ प्रारंभ किये जा सकते हैं।
  • डिजिटल एकीकरण: प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिये नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और SUGAM पोर्टल (CDSCO ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म) पर समर्पित ऑनलाइन मॉड्यूल लॉन्च किये जाएंगे, जिससे पारदर्शी, पेपरलेस और सरल प्रक्रिया सुनिश्चित होगी।
  • जन विश्वास सिद्धांत: ये जन विश्वास आधारित सुधार सरकार की "जन विश्वास" नीति के अनुरूप हैं, जिनका लक्ष्य भारत को वैश्विक औषधीय अनुसंधान एवं विकास केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

और पढ़ें:  नई औषधि एवं नैदानिक ​​परीक्षण (NDCT) नियम, 2019

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