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भारत में चमगादड़ों की स्थिति पर रिपोर्ट

  • 17 Apr 2026
  • 17 min read

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

भारत के चमगादड़ों की पहली राष्ट्रीय स्तर की आकलन रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ इंडियाज़ बैट्स (2024–25)’ में भारत में चमगादड़ प्रजातियों के प्रति बढ़ती उपेक्षा और शहरीकरण, वनोन्मूलन, भूमि उपयोग परिवर्तन तथा जलवायु प्रभावों से उत्पन्न खतरों को रेखांकित किया गया है।

  • नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन और बैट कंज़र्वेशन इंटरनेशनल के विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट गंभीर डेटा अंतराल और अनुसंधान की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।
  • चमगादड़ों की महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिकाओं और जूनोटिक रोगों के साथ उनके संबंध को देखते हुए निष्कर्षों का जैव विविधता संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है।

मुख्य निष्कर्ष

  • परिचय: भारत में चमगादड़ों की लगभग 135 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें 16 स्थानिक प्रजातियाँ शामिल हैं, जो महत्त्वपूर्ण जैव विविधता को दर्शाती हैं।
  • आवास एवं बसेरा: ये गुफाओं, पेड़ों और इमारतों एवं स्मारकों जैसी मानव निर्मित संरचनाओं में बसेरा करते हैं, क्योंकि गुफाएँ स्थिर जलवायु और शिकारियों से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
    • रॉबर्स केव (महाबलेश्वर) में फिलिप्स लॉन्ग-फिंगर्ड बैट का सबसे बड़ा बसेरा स्थित है।
  • कार्य: चमगादड़ परागण, बीज प्रकीर्णन, कीट नियंत्रण तथा मिट्टी पोषक समृद्धीकरण जैसी महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करते हैं, जो उन्हें कृषि उत्पादकता एवं स्थिरता के लिये अपरिहार्य बनाती हैं।
  • मुद्दे: रिपोर्ट अनुसंधान अनुमतियों में नौकरशाही अवरोधों को उजागर करती है, जो डेटा की कमी को बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं। कोविड-उपरांत सामाजिक पूर्वाग्रह ने उनकी छवि को और भी खराब कर दिया है, जो चमगादड़ों को गलत रूप से मुख्यतः रोगवाहक के रूप में चित्रित करता है, जबकि उनकी पारिस्थितिकीय उपयोगिताएँ निर्विवाद हैं।

State of India’s Bats Report

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