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S-400 ट्रायंफ (सुदर्शन) प्रणाली

  • 28 Mar 2026
  • 16 min read

स्रोत: द हिंदू 

भारत अपने राष्ट्रीय वायुक्षेत्र की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिये रूस से शेष S-400 ट्रायंफ वायु रक्षा प्रणालियों की खरीद और तैनाती को तेज़ कर रहा है।

  • परिचय: S-400 ट्रायंफ, जिसे भारतीय सेवा में आधिकारिक रूप से ‘सुदर्शन’ नाम दिया गया है, एक अत्याधुनिक लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे रूस से प्राप्त किया गया है ताकि देश के महत्त्वपूर्ण वायुक्षेत्र के ऊपर एक अभेद्य, बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच स्थापित किया जा सके।
    • इसे रूस द्वारा विकसित किया गया है और इसे विश्व की सबसे उन्नत मोबाइल सतह-से-आकाश प्रणालियों में से एक माना जाता है।
  • बहु-स्तरीय रक्षा नेटवर्क: यह प्रणाली 40–400 किमी. की दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों के माध्यम से स्तरित वायु रक्षा प्रदान करती है, जो स्टील्थ लड़ाकू विमानों, मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) तथा बैलिस्टिक या क्रूज़ मिसाइलों सहित विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम है।
  • समानांतर लक्ष्य-नियोजन: उन्नत पैनोरमिक रडार क्षमताओं से सुसज्जित यह प्रणाली एक साथ 300 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकती है और अत्यधिक सटीकता के साथ 36 खतरों को एक साथ निशाना बना सकती है।
  • भारत की खरीद स्थिति: भारत ने वर्ष 2018 में पाँच स्क्वाड्रनों के लिये 5.43 अरब अमेरिकी डॉलर का एक ऐतिहासिक समझौता किया था।
    • वर्ष 2026 तक तीन स्क्वाड्रन पूरी तरह से सक्रिय हैं और पश्चिमी एवं उत्तरी सीमाओं पर रणनीतिक रूप से तैनात किये गए हैं, जबकि अंतिम दो स्क्वाड्रन की आपूर्ति 2026 के अंत तक निर्धारित है।
  • ऑपरेशन सिंदूर: इस प्रणाली ने हाल ही के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी परिचालन श्रेष्ठता साबित की, जिसमें सीमा पार से आए शत्रुतापूर्ण ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोककर निष्क्रिय किया गया, जिससे भारत के रणनीतिक निवेश की पुष्टि हुई।
  • स्वदेशी समन्वय: S-400 ट्रायंफ भारत के मौजूदा नेटवर्क के साथ सहज रूप से एकीकृत होता है, यह DRDO द्वारा विकसित बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (BMD) प्रणाली और परियोजना कुश (विस्तारित दूरी वायु रक्षा प्रणाली) जैसी स्वदेशी पहलों के साथ मिलकर चीन और पाकिस्तान से उत्पन्न दो-मोर्चा खतरे का मुकाबला करने में सहायक है।

और पढ़ें: S-400 मिसाइल और प्रोजेक्ट कुश

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