रैपिड फायर
2025 के भूकंपीय कोड पुनः प्रभावी
- 13 Mar 2026
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भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं के बाद वर्ष 2025 के सीस्मिक कोड (IS 1893) को वापस ले लिया है। वर्ष 2016 का पिछला मानक, IS 1893, अब पुनः प्रभावी हो गया है।
- आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने गंभीर चिंताएँ व्यक्त कीं, जैसे कि निर्माण लागत में भारी वृद्धि क्षेत्र V और VI में भवनों के लिये लगभग 10–15% तथा अवसंरचना परियोजनाओं के लिये 50% तक और संहिता को अंतिम रूप देने से पहले हितधारकों से पर्याप्त परामर्श का अभाव।
- यह संशोधन संभाव्य भूकंपीय खतरा आकलन (PSHA), सक्रिय भ्रंश मानचित्रण और निकट-भ्रंश प्रभावों जैसी उन्नत वैज्ञानिक विधियों पर आधारित था।
- सीस्मिक कोड: सीस्मिक कोड विनियमों और मानकों का एक समूह है, जिसे यह सुनिश्चित करने के लिये डिज़ाइन किया गया है कि इमारतें और अन्य संरचनाएँ भूकंप से उत्पन्न बलों का सामना कर सकें।
- इसका प्राथमिक उद्देश्य संरचनात्मक पतन के जोखिम को कम करके, संपत्ति के नुकसान को कम करके और भूकंपीय घटना के दौरान जान बचाकर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
- वर्तमान में लागू मानक: मार्च 2026 तक भारत का भूकंपीय क्षेत्र भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा जारी IS 1893 (भाग 1):2016 द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
- यह मानक देश को चार भूकंपीय क्षेत्रों अर्थात् ज़ोन II (निम्न), ज़ोन III (मध्यम), ज़ोन IV (उच्च) और ज़ोन V (बहुत उच्च) में विभाजित करता है, जिसमें भारत का लगभग 59% भूभाग भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है।
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