प्रारंभिक परीक्षा
RBI के क्रेडिट और उपभोक्ता संरक्षण सुधार
- 09 Feb 2026
- 52 min read
चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ( MSME) को प्रोत्साहित करने और डिजिटल युग में उपभोक्ता संरक्षण को मज़बूत करने के उद्देश्य से कई उपायों की शुरुआत की है।
अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने हेतु RBI ने कौन-से कदम उठाए हैं?
- MSMEs के लिये ज़मानत ऋण की सीमा को दोगुना करना: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिये बिना ज़मानत ऋण की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव किया गया है। इसका उद्देश्य सक्षम छोटे व्यवसायों की वित्तीय बाधाओं को कम करना, अनौपचारिक ऋण पर उनकी निर्भरता घटाना तथा उनके विस्तार को समर्थन देना है।
- REITs को बैंक ऋण की अनुमति: अब बैंकों को सूचीबद्ध रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) को वित्तपोषण उपलब्ध कराने की अनुमति दी जाएगी। यह सुविधा पहले इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के लिये उपलब्ध थी।
- यह कदम बाज़ार नियामक SEBI के उस निर्णय के अनुरूप है, जिसमें REITs को इक्विटी के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिससे म्यूचुअल फंड जैसे संस्थागत निवेशकों का आकर्षण बढ़ने की संभावना है।
- प्रस्तावित ग्राहक संरक्षण फ्रेमवर्क:
- कम मूल्य वाले धोखाधड़ीपूर्ण लेनदेन पर मुआवज़ा: कम मूल्य के डिजिटल धोखाधड़ी वाले लेनदेन में होने वाले नुकसान के लिये ग्राहकों को 25,000 रुपये तक मुआवज़ा देने हेतु एक नया ढाँचा प्रस्तुत किया जाएगा। इसका उद्देश्य अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों की देयता को सीमित करना है।
- मिस-सेलिंग पर अंकुश के लिये दिशानिर्देश: बैंक काउंटरों पर बेचे जाने वाले सभी तृतीय-पक्ष वित्तीय उत्पादों (जैसे–बीमा, म्यूचुअल फंड) को ग्राहकों की आवश्यकताओं और उनकी जोखिम क्षमता के अनुरूप सुनिश्चित करने हेतु मसौदा निर्देश जारी किये जाएंगे।
- ऋण वसूली अभिकर्त्ताओं हेतु समन्वित नियम: भारतीय रिज़र्व बैंक विभिन्न विनियमित संस्थाओं में ऋण वसूली अभिकर्त्ताओं की नियुक्ति तथा ऋण वसूली से संबद्ध आचरण के बारे में विद्यमान निर्देशों की समीक्षा और उनका सामंजस्य (हर्मोनाइज़ेशन) करेगा, ताकि वसूली की प्रक्रिया में न्यायसंगत एवं उपभोक्ता-हितैषी प्रथाएँ सुनिश्चित की जा सकें।
- ‘मिशन सक्षम’ शहरी सहकारी बैंकों के लिये: मिशन सक्षम (सहकारी बैंक क्षमता निर्माण) प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंकों (UCB) के लिये क्षेत्रव्यापी क्षमता-विकास और प्रमाणन ढाँचा है। इस मिशन के अंतर्गत लगभग 1.40 लाख प्रतिभागियों को क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से आच्छादित करने की योजना है।
REIT और InvIT क्या हैं?
|
पहलू |
REIT |
InvIT |
|
परिचय |
REIT ऐसे निवेश ट्रस्ट होते हैं, जो आय-सृजन करने वाली वाणिज्यिक अचल संपत्तियों, जैसे– कार्यालय परिसरों और मॉल आदि के स्वामित्व, संचालन और प्रबंधन का कार्य करते हैं तथा निवेशकों को नियमित किराया-आधारित आय के साथ पूंजी अभिमूल्यन का अवसर प्रदान करते हैं। |
InvIT ऐसे निवेश ट्रस्ट हैं, जो राजमार्ग, सड़कें, विद्युत प्रसारण लाइनें, पाइपलाइन, नवीनीकरणीय ऊर्जा परिसंपत्तियाँ, टेलीकॉम टावर, डेटा सेंटर इत्यादि जैसी परिसंचालित अवसंरचनात्मक परियोजनाओं में निवेश को संभव बनाते हैं, आवश्यक अवसंरचना परिसंपत्तियों से स्थिर तथा दीर्घकालिक आय उपलब्ध कराते हैं। |
|
प्राथमिक राजस्व स्रोत |
किराए की आय, किराएदारों से प्राप्त लीज़ भुगतान तथा समय‑समय पर संपत्तियों के विक्रय से प्राप्त आमदनी। |
टोल, उपयोगकर्त्ता शुल्क, टैरिफ, उपलब्धता‑आधारित भुगतान या दीर्घकालिक अनुबंध (जो प्रायः विनियमित या सरकार से संबद्ध होते हैं)। |
|
पोर्टफोलियो के लिये आवश्यकताएँ |
कम-से-कम 80% निवेश पूर्णत: निर्मित, राजस्व-सृजन करने वाली परिसंपत्तियों में अधिकतम 20% तक गैर-निर्मित या अन्य प्रकार की परिसंपत्तियों में किया जा सकता है। |
कम-से-कम 80% निवेश पूर्णत: निर्मित, राजस्व-सृजन करने वाली अवसंरचना परिसंपत्तियों में, गैर-निर्मित परिसंपत्तियों में सीमित निवेश की अनुमति होती है। |
|
ऋण सीमा |
संपत्ति के मूल्य का लगभग 49% तक ही ऋण की सीमा निर्धारित (अधिक सावधानीपूर्ण)। |
संपत्ति के मूल्य का लगभग 70% तक ऋण लेने की अनुमति (उच्च ऋण लचीलापन)। |
|
तरलता एवं इकाई मूल्य |
कम इकाई मूल्य के साथ उच्च तरलता, जिसके कारण खुदरा निवेशकों के लिये अपेक्षाकृत अधिक सुलभ। |
तरलता भिन्न‑भिन्न हो सकती है; सामान्यतः इकाई मूल्य अधिक होते हैं, व्यापार मात्रा संभवतः निम्न हो सकती है। |
|
विनियामक ढाँचा |
इनका संचालन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स विनियम, 2014 के अधीन किया जाता है। |
इनका संचालन भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स विनियम, 2014 के अधीन किया जाता है। |
|
और पढ़ें: MSME, भारत में साइबर धोखाधड़ी, शहरी सहकारी बैंकों में प्रशासन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. MSME ऋण की पहुँच में RBI द्वारा प्रस्तावित प्रमुख बदलाव क्या है?
RBI ने MSMEs के लिये बिना ज़मानत ऋण की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव किया है, ताकि वित्तीय बाधाएँ कम हों और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम हो।
2. ₹25,000 मुआवज़ा ढाँचे का उद्देश्य क्या है?
यह एक उपभोक्ता संरक्षण उपाय है, जिसका उद्देश्य छोटे-मूल्य की धोखाधड़ीपूर्ण डिजिटल लेनदेन में हुए नुकसान के लिये मुआवज़ा देना और अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन में ग्राहक की देयता सीमित करना है।
3. RBI द्वारा घोषित मिशन SAKSHAM का उद्देश्य क्या है?
मिशन SAKSHAM का लक्ष्य शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिये प्रशिक्षण और प्रमाणन के माध्यम से क्षेत्र-व्यापी क्षमता निर्माण करना है।
UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न (PYQ)
प्रश्न. भारत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये :
- ‘सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम, 2006’ के अनुसार, ‘जिनके संयंत्र और मशीन में निवेश 15 करोड़ रुपए से 25 करोड़ रुपए के बीच है, वे मध्यम उद्यम हैं’।
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को दिये गए सभी बैंक ऋण प्राथमिकता क्षेत्रक के अधीन अर्ह हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/है?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b)
प्रश्न. भारत में ‘शहरी सहकारी बैंकों’ के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2021)
- राज्य सरकारों द्वारा स्थापित स्थानीय मंडलों द्वारा उनका पर्यवेक्षण एवं विनियमन किया जाता है।
- वे इक्विटी शेयर और अधिमान शेयर जारी कर सकते हैं।
- उन्हें वर्ष 1966 में एक संशोधन द्वारा बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के कार्यक्षेत्र में लाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर:(b)