हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

विविध

Rapid Fire (करेंट अफेयर्स): 08 अगस्त, 2022

  • 08 Aug 2022
  • 6 min read

जगदीप धनखड़  

जगदीप धनखड़ 11 अगस्त, 2022 को भारत के उपराष्‍ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करेंगे। वर्तमान  उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडुु का कार्यकाल 10 अगस्त, 2022 को समाप्त हो जाएगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन-एनडीए के प्रत्याशी जगदीप धनखड़ देश के 14वें उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार व कॉन्ग्रेस की वरिष्ठ नेता मार्गरेट अल्वा पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की है। नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का जन्म 18 मई, 1951 को राजस्थान के झुंझूनु ज़िले में एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने चितौड़गढ़ सैनिक स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। भौतिक शास्त्र से स्नातक डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने राजस्थान से ही वकालत की डिग्री हासिल कीऔर राजस्थान उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में वकालत की। वर्ष 1989 में वह पहली बार राजस्थान के झुंझूनु लोकसभा की सीट से सांसद चुने गए थे। वर्ष 1990 में वह संसदीय राज्यमंत्री बने। वर्ष 1993 में अजमेर ज़िले के किशनगढ़ विधानसभा से राजस्थान विधानसभा के लिये चुने गए। वर्ष 2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया। उपराष्ट्रपति भारत का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक कार्यालय है। वह पांँच वर्ष के कार्यकाल के लिये कार्य करता है, लेकिन कार्यकाल की समाप्ति के बावजूद तब तक पद पर बना रह सकता है जब तक कि उत्तराधिकारी द्वारा पद ग्रहण नहीं कर लिया जाता है। उपराष्ट्रपति राज्यों की परिषद (राज्यसभा) का पदेन अध्यक्ष होता है।

बढ़े चलो अभियान

आजादी के अमृत महोत्सव के हिस्से के रूप में संस्कृति मंत्रालय ने भारत के अधिक से अधिक युवाओं से जुड़ने और उनके अंदर देशभक्ति की भावना को जागृत करने के उद्देश्य से "बढ़े चलो अभियान" की शुरुआत की है। यह अभियान 5 अगस्त से 10 अगस्त, 2022 तक 10 शहरों में प्रतिदिन आयोजित किया जा रहा है जिसका ग्रैंड फिनाले 12 अगस्त, 2022 को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होगा। बढ़े चलो अभियान का उद्देश्य भारत के सभी क्षेत्र के युवाओं एवं लोगों को एक मंच पर लाना है। इसके तहत झलक नृत्य या फ्लैश डांस की सुविधा होगी, जिसमें नर्तक “युवा गान” पर प्रदर्शन करेंगे। ‘युवा गान’ गीत को ‘बढ़े चलो’ की थीम पर लिखा और कंपोज़ किया गया है। जो लोगों को आगे आने तथा अपने घरों में तिरंगा फहराने के लिये प्रोत्साहित करता है, साथ ही अमृत महोत्सव के संदेश और भावना का भी प्रसार करता है। केंद्र सरकार ने प्रगतिशील भारत के 75 वर्षों के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, उपलब्धियों एवं उसके लोगों के गौरवशाली इतिहास को मनाने हेतु आज़ादी का अमृत महोत्सव पहल शुरू की थी।

आठवाँ राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस

07 अगस्त, 2022 को देशभर में आठवाँ राष्‍ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया गया। इस दिवस के आयोजन का प्राथमिक उद्देश्य आम जनता के बीच हथकरघा उद्योग के बारे में जागरूकता पैदा करना और सामाजिक-आर्थिक विकास में इसके योगदान को रेखांकित करना है। इसके अलावा यह दिवस भारत की हथकरघा विरासत की रक्षा करने व हथकरघा बुनकरों एवं श्रमिकों को अधिक अवसर प्रदान करने पर भी ज़ोर देता है। इस दिन को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में इसलिये चुना गया क्योंकि ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल विभाजन का विरोध करने के लिये वर्ष 1905 में इसी दिन कलकत्ता टाऊन हॉल में स्वदेशी आंदोलन आरंभ किया गया था और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार कर भारतीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने की घोषणा की गई थी। तकरीबन एक सदी तक इस दिवस के महत्त्व को देखते हुए वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री द्वारा पहले ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ का उद्घाटन किया गया। ज्ञात हो कि भारत का हथकरघा क्षेत्र देश की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। भारत की सॉफ्ट पावर को लंबे समय से हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र द्वारा समर्थन दिया गया है। 'खादी डिप्लोमेसी' इसी का एक उदाहरण है। भारत में कपड़ा एवं हथकरघा क्षेत्र कृषि के बाद लोगों के लिये रोज़गार व आजीविका का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। ‘चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना’ (2019-20) के अनुसार, 31.45 लाख परिवार हथकरघा, बुनाई तथा संबद्ध गतिविधियों में संलग्न हैं।

एसएमएस अलर्ट
Share Page