रैपिड फायर
प्रोजेक्ट हिम सरोवर
- 17 Apr 2026
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हाल ही में केंद्र सरकार ने लद्दाख में वर्ष भर बनी रहने वाली जल की कमी की समस्या को दूर करने के लिये 'प्रोजेक्ट हिम सरोवर' की शुरुआत की है। इस क्षेत्र में वर्तमान में हिमनदों (ग्लेशियर) के विगलन से प्राप्त अधिकांश जल बिना उपयोग के ही नदियों और नालों में बह जाता है।
- परिचय: यह एक सतत जल प्रबंधन पहल है, जिसका उद्देश्य अधिक ऊँचाई वाले शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में कम उपयोग हो रहे हिम-विगलित जल को संचित कर उपयोग में लाना है।
- आवश्यकता: लद्दाख में कम वर्षा और हिमनदों के खिसकने के कारण लगातार जल की कमी बनी रहती है, जबकि बढ़ते पर्यटन और सशस्त्र बलों की उपस्थिति ने क्षेत्र में जल की मांग को काफी बढ़ा दिया है।
- उद्देश्य: संचित जल का उपयोग सिंचाई, ग्रामीण आवश्यकताओं और दीर्घकालिक जलवायु-सहिष्णु जल प्रबंधन के लिये करना।
- कार्यान्वयन क्षेत्र: यह परियोजना लेह (निम्मू, नुब्रा, डिस्किट आदि) और कारगिल (सुरु, पदुम आदि) के क्षेत्रों को कवर करती है।
- परियोजना की डिज़ाइन: इस पहल के अंतर्गत विगलित हिम जल (Meltwater) को संचित और संग्रहित करने हेतु गुरुत्वाकर्षण-आधारित प्रणालियों तथा सौर लिफ्ट तंत्रों का उपयोग करते हुए 'पर्कोलेशन टैंक' तथा लघु जलाशयों का निर्माण किया जाता है।
- अतिरिक्त घटक: इसमें नदी किनारों और सड़कों के किनारे वृक्षारोपण अभियान, जमे हुए जल निकायों पर शीतकालीन खेल और आइस-स्केटिंग सुविधाओं का विकास तथा आजीविका को समर्थन देने के लिये खूबानी, सी-बकथॉर्न और सेब जैसी स्थानीय फसलों को बढ़ावा देना शामिल है।
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