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लांजिया साओरा जनजाति

  • 16 Apr 2026
  • 13 min read

स्रोत: द हिंदू 

हाल ही में ओडिशा की एक विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह (PVTG), लांजिया साओरा जनजाति, अपनी विकसित होती सांस्कृतिक प्रथाओं के लिये चर्चा में रही।

  • लांजिया साओरा: लांजिया साओरा, साओरा जनजाति का एक उपसमूह है, जो ओडिशा के रायगढ़ और गजपति ज़िलों की पहाड़ियों में निवास करता है।
    • साओरा को भारत के प्राचीन जनजातीय समुदायों में से एक माना जाता है और ये आंध्र प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी पाए जाते हैं।
    • जनजाति में लांजिया साओरा (पहाड़ी-निवासी, स्थानांतरण खेती) और सुधा साओरा (मैदानी, स्थायी कृषि और मज़दूरी कार्य) जैसे समूह शामिल हैं।
  • भाषा: ये साओरा भाषा बोलते हैं, जो ऑस्ट्रोएशियाटिक परिवार से संबंधित एक मुंडारी भाषा है।
  • जीवन शैली और संस्कृति: यह समुदाय स्थानांतरण कृषि, संग्रहण और छोटे पैमाने पर कृषि के माध्यम से अपना जीवन यापन करता है। उनकी विश्वास प्रणाली प्रकृति से निकटता से जुड़ी हुई है, जिसमें अनुष्ठान, संगीत और नृत्य दैनिक जीवन का अभिन्न अंग हैं।
  • पारंपरिक आभूषण: ये बढ़े हुए कानों के लोब में लगाए जाने वाले बड़े धातु के कुंडलों और ज्यामितीय तथा प्रकृति-प्रेरित रूपांकनों वाले टैटू के लिये जाने जाते हैं, जिनका आध्यात्मिक महत्त्व होता है।
    • युवा सदस्य वियोज्य आभूषणों और अस्थायी टैटू का उपयोग करके परंपराओं को अपना रहे हैं, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन को दर्शाता है।
  • नृत्य और संगीत: ये स्वतःस्फूर्त गीतों के साथ जीवंत नृत्य करते हैं, जिसमें पीतल के पाइप, झाँझ और घंटियाँ जैसे वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाता है, जिसमें क्रेन पंखों वाली पगड़ी, छतरियाँ, तलवारें और मोरपंख जैसी विशिष्ट वेशभूषा होती है।

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