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प्रारंभिक परीक्षा

प्रीलिम्स फैक्ट्स: 20 मई, 2019

  • 20 May 2019
  • 7 min read

SIMBEX 2019

भारत और सिंगापुर के बीच SIMBEX-2019 युद्ध अभ्यास की शुरुआत दक्षिणी चीन सागर में हो चुकी है। गौरतलब है कि SIMBEX-2019 इस वार्षिक अभ्यास का 26वाँ संस्करण है।

  • इस अभ्यास का आयोजन 16-22 मई,  2019 के बीच किया जा रहा है।
  • भारतीय नौसेना के जहाज़ कोलकाता और शक्ति के अतिरिक्‍त लंबी दूरी के सामुद्रिक निगरानी विमान भी सिम्‍बेक्‍स-19 में हिस्‍सा ले रहे हैं।
  • इस द्विपक्षीय अभ्‍यास की शुरुआत पारंपरिक पनडुब्‍बी-रोधी अभ्‍यासों से हुई जो एडवांस्‍ड ए‍यर डिफेंस ऑपरेशन्‍स (Advanced Air Defense Operations), एंटी एयर/सरफेस टारगेट्स पर अभ्‍यास गोलीबारी (Exercise Firing on Anti Air/Surface Targets), सामरिक अभ्‍यास आदि तक पहुँच चुकी है।
  • वर्ष 2018 में इस अभ्यास का आयोजन अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के बाहर हिंद महासागर में किया गया था।

भारत-सिंगापुर संबंध के बारे में अधिक जानकारी के लिये नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक कीजिये-

भारत-सिंगापुर रक्षा संबंध

भारत और सिंगापुर


फल खाने वाले पक्षियों का सर्वेक्षण

हाल ही में नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन (Nature Conservation Foundation) ने फल खाने वाले अलग-अलग पक्षियों और उनकी पारस्परिक क्रियाओं का चित्रण किया है जो वन्य पारिस्थितिकी तंत्र के लिये महत्त्वपूर्ण है।

  • यह अध्ययन अरुणाचल प्रदेश में पक्के टाइगर रिज़र्व में किया गया जिसमें वृक्षों की 43 प्रजातियाँ और उन वृक्षों के फलों को खाने वाले पक्षियों (फल खाने वाले) की 48 प्रजातियाँ शामिल थीं।
  • वृक्षों को उनके बीज के आकार के अनुसार वर्गीकृत किया गया था।
  • अध्ययन में पाया गया कि बड़े बीज वाले वृक्ष अपने फैलाव के लिये मुख्य रूप से हॉर्नबिल और इम्पीरियल पिजन पर, जबकि मध्यम आकार के बीज वाले वृक्ष बुलबुल, बारबेट्स के साथ-साथ हॉर्नबिल और इम्पीरियल पिजन पर निर्भर होते हैं।
  • अध्ययन के अनुसार, किसी क्षेत्र में हार्नबिल की संख्या में कमी आने पर उस क्षेत्र विशेष में पौधों का पुनर्जनन भी बड़े पैमाने पर प्रभावित होता है।

नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन

  • नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन मैसूर में स्थित एक गैर-सरकारी वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान संगठन है।

भारत में उपलब्ध ग्रेफाइट भंडार

  • अरुणाचल प्रदेश सरकार ने भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग (Geological Survey of India-GSI) से  इस संभावना का पता लगाने को कहा है जिससे भारत-चीन सीमा से लगे स्थानों पर खनिज की उपलब्धता की पुष्टि हो सके, ताकि इन खनिज स्थलों का पूर्ण रूप से सर्वेक्षण कर खनन (Drilling) कार्य शुरू किया जा सके। अरुणाचल प्रदेश सरकार का यह कदम चीन की उस कार्यवाही की प्रतिक्रिया माना जा रहा है जिसके अंतर्गत चीन तिब्बत में वृहद् पैमाने पर खनन गतिविधि को बढ़ावा दे रहा है।
  • GSI के अनुसार, भारत में पाए जाने वाले कुल ग्रेफाइट का लगभग 35% अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है। अरुणाचल प्रदेश में देश का सबसे अधिक ग्रेफाइट पाया जाता है।
  • GSI की वर्ष 2013 की रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश में 43% ग्रेफाइट, जम्मू-कश्मीर में 37%, झारखंड में 6%, तमिलनाडु में 5% और ओडिशा में 3% ग्रेफाइट संसाधनों की उपलब्धता है।
  • संसाधनों के आधार पर राज्यों की भंडार प्रतिशतता की बात की जाए तो तमिलनाडु के पास 37%, झारखंड के पास 30% और ओडिशा के पास 29% संसाधनों की उपलब्धता है।

ग्रेफाइट

  • ग्रेफाइट प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले क्रिस्टलीय कार्बन का एक रूप है।
  • यह एक प्राकृतिक खनिज तत्त्व है जो रूपांतरित और आग्नेय चट्टानों में पाया जाता है।
  • इसकी संरचना स्तरीय प्रकार की होती है जिसमें छह कार्बन परमाणुओं के छल्ले होते हैं। ये छल्ले व्यापक रूप से क्षैतिज स्थिति में व्यवस्थित होते हैं।
  • ये रंग में गहरे भूरे और काले तथा अपारदर्शी एवं बहुत मुलायम होते हैं।
  • यह एकमात्र अधात्विक तत्त्व है जो विद्युत् का एक अच्छा चालक होता है।
  • मुलायम प्रकृति का होने के कारण इसे एक शुष्क स्नेहक के रूप में जाना जाता है।
  • इसके कई औद्योगिक उपयोग हैं और विशिष्ट तौर पर ऐसे उत्पादों के लिये इसका उपयोग किया जाता है जिन्हें बहुत अधिक गर्मी की आवश्यकता होती है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग

  • मुख्य रूप से रेलवे के लिये भारत में उपलब्ध कोयला भण्डार की खोज के उद्देश्य से वर्ष 1851 में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India-GSI) विभाग की स्थापना की गई थी।
  • इन वर्षों में यह संस्था न केवल देश में विभिन्न क्षेत्रों के लिये आवश्यक भू-विज्ञान सूचनाओं के भंडार के रूप में विकसित हुई, बल्कि इसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान को स्थापित करते हुए भू-वैज्ञानिक संगठन का दर्जा भी प्राप्त किया।
  • GSI का मुख्य कार्य राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक सूचना और खनिज संसाधन मूल्यांकन और आधुनिकीकरण संबंधी कार्य करना है।
  • इसका मुख्यालय कोलकाता में है और देश के लगभग सभी राज्यों में राज्य इकाई कार्यालय तथा लखनऊ, जयपुर, नागपुर, हैदराबाद, शिलांग और कोलकाता में इसके छह क्षेत्रीय कार्यालय अवस्थित हैं।
  • वर्तमान में GSI खान मंत्रालय की एक सहायक संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।
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