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प्रीलिम्स फैक्ट्स: 21 मई, 2019

  • 21 May 2019
  • 7 min read

वयोश्रेष्ठ सम्मान

वयोश्रेष्ठ सम्मान वरिष्‍ठ नागरिकों की सराहनीय सेवा करने वाले संस्‍थानों और वरिष्‍ठ नागरिकों को उनकी उत्तम सेवाओं तथा उपलब्धियों के सम्‍मान स्‍वरूप प्रदान किया जाता हैं।

  • वयोश्रेष्ठ सम्मान हर साल 1 अक्तूबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस (International Day of Older Person) की पूर्व संध्या पर वितरित किये जाते हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस को मनाने के लिये 1 अक्तूबर, 1999 को एक प्रस्ताव अपनाया था।

  • वर्ष 2013 से 13 विभिन्‍न श्रेणियों में वयोश्रेष्‍ठ सम्‍मान प्रदान किया जाता है।
  • वयोश्रेष्‍ठ सम्‍मान की स्‍थापना सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय ने वर्ष 2005 में की थी और इसे वर्ष 2013 में राष्‍ट्रीय पुरस्‍कारों की श्रेणी में लाया गया।
  • यह युवा पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के निर्माण में बुज़ुर्गों के योगदान को समझने का अवसर भी प्रदान करता है।
  • इस पुरस्‍कार के लिये भारत सरकार के मंत्रालयों/विभागों और उनके स्वायत्त संगठनों से नामांकन आमंत्रित किये जाते हैं।

माउंट टेंचेंखांग

हाल ही में माउंट टेंचेंखांग (Mount Tenchenkhang) के पर्वतारोहण अभियान के लिये एनसीसी की 20 महिला कैडेट्स की एक टीम को रवाना की गई है।

  • माउंट टेंचेंखांग (6010 मी.) पश्चिमी सिक्किम में स्थित है और कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आता है जो प्राकृतिक सुंदरता, जैव-विविधता, झीलों तथा बर्फ से ढके पहाड़ों के लिये जाना जाता है।

कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान

  • कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान सिक्किम में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान और जैवमंडल रिज़र्व है। इसे जुलाई 2016 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल किया गया था, जो भारत का पहला और एकमात्र ‘मिश्रित धरोहर’ स्थल है।
  • यह ‘यूनेस्को मैन एंड बायोस्फीयर प्रोग्राम’ (UNESCO Man and the Biosphere Programme) में शामिल है। इस उद्यान का नाम कंचनजंगा पर्वत से लिया गया है, जो 8,586 मीटर लंबा (दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी) है। इस उद्यान का कुल क्षेत्रफल 849.5 वर्ग किमी. है।

ओंगोल नस्ल की गाय

हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति ने विजयवाड़ा स्थित स्वर्ण भारत न्यास में आयोजित एक कार्यक्रम में ओंगोल नस्ल की गाय (Ongole Cattle Breed) पर एक विवरणिका जारी की। यह विवरणिका 1200 पन्नों की है जिसमें वर्ष 1885 से 2016 तक पशुओं का इतिहास दिया गया है।

  • इस पुस्तक में ओंगोल गाय पर किये जाने वाले अनुसंधान को भी शामिल किया गया है।
  • ओंगोले नस्ल का नामकरण आंध्र प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्र ओंगोल के नाम पर किया गया है।
  • इसे नेल्लोर नस्ल भी कहा जाता है क्योंकि पूर्व में ओंगोल तालुक नेल्लोर ज़िले का हिस्सा था, लेकिन अब यह गुंटूर ज़िले में शामिल है।
  • यह नस्ल मूल रूप से आंध्र प्रदेश के तटीय ज़िलों- गुंटूर, प्रकाशम और नेल्लोर में पाई जाती है।
  • यह ऐसी नस्ल है, जिसे दूध के उत्पादन के साथ-साथ खेतों की जुताई में भी उपयोग किया जा सकता है।

शिक्षकों की निगरानी हेतु कॉल सेंटर

गुजरात सरकार ने रियल टाइम प्रोद्यौगिकी का प्रयोग करते हुए विद्यालयों में शिक्षकों की निगरानी हेतु एक नई योजना बनाई है जो जून में शुरू होने वाले नए शैक्षिक-सत्र से लागू हो जाएगी।

  • इस योजना का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने का प्रयास करना है जिसके अंतर्गत यह पता लगाना होगा कि विद्यालय परिसर में शिक्षक अपने कर्त्तव्यों का वहन उचित ढंग से कर रहे हैं या नहीं।
  • इस प्रक्रिया के संचालन हेतु एक कमान एवं नियंत्रण केंद्र (Command and Control Centre) की स्थापना की गई है जो गांधीनगर में स्थित है।
  • केवल शिक्षक ही नहीं, शिक्षकों की निगरानी करने वाले कर्मियों को भी निगरानी हेतु जीपीएस-सक्षम टैबलेट (GPS-enabled Tablets) सौंपे जाएंगे और जियोफेंसिंग (Geofencing) के माध्यम से शिक्षकों की ट्रैकिंग की जा सकेगी तथा मोबाइल डिवाइस में एक निर्दिष्ट क्षेत्र में प्रवेश करने या उस क्षेत्र को छोड़ने पर अलर्ट प्राप्त होगा।
  • इस कॉल सेंटर के अधिकारी किसी भी शिक्षक से सवाल कर सकते हैं; ये प्रश्न उनके प्रतिदिन के कार्य या असाइनमेंट से संबंधित हो सकते हैं।
  • छुट्टी पर रहने की स्थिति में उन्हें छुट्टी का विवरण प्रदान करना होगा, जिसमें दिनों की संख्या और अनुमोदन प्राधिकारी जैसी जानकारी शामिल होगी।
  • अधिकारियों के अनुसार, इस नए ट्रैकिंग सिस्टम का शिक्षकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनकी उपस्थिति और असाइनमेंट के अलावा, नई पठन-पाठन प्रणाली तथा नवाचार से संबंधित सुझाव भी मांगे जाएंगे और उन्हें रिकॉर्ड किया जाएगा।
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