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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत और सिंगापुर

  • 27 Oct 2018
  • 5 min read

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और सिंगापुर के बीच फिनटेक पर संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group - JWG) गठित करने के लिये पर जून, 2018 में हस्ताक्षर किये गए समझौता ज्ञापन को पूर्व प्रभाव से मंज़ूरी दे दी है।

लाभ

  • भारत और सिंगापुर के बीच फिनटेक पर संयुक्त कार्य समूह का गठन दोनों देशों के बीच फिनटेक के क्षेत्र में सहयोग के लिये किया गया है।
  • भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग से दोनों देशों को निम्नलिखित क्षेत्रों में फायदा पहुँचेगा :
    • एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेसेज (Application Programming Interfaces-APls)
    • रेग्यूलेटरी सैंडबॉक्स (Regulatory Sandbox)
    • भुगतान में सुरक्षा और डिजिटल नकद प्रवाह
    • इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण के लिये रुपे-नेटवर्क (Network for Electronic Transfers - NETS) का समेकन
    • यूपीआई फास्ट पेमेंट लिंक (UPI-FAST payment link)
    • आसियान क्षेत्र में आधार स्टैक और ई-केवाईसी तथा नियमों में सहयोग
    • वित्तीय बाज़ारों और बीमा क्षेत्र तथा सैंडबॉक्स मॉडलों के विकास के क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करना, आदि।

इसका क्षेत्र और कार्य सीमाएँ:

  • सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली का आदान-प्रदान : सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के साथ नियामक संपर्क में सुधार के लिये।
    • फिनटेक से जुड़ी नीतियों और नियामकों संबंधी अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना।
    • फिनटेक फॉर्मों और परिसंपत्तियों द्वारा बिना किसी भेदभाव के आँकड़ों के इस्तेमाल से जुड़े मानकों को तैयार करने को प्रोत्साहन देना।
    • साइबर सुरक्षा, वित्तीय जालसाजी के साथ-साथ दुनिया में उत्पन्न नए खतरों सहित नियामक संस्थानों में उपयुक्त अधिकारियों को क्षमता निर्माण के कार्य की शुरूआत करना।
  • सहयोग को बढ़ावा : भारत और सिंगापुर में वित्तीय-टेक्नोलॉजी उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिये।
    • फिनटेक क्षेत्र में फॉर्मों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
    • व्यावसायिक/वित्तीय क्षेत्र के लिये फिनटेक समाधान के विकास को बढ़ावा देना।
    • दोनों देशों की उपयुक्त नीतियों के अनुरूप, फिनटेक में सिंगापुर और भारत के बीच उद्यमिता/स्टार्ट-अप प्रतिभा के सहयोग को प्रोत्साहन देना।
  • अंतर्राष्ट्रीय मानकों का विकास :
    • एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेसेज़ (Application Programming Interfaces (APIs) एंड स्टैंडर्ड के अंतर्राष्ट्रीय संस्करण के गठन को प्रोत्साहन देना, जो भारत और सिंगापुर में सार्वजनिक प्रणाली में तैयार एपीआई के साथ अंतर संचालन है।
      • डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर रहे निवासियों को सीमापार सत्यापन और इलेक्ट्रॉनिक नो-योर-कस्टमर (ई-केवाईसी) के लिये सक्षम बनाना।
      • एकीकृत भुगतान इंटरफेस और तेज़ी से सुरक्षित हस्तांतरण डिजिटल फंड हस्तांतरण मंचों के बीच भुगतान संपर्क-सहयोग को सक्षम बनाना।
      • भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payments Corporation of India-NPCI) और इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण नेटवर्क (Network for Electronic Transfers-NETS) जैसे भुगतान नेटवर्कों के बीच संपर्क के ज़रिये रुपे क्रेडिट/डेविड कार्डों पर क्रॉस लर्निंग को सक्षम बनाना।
      • एकीकृत भुगतान इंटरफेस और त्वरित प्रतिक्रिया (Quick response-QR) कोड आधारित भुगतान स्वीकृति को सक्षम बनाना।
      • ई-हस्ताक्षर, एक्रॉस बोर्डर्स के ज़रिये डिजिटल हस्ताक्षर के इस्तेमाल को सक्षम बनाना।
  • भारत और सिंगापुर के बीच निम्न क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहनः
    • डिजिटल शासन।
    • वित्त्तीय समावेशन।
    • आसियान फाइनेंशियल इनोवेशन नेटवर्क (ASEAN Financial Innovation Network- (AFIN) एजेंडा में सहभागिता।

स्रोत : पी.आई.बी. एवं इकोनॉमिक टाइम्स

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